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दाऊद के बारे में ज़्यादा नहीं जानता: हुडा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रामगोपाल वर्मा की अगली फ़िल्म 'डी' भारतीय सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जा रही है. अंडरवर्ल्ड पर आधारित इस फ़िल्म को लेकर शुरू से ही विवाद रहा और जानकारों के मुताबिक यह माफ़िया सरगना दाऊद इब्राहिम पर आधारित है. पर इस फ़िल्म की एक ख़ास बात यह भी है कि रामू की इस फ़िल्म में एक नया चेहरा मुख्य भूमिका में सामने आया है. यह नाम है रणदीप हुडा का, जिन्हें इससे पहले 'मानसून वेडिंग' में राहुल के रूप में देखा गया था. व्यावसायिक बॉलीवुड सिनेमा में उनके कैरियर की पहली फ़िल्म के बारे में पाणिनी आनंद ने पिछले दिनों रणदीप से बातचीत की. अपने प्रदर्शन से पहले ही फ़िल्म विवादों में घिर गई. आरोप लगा कि फ़िल्म अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद पर आधारित है पर रामगोपाल वर्मा इससे मना कर रहे हैं. ऐसे में फ़िल्म को क्या स्टंट माना जाए. मैं तो फ़िल्म में केवल एक अभिनेता के रूप में हूँ. मैं दाऊद के बारे में ज़्यादा नहीं जानता और इसलिए मैं इस फ़िल्म में अपनी ज़िंदगी की उनसे तुलना नहीं कर रहा हूँ. फ़िल्म स्टंट है या नहीं, मैं नहीं जानता और सच्चाई है या नहीं, यह भी नहीं जानता. ख़बरें ऐसी भी हैं कि मुंबई के कुछ माफ़िया सरगनाओं के दबाव के चलते रामू इस तरह का खंडन कर रहे हैं. इस बात में कितनी सच्चाई है. इस बारे में मैं कुछ ख़ास नहीं जानता और मुझे उतनी ही जानकारी है जितनी की और लोगों को है. सो इस बारे में कुछ कहना उचित नहीं है. अंडरवर्ल्ड पर भारतीय सिनेमा में तमाम फ़िल्में बनती रही हैं. रामू की इस फ़िल्म को आप बाक़ी फ़िल्मों की तुलना में किस तरह से देख रहे हैं. रामू काफ़ी अलग किस्म की और यथार्थवादी फ़िल्में बनाते हैं. मैं यह नहीं कह रहा कि बाक़ी लोग ऐसा नहीं करते. पर रामू इन विषयों के काफ़ी माने हुए निर्देशक हैं और मैं बहुत ख़ुश हूँ कि उनकी फ़िल्म में मुझे काम करने का मौका मिला. 'मानसून वेडिंग' जैसी फ़िल्म के बाद अब रामू के साथ एक बिल्कुल अलग विषय पर काम करना कैसा लग रहा है. मुझे लगता है कि अगर इतने तरह के प्रयोग न हों तो किसी भी कलाकार को डूब मरना चाहिए. मैं अपने काम और क्षमताओं के साथ पूरा न्याय करना चाहता हूँ और इसे एक अच्छे अवसर के रूप में देखता हूँ. आगे भी ऐसी विविधता बनी रहे, ऐसा मैं चाहता हूँ. आपने पहली फ़िल्म ही रामू के साथ की है. कैसे पहुँचे बॉलीवुड के इस पड़ाव तक. देखिए, मैं हरियाणा के रोहतक ज़िले के एक गाँव दसिहा का रहनेवाला हूँ. सोनीपत और दिल्ली में मैं पढ़ा और फिर ऑस्ट्रेलिया चला गया. वहाँ पाँच साल बिताकर मैंने अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरूआत की. इस दौरान रंगमंच और मानसून वेडिंग में काम करने का मौका मिला. मैं काफ़ी ख़ुश हूँ कि मुझे अपने शुरुआती दौर में ही रामू जैसे निर्देशक के साथ काम करने का मौका मिला. वैसे जीवन में संघर्ष तो होता ही है पर संघर्ष केवल हालातों से नहीं होता है बल्कि ख़ुद से भी होता है. अगर आदमी अपना नज़रिया बदल दे तो संघर्ष एक सुहावना सफ़र हो सकता है और न बदले तो संघर्ष अंत भी बन जाता है. आगे के फ़िल्मी कैरियर को किस रूप में देख रहे हैं. आगे की ज़िदगी किसी को नहीं मालूम होती. मेरी समझ में आगे की ज़िदगी वही होती है जो कुछ अलग सोचती है, कुछ अलग करना चाहती है. |
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