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'काम में सौ प्रतिशत प्रतिबद्धता ज़रूरी' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कम लोग ये जानते हैं कि अभिनेता राहुल बोस अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले विज्ञापनों के क्षेत्र में नाम कमा चुके हैं. कोलकाता में बचपन गुज़ार चुके बोस ने स्टेज पर पहला कदम रखा मात्र छह साल की उम्र में. बॉक्सिंग और रग्बी में बेहद दिलचस्पी रखने वाले इस अभिनेता ने ‘इंग्लिश ऑगस्ट’, ‘बॉम्बे ब्वायज़’, ‘तक्षक’, ‘चमेली’ और ‘झंकार बीट्स’ जैसी फ़िल्मों से शोहरत हासिल की है. आने वाली फिल्म ‘प्यार के साइड इफेक्ट्स’ में राहुल नज़र आयेंगे अभिनेत्री मल्लिका शेरावत के साथ, एक कॉमेडी रोल में. प्रतीक्षा घिल्डियाल ने राहुल से पूछा उनके करियर, निजी जीवन और उन पर पड़े अभिनय के साइड इफेक्ट्स के बारे में. 'प्यार के साइड इफेक्टस' में आपका किरदार सिड शादी करने के नाम से काँपता है. सिड के बारे में हमें कुछ बताइए. मेरा किरदार सिड एक डीजे है. वो एक कामयाब इंसान होने के साथ-साथ खुशमिज़ाज और प्यारा भी है. वो मल्लिका शेरावत से प्यार तो करता है लेकिन शादी करने से डरता है. आपका किरदार सिड फिल्म में कमिटमेंट से घबराता है, किसी शादी-वादी के बंधन में नहीं बंधना चाहता. सुना है आप असल ज़िंदगी में भी ऐसे हैं. मैं ज़िंदगी में जो भी करता हूँ वो सौ फीसदी प्रतिबद्धता के साथ करता हूँ और किसी भी रिश्ते के लिए भी ये ज़रूरी है कि आप उसे पूरी ईमानदारी से निभाएँ. अब आप चाहे वो रिश्ता दस साल रहे या एक दिन इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. महत्वपूर्ण ये है कि आप उसे पूरी सच्चाई से निभाएँ. अगर लोग ये गुर याद रखें तो दुनिया में कहीं ज़्यादा खुशियाँ होंगी. रग्बी की आपने बात कही तो जिस देश में क्रिकेट को धर्म माना जाता है और क्रिकेट के बाद फुटबॉल, हॉकी जैसे खेलों का ही नाम आता है तो ऐसे में आपने रग्बी ही क्यों चुना. मुझे क्रिकेट बेहद पसंद है, ये मेरा पसंदीदा खेल है, देखने के लिहाज़ से. लेकिन मैंने रग्बी को चुना जब मैं 14 साल का था और मैंने कभी ये सोच कर नहीं खेला कि मुझे उससे शोहरत या बुलंदी हासिल हो. मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मैं अपने देश के लिये रग्बी खेलूँगा. मेरे लिए केवल ये बात मायने रखती है कि मैं हमेशा कोई चुनौतीपूर्ण काम करूँ जो कि दिलचस्प भी हो और मैंने पहले कभी न किया हो. अभिनय में इतने साल गुज़ार देने के बावजूद आपने कभी व्यावसायिक सिनेमा का रुख नहीं किया, एक तक्षक को छोड़कर. तक्षक भी मेरे खयाल से बाकी बॉलीवुड फिल्मों से अलग ही थी. मुझे बॉलीवुड फिल्मों के फ़ार्मूलों में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है. वही कहानी, वही गाने मुझे बोर कर देते हैं. जिस चीज़ में मुझे विश्वास नहीं, वो मैं क्यों करूं. खैर, अगर प्यार के साइड इफेक्ट्स की बात की जाए तो ये बाकी बॉलीवुड फ़िल्मों से अलग होते हुए भी मेरी अब तक की सबसे मसाला फिल्म है. मल्लिका शेरावत के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा. मैं हमेशा अपने सह अभिनेताओं और अभिनेत्रियों से उम्मीद करता हूँ उनसे काम के प्रति ईमानदारी की और सच्ची प्रतिभा दिखाने की, मल्लिका मेहनती और ईमानदार होने के साथ-साथ एक उम्दा कॉमेडी कलाकार हैं. इसी तरह करीना कपूर और कोंकणा सेन शर्मा में भी बेहद प्रतिभा है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'द बेट कलेक्टर' को सर्वेश्रेष्ठ फ़िल्म का ख़िताब24 जुलाई, 2006 | पत्रिका हिंदी सिनेमा: सामाजिक प्रतिबद्धता से बाज़ार प्रेम तक10 अगस्त, 2006 | पत्रिका कई किरदार निभा सकती हैं जूही21 अगस्त, 2006 | पत्रिका माधुरी मेरी आदर्श अभिनेत्रीः प्रियंका23 अगस्त, 2006 | पत्रिका बांग्ला फ़िल्म में बिहारी बने अभिषेक10 सितंबर, 2004 | पत्रिका सोनिया पर फ़िल्म को लेकर विवाद07 सितंबर, 2004 | पत्रिका शिया-सुन्नी पर बनी फ़िल्म विवादों में03 सितंबर, 2004 | पत्रिका एक और नई प्रेमकहानी03 सितंबर, 2004 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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