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पेरिस के एलबम पर सेंसर की कैंची | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में टेलीविज़न दर्शक मशहूर मॉडल पेरिस हिल्टन का म्यूज़िक वीडियो 'लव इज़ ब्लाइंड' नहीं देख पाएंगे. वजह यह है कि भारत के सेंसर बोर्ड ने इस वीडियो को 'केवल वयस्कों के लिए' यानी (ए) प्रमाणपत्र जारी कर दिया है. इसके अलावा बुधवार को ही एक अदालत ने टेलीविज़न चैनलों पर ‘ए’ प्रमाणपत्र वाली फ़िल्में और म्यूज़िक वीडियो दिखाए जाने पर पाबंदी लगा दी है. मतलब यह कि हिल्टन के नए एलबम को भारत में टेलीविज़न चैनलों के ज़रिए प्रसारित कर पाने की अनुमति नहीं मिल सकेगी. म्यूज़िक वीडियो में दिखाया गया है कि पेरिस हिल्टन एक समुद्री तट पर घूम रही हैं और एक फ़ोटोग्राफर उनके चित्र उतार रहा है. उधर भारत में पेरिस हिल्टन के पहले एल्बम को लाँच करने वाली कंपनी ईएमआई म्यूज़िक इंडिया का कहना है कि फ़िलहाल उसका इरादा इसे टेलीविज़न पर दिखाने का नहीं है. सेंसर की कैंची कंपनी के प्रवक्ता ने बीबीसी ऑनलाइन को बताया कि उन्होंने एल्बम को सेंसर बोर्ड के पास भेजने से पहले कुछ हिस्सों को हटा दिया था. इसके बावजूद बोर्ड को इसमें कामुक संकेत दिखे और इसे ‘ए’ सर्टिफ़िकेट दे दिया गया. मुंबई में बीबीसी की संवाददाता मोनिका चड्ढा का कहना है कि दुनिया के बाक़ी देशों की तुलना में भारत में काफी कम अश्लीलता और हिंसा दिखाने पर भी ‘ए’ प्रमाणपत्र दे दिया जाता है. दूसरी ओर, सेंसर बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विनायक आज़ाद का कहना है कि म्यूज़िक वीडियो को नियमों के अनुसार ही प्रमाणपत्र दिया गया है. आज़ाद कहते हैं कि नियमों के अनुसार ऐसी फ़िल्में और म्यूज़िक वीडियो जिनमें गीत या नृत्य के ज़रिए कामुकता को बढ़ावा दिया जा रहा हो, उन्हें ‘ए’ प्रमाणपत्र दिया जाता है. |
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