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अमरीकी फ़िल्मों में सेक्स और हिंसा बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी फ़िल्मों में पिछले एक दशक में सेक्स, हिंसा और गाली-गलौज के प्रदर्शन में काफ़ी वृद्धि हुई है. ये दावा किया गया है प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय की ओर से कराए गए एक अध्ययन में. इस अध्ययन से जुड़े लोगों का कहना है कि अमरीका में फ़िल्मों की रेटिंग निर्धारित करने की व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत है ताकि ये तय किया जा सके कि किस फ़िल्म को किस तरह के लोग देख सकते हैं. हार्वर्ड स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के किड्स रिस्क प्रोजेक्ट ने अपने अध्ययन में विभिन्न रेटिंग वाली फ़िल्मों का अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि जिन फ़िल्मों को पेरेंटल गाइडेंस यानी पीजी और 13 वर्ष तक के बच्चों के लिए पीजी13 की रेटिंग दी गई उनमें 1992 और 2003 के बीच हिंसा ज़्यादा दिखाई जाने लगी. उन्होंने ये भी पाया कि पीजी, पीजी13 और आर श्रेणी वाली फ़िल्मों में सेक्स से जुड़ी सामग्रियाँ बढ़ने लगीं. आर श्रेणी में वैसी फ़िल्मों को रखा जाता है जिनको देखने के लिए 17 साल तक के बच्चे किसी बड़े व्यक्ति के साथ जा सकते हैं. किड्स रिस्क प्रोजेक्ट के किम्बर्ली थॉम्पसन कहते हैं,"समय आ गया है कि अच्छी तरह से सोच-विचार कर एक विश्वव्यापी रेटिंग प्रक्रिया तय की जाए". शोध में ये भी पाया गया कि परिवार के लिए देखी जाने लायक जी रेटिंग वाली एनिमेशन फ़िल्मों में बिना एनिमेशन वाली फ़िल्मों की तुलना में अधिक हिंसा पाई गई. अध्ययन में ये कहा गया कि बच्चों के माता-पिता को इस बारे में अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए कि वे अपने बच्चों को कौन-सी फ़िल्में देखने दे रहे हैं. |
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