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'वयस्कों वाली फ़िल्में टीवी पर नहीं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में मुंबई उच्च न्यायालय ने टेलीविज़न चैनेलों पर 'केवल वयस्कों के लिए' सर्टिफ़िकेट वाली फ़िल्में और म्यूज़िक वीडियो दिखाए जाने पर पाबंदी लगा दी है. यह प्रतिबंध केबल ऑपरेटरों, प्रसारकों और डीटीएच सर्विस उपलब्ध कराने वाले ऑपरेटरों पर लागू होगा. इस फ़ैसले से स्टार मूवीज़ और ज़ी नेटवर्क जैसे चैनेल भी प्रभावित होंगे और इन चैनेलों के अधिकारी एक बैठक में इसके प्रभावों पर विचार कर रहे हैं. यह निर्देश एक याचिका के बाद दिए गए हैं जिसमें कहा गया था कि टीवी चैनेल अश्लील वीडियो और फ़िल्में दिखा रहे हैं जिनसे युवावर्ग पर ख़राब असर पड़ रहा है. पुलिस ने इसके बाद मुंबई के कुछ केबल ऑपरेटरों के दफ़्तरों में छापे मारे और उनके उपकरण ज़ब्त कर लिए. इससे नाराज़ महाराष्ट्र भर के केबल ऑपरेटरों ने सोमवार और मंगलवार को हड़ताल की.
दो दिन तक टेलीविज़न के परदे पर सन्नाटा छाया रहा. ऑपरेटरों का कहना था कि टीवी पर क्या दिखाया जाए क्या नहीं इसका फ़ैसला मूवी चैनेल करते हैं, वे नहीं. इस बात को लेकर दर्शक भी बंटे हुए थे. कुछ का कहना था कि इस पाबंदी से अब परिवार के लोग एक साथ बैठ कर टीवी देख पाएँगे तो कुछ लोग इस फ़ैसले से नाराज़ भी थे. उनका कहना है कि वयस्कों के लिए प्रमाणपत्र वाली फ़िल्में रात ग्यारह बजे से दिखाई जा सकती हैं जब बच्चे सो चुके होते हैं. उनका तर्क है कि लोगों को यह चयन करने का अधिकार होना चाहिए कि वे क्या देखना चाहते हैं. मुंबई से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस बात की संभावना है कि उच्च न्यायालय के इस फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाएगी. |
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