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ब्रिक लेन की शूटिंग से लोग नाराज़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन के ब्रिक लेन इलाक़े में रहने वाले लोगों के जीवन पर आधारित पुस्तक ब्रिक लेन पर बन रही फ़िल्म की शूटिंग ब्रिक लेन में करने की योजना से इलाक़े के लोग नाराज़ है. पूर्वी लंदन के ब्रिक लेन में भारी संख्या में बांग्लादेशी लोग रहते हैं और इन्हीं के जीवन पर मोनिका अली ने ब्रिक लेन नामक पुस्तक लिखी थी जो काफी चर्चित रही. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुस्तक ब्रिक लेन में रहने वाले बांग्लादेशियों का अपमान करती है. पुस्तक मूलत एक बांग्लादेशी महिला की कहानी है जो ब्याही जाने के बाद लंदन आ गई है. उसके दुख, उसकी मनोदशा के ज़रिए मोनिका अली ने इस पुस्तक में बांग्लादेशियों के जीवन के कष्टों को दिखाने की कोशिश की है. ब्रिक लेन बिज़नेस एसोसिएशन के अध्यक्ष महमूद रॉग कहते हैं कि इस मुद्दे पर सभाएं हो रही हैं और जैसा समुदाय के लोग चाहेंगे वही होगा. रॉग कहते हैं कि पुस्तक साहित्य के क्षेत्र में अच्छा काम है लेकिन यह एक विशेष समुदाय का अपमान करती है. वो कहते हैं " मोनिका अली इस समुदाय की नहीं है. उन्होंने जो भी लिखा वो बस क़यासों पर आधारित है." वो कहते हैं कि रुबी फिल्म कंपनी को इस फ़िल्म की शूटिंग ब्रिक लेन इलाक़े में करने का कोई अधिकार नहीं है.
रॉग कहते हैं " लोग इस फ़िल्म से नाराज़ हैं. अधिकारियों ने यहां शूटिंग की अनुमति दे दी इसका ये अर्थ नहीं कि समुदाय भी इसकी इजाज़त देगा." कंपनी ब्रिक लेन पर फ़िल्म बना रही कंपनी रुबी फिल्म ने बयान जारी कर कहा है कि फ़िल्म की प्रोडक्शन की पूरी प्रक्रिया में हमने स्थानीय समुदाय से संपर्क बनाए रखा है और कई लोग फ़िल्म से जुड़े भी हुए हैं. बयान में कहा गया है " जब ये फ़िल्म पूरी बन जाएगी तब हम किसी से भी बात करने को तैयार हैं और फ़िल्म के बारे में उनकी राय का भी सम्मान करेंगे." स्थानीय काउंसिल टॉवर हैमलेट्स का कहना है कि वह इस मुद्दे पर लोगों की चिंताएं सुनने के लिए तैयार है और हम आम तौर पर शूटिंग को अनुमति देते हैं क्योंकि इससे पैसे आते हैं और छोटे इलाक़ों का नाम होता है. मोनिका अली की यह पुस्तक 2003 में बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित हुई थी लेकिन उसे बुकर नहीं मिला. | इससे जुड़ी ख़बरें सब मिलता है लंदन में27 अक्तूबर, 2003 | मनोरंजन लंदन की देसी दीवाली 23 अक्तूबर, 2003 | मनोरंजन शोले की बात ही कुछ ऐसी है...01 सितंबर, 2004 | मनोरंजन गोंड कला की छाप सात समंदर पार भी04 अक्तूबर, 2004 | मनोरंजन बिक गया मोम का जादूघर29 मार्च, 2005 | मनोरंजन ज़हूर का होटल और यादें15 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन एक और पुस्तक विवादों के घेरे में04 दिसंबर, 2003 | मनोरंजन ब्रिक लेन, बांग्लादेश और ब्रिटेन22 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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