BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 13 जुलाई, 2006 को 12:26 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
इस समय एकजुटता ज़रूरी है: आमिर ख़ान

आमिर ख़ान
आमिर ख़ान ने भी मुंबई वासियों की हिम्मत की दाद दी
मैं उस समय सतारा में था जब मुंबई विस्फोटों की ख़बर सुनी.

मैं स्तब्ध रह गया और मैंने मुंबई फ़ोन करने की कोशिश की लेकिन कोई लाइन नहीं मिल पाई.

वहाँ पर टेलीविज़न भी नहीं था और मैं तुरंत मुंबई संपर्क करना चाहता था. लेकिन सभी लाइनें बंद थीं.

मुझे कुछ पता नहीं चल रहा था कि वहाँ हो क्या रहा है. लेकिन मैं हैरान ज़रूर था.

मुझे उन लाखों लोगों की चिंता थी जो ट्रेनों में सफ़र करते हैं.

 अगर लोग इस बात को लेकर धैर्य खो रहे हैं तो उन्हें याद रखना चाहिए कि पुलिस और सेना का अपराधों से निबटना उनके लिए रोज़मर्रा की बात है और वे जानते हैं कि इस स्थिति में क्या करना चाहिए.
आमिर ख़ान

मुझे अपने स्टाफ़ की भी चिंता थी और मैं जानना चाहता था कि वे ख़ैरियत से घर पँहुच गए या नहीं लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा था.

फिर शुक्र है कि मेरे चार्टर्ड अकाउंटेंट ने मुझे फ़ोन किया और उनसे कुछ जानकारी मिली.

मुंबई की उदार भावना

यह बहुत बुरा हुआ. लेकि लोग जिस तरह बाहर जा कर एक दूसरे की मदद कर रहे हैं वह मुंबई के लोगों की उदार भावना का परिचायक है.

पुलिस भी बहुत अच्छा काम कर रही है. वे इसमें सक्षम भी हैं.

अगर लोग इस बात को लेकर धैर्य खो रहे हैं तो उन्हें याद रखना चाहिए कि पुलिस और सेना का अपराधों से निबटना उनके लिए रोज़मर्रा की बात है और वे जानते हैं कि इस स्थिति में क्या करना चाहिए.

हमें इस समय अपने नेताओं का अनुसरण करना चाहिए और उन पर भरोसा रखना चाहिए. उन्हें हमारे सहयोग की ज़रूरत है.

इस भयावह कार्रवाई से उस कायरता का पता चलता है जिसकी वजह से लोग ट्रेनों में बम रख कर मासूम लोगों की जानें ले लेते हैं.

 मुझे ख़ुशी है कि हम इस सब को अपने पीछे छोड़ कर काम कर निकल आए हैं. इससे इन लोगों को यह पता चल गया कि हम इन कायरतापूर्ण, घृणित हरकतों से घबराने वाले नहीं हैं.
आमिर ख़ान

आख़िर आम लोगों को मार कर किसी को क्या मिला?

मुझे ख़ुशी है कि हम इस सब को अपने पीछे छोड़ कर काम कर निकल आए हैं. इससे इन लोगों को यह पता चल गया कि हम इन कायरतापूर्ण, घृणित हरकतों से घबराने वाले नहीं हैं.

इस समय सबसे ज़रूरी है कि हम एकजुट रहें और अधिकारियों की पूरी मदद करें.

अधिकारियों की मदद ज़रूरी

अगर हमारे पास ऐसी कोई भी जानकारी हो जिससे उनकी मदद हो सके तो हमें वह उन्हें देनी चाहिए.

यह किसी के लिए भी एक बड़ी दुश्वार परिस्थिति है. लेकिन इस तरह का मामला केवल भारत तक ही सीमित नहीं था. यह यूके में भी हुआ और अमरीका में भी. वहाँ भी यह सब अचानक ही हुआ.

जब हम इसके नतीजे देखते हैं तो वे बहुत ही दुखदायी हैं. इतनी जानें गईं. कितने परिवारों ने यह त्रासदी झेली. मेरा दिल उनके लिए भर आता है.

हमें निर्दोष जानों के जाने का शोक मनाना चाहिए और चरमपंथियों की इस घृणित कार्रवाई की भर्त्सना करनी चाहिए.

इन लोगों के लिए जान की कोई क़ीमत नहीं है. आख़िर किसी ऐसे व्यक्ति को मारना जिसे आप जानते भी नहीं क्या मायने रखता है?

यह तो एक ऐसी कार्रवाई है जिसकी कोई तुक ही नहीं है.

मुंबईयात्रियों के अनुभव
ट्रेन में सवार यात्रियों का कहना है कि लोगों ने घायलों की मदद की.
लता मंगेशकरफ़िल्मी हस्तियों की राय
प्रमुख फ़िल्मी हस्तियों ने मुंबई धमाकों की कड़े शब्दों में निंदा की है.
पुलिसमुंबई पर निशाना?
बार बार मुंबई को ही चरमपंथी हमलों का निशाना क्यों बनाया जा रहा है ?
मुंबईमैं डर गई थी..
एक प्रत्यक्षदर्शी का आंखों देखा हाल जानिए. उन्हीं की जुबानी.
इससे जुड़ी ख़बरें
मुंबई में सात धमाके, 170 मौतें
11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस
खुफिया तंत्र की विफलता: विशेषज्ञ
11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस
मुंबई धमाकों का वीडियो
11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>