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गाल तक ठीक, पर मुखामुखम..? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
(बिंदास बाबू की डायरी) ज़माना एकदम बिंदास है. उन्मुक्त और 'फ़्री फ़ार ऑल' है. देखते ही देखते उस रात 'चुम्मा-चुम्मा दे दे' हुआ. एकदम बिंदास खेल हुआ. बिंदास बाबू ने पाया कि जब आइटम गर्ल ने गाल चुंबन किया और आइटम ब्वॉय ने आइटम गर्ल से प्रगाढ़ मुखामुखम किया तो देर तक ऐसा नहीं लगा कि कोई आफ़त आने वाली है. लेकिन आइटम गर्ल को आपत्ति हुई. गाल तक ठीक रहता, मुखामुखम कैसे हुआ. चुंबन को एफ़आईआर में बदल दिया. मसला आइटम की इज्ज़त का हो गया. बिंदास खेल अचानक ऐसी सीरियस बहस बन गया. अब आइटम महारानी कह रही हैं कि वो माफ़ी मांगे. आइटम ब्वॉय बोला कि अच्छा बाबा सॉरी. लेकिन ऐसा एक बार कहकर चुप हो गया. बिंदास पॉप कल्चर में, भांगड़े-शांगड़े नाच-गाने में पेज-थ्री मार्का चूमा-चाटी इन दिनों 'इन-थिंग' है तो एक पप्पी में ऐसा क्या हो गया. आइटम गर्ल ने पलट वार किया. यह बतलाइए कि ज़बरदस्ती क्यों किया? बात एक सही है. सहमति से सब जायज़ है. ज़बरदस्ती करना तो अपराध है. बात अटक गई. आइटम गर्ल ने ख़बरिया चैनलों को ख़बर देनी शुरू की. अपने यहाँ के चैनल टूट कर पड़े. जीता-जागता एकदम लाइव, हॉट से हॉट चुंबन सीन मिल रहा है. चुंबन विवाद जमकर बिकेगा. बजाओ भइए, पूरे दिन बजाओ. और वह पूरे दिन बजता रहा. बिंदास बाबू समूचे सुपर बिंदास कांड से कुछ नतीजे निकाल रहे हैं. हे पाठको, इनपर कुछ विचार करते रहना चाहिए. पहला, आइटम गर्ल का शौक है 'आइटम' को ख़बर बना देना. फिर टीवी पर विवाद करना. इस आइटम ज़माने में आइटम गर्ल से सावधान रहना. वो कब नाराज़ हो जाएँगी, वो नहीं जानतीं. कब टीवी पर जिरह कर बैठें, कुछ पता नहीं. दूसरा, आइटम गर्ल 'सुपर बिंदास गर्ल' होती हैं. नई सदी की नई औरत. बेधड़क. यही उनकी ताक़त है. इसको नमन करना चाहिए. तीसरा, चुंबन लें, चुंबन दें. पेज थ्री को पेज वन पर चुंबन लेने-देने दें. मगर ज़ोर-ज़बरदस्ती कभी न करें. ज़ोर-ज़बरदस्ती में हमेशा 'रिस्की एरिया' बन जाता है. हंगामा हो जाता है. चौथा, जब भी ऐसा हो तुरंत किसी भारतीय चैनल को पकड़ना. चूमा-चाटी से भरपूर, सेक्सी-वेक्सी से लबालब ख़बर बने, इसके इंतज़ार में ख़बरिया चैनल तरसते रहते हैं. बस आप आइटम चुंबन आदि की थोड़ी-सी झलक दिखलाने वाले टेप दें, फिर चैनल दिनभर गाते रहेंगे-'झलक दिखला जा'. आख़िरी बात यह कि आइटम गर्ल और आइटम ब्वॉय से यह कभी मत पूछना कि यारों, बर्थ-डे पार्टी को चैनल पार्टी क्यों बनाते हो. क्यों निजी मामलों को चौराहे पर लाते हो. और हाँ, यह तो बिल्कुल नहीं पूछना कि टीवी पर ख़बर बनने के लिए चूमा-चाटी के सीन के बाद अगला आइटम सीन क्या देने वाले हो. (बिंदास बाबू की डायरी का यह पन्ना आपको कैसा लगा लिखिए [email protected] पर) |
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