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किशोरों में बढ़ती सेक्स की ललक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मंदिरों पर प्रणय मुद्रा शिल्प के लिए विख्यात खजुराहो वाले राज्य मध्य प्रदेश के किशोरों पर भी अब खजुराहो का प्रभाव बढ़ने लगा है. मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा ले रहे लड़के लड़कियां न सिर्फ़ यौन संबंध बना रहे हैं बल्कि इसपर खुलेआम बातचीत करने में भी उन्हें कोई झिझक नहीं है. सामाजिक रुप से रुढ़िवादी समझे जाने वाले इस इलाके में शारीरिक संतुष्टि की तलाश कर रहे ये बच्चे एड्स और एचआईवी जैसे ख़तरों से पूरी तरह वाकि़फ़ हैं और सुरक्षित सेक्स के उपायों से परिचित हैं. मध्य प्रदेश एड्स कंट्रोल सोसायटी की निदेशक सेलिना सिंह कहती हैं कि लड़के लड़कियों का खुल कर यौन संबंधों के बारे में बात करना उनके लिए चौंकाने वाला रहा. सेलिना और उनके सहयोगियों के लिए राहत की बात यही थी कि अधिकतर बच्चे यौन संबंध बनाने के दौरान सेक्स से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए आवश्यक उपाय कर रहे थे और उन्हें एड्स के बारे में अच्छी खासी जानकारी थी. एड्स कंट्रोल सोसाइटी और मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग ने मिलकर एड्स पर जानकारी फैलाने के लिए एक मुहिम की शुरूआत की है. इसके पहले चरण में सरकारी और सरकार की वित्तीय सहायता से चलाए जाने वाले 2700 स्कूलों को शामिल किया गया है. सेलीना सिंह का कहना है कि यह मुहिम राज्य के समस्त 8 हज़ार सरकारी स्कूलों में आगे भी जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि बच्चों से बातचीत के दौरान जुटाई गई इस जानकारी के दौरान राहत की यह बात सामने आई कि अधिकतर युवक युवतियाँ एचआईवी और अन्य यौन रोगों से बचने के लिए सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं. एड्स कंट्रोल सोसाइटी का कहना है कि किशोरों में यौन संबंधों की बढ़ती जिज्ञासा के लिए टीवी फ़िल्म और इंटरनेट को इल्जाम देना बेकार है बल्कि लोगों को यह मान लेना चाहिए कि आज के बच्चे बच्चियाँ शारीरिक तौर पर जल्दी व्यस्क हो रहे हैं. इस तरह के युवा लोगों से बातचीत करने के लिए एड्स सोसाइटी ने एक दल को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया था जिसने विद्यार्थियों से बातचीत के अलावा उन्हें प्रजनन, प्रेम और परिवार की अहमियत जैसे विषयों पर भी जानकारी दी. सर्वे के दौरान करीब 30 प्रतिशत लड़कियों ने बताया कि उनका पहला शारीरिक संबंध किसी करीबी रिश्तेदार के साथ हुआ. सर्वे में अधिकतर किशोरों ने माना कि वो ऐसी फ़िल्में देख चुके हैं जो सिर्फ वयस्कों के लिए होती हैं. बुंदेलखंड की एक बालिका ने सरकार की प्रशिक्षित टीम के साथ बातचीत के दौरान कहा कि उसे अपने शिक्षक और दोस्तों के ज़रिए यौन संबंधों के बारे में जानकारी मिली और उसने पहली बार ऐसे संबंध बनाए. सरकारी टीम के अनुसार इस लड़की का कहना था “मुझे मालूम था कि यह प्रेम नहीं है औऱ हो भी नहीं सकता. फिर भी मुझे यह पसंद आया. ” सविता ठाकुर का कहना है कि इस तरह के उदाहरण एड्स पर बनाई जा रही नीति में मददगार साबित होंगे. हालाँकि मध्यप्रदेश में एड्स संबंधित मामले अन्य राज्यों की तुलना में कम है लेकिन पिछले एक दशक में ऐसे 1740 मामले यहाँ सामने आए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें जिस्मानी ज़रूरत के लिए ज़मानत माँगी24 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस सेक्स शिक्षा के लिए स्कूल05 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस अश्लील एमएमएस विवाद से उठे सवाल15 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस गाँवों में एड्स फैलने पर चिंता30 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस दक्षिण भारत में एचआईवी में कमी30 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस सेक्स के भद्दे चित्रण का पुरस्कार05 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस कार के ख़रीदारों की नीयत पर शक08 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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