| सेक्स शिक्षा के लिए स्कूल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक ऐसा स्कूल खुलने वाला है जहाँ लोगों को सेक्स के विभिन्न पहलुओं की शिक्षा दी जाएगी. कुछ व्यापारियों ने कोलकाता नगर निगम से सेक्स स्कूल खोलने का लाइसेंस माँगा है. इस परियोजना के मुख्य कर्ताधर्ता गिरधारी जोशी कहते हैं कि “स्कूल में सेक्स के बारे में सब कुछ सिखाया जाएगा. इसमें संभोग की कला से लेकर शीघ्रपतन और नपुंसकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी.” जोशी कहते हैं कि “हम कामशास्त्र की शिक्षा देना चाहते हैं कामसूत्र की नहीं. दोनों में काफी फर्क़ है.” जोशी कोलकाता से कुछ दूरी पर एक आयुर्वेदिक क्लीनिक चलाते हैं. आखिर ऐसे स्कूल का विचार कहाँ से आया? इसके जवाब में वे कहते हैं कि “अब स्कूली पाठ्यक्रम में भी सेक्स यानी लाइफस्टाइल को शामिल किया जाएगा. इसलिए मैंने उन लोगों के लिए एक स्कूल खोलने की योजना बनाई जिनके स्कूली दिनों में सेक्स की शिक्षा नहीं मिली.” वे बताते हैं कि “इस स्कूल में सिर्फ एमबीबीएस और आयुर्वेद की स्नातक डिग्री वाले लोगों को ही शिक्षक रखा जाएगा ताकि सेक्स के बारे में लोगों में फैली भ्रांति दूर हो सके.” असमंजस कोलकाता नगर निगम के भवन विभाग के मेयर-इन-काउंसिल स्वप्न समादार कहते हैं कि “इस विवादास्पद परियोजना को लाइसेंस देने के पहले इसके सभी पहलुओं की जाँच की जाएगी.” राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री कांति विश्वास को बीते सप्ताह इस स्कूल के उदघाटन का न्योता मिला था लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया. विश्वास कहते हैं कि “सरकार बंगाल में ऐसे किसी स्कूल को कोई समर्थन नहीं देगी." लेकिन जोशी इससे परेशान नहीं हैं. वे कहते हैं कि “महानगर से सैकड़ों लोग रोजाना इस बारे में उनको फोन कर रहे हैं. कोलकाता के रुढ़िवादी समाज को ऐसे संस्थान की सख्त जरूरत है.” वे व्यस्त एक्जिक्यूटिव तबके के लिए विशेष कार्यशाला भी आयोजित करेंगे, जहां प्यार करने की विभिन्न कलाओं की स्लाइड और फिल्म दिखाई जाएगी. जोशी कहते हैं कि “यह पोर्नोग्राफी नहीं होगी.” छात्रों की जरूरत के हिसाब से कोर्स की अवधि तीन से छह माह तक होगी और फीस होगी दो से सात हजार रूपए तक. इस स्कूल के लिए बारह सौ वर्गफीट का एक फ्लैट किराए पर लिया गया है लेकिन जोशी फिलहाल उसका पता बताने को तैयार नहीं हैं. वे कहते हैं कि “मंजूरी मिल जाए. उसके बाद सब कुछ सामने होगा.” स्कूल के लिए उपकरणों की खरीद पर लगभग छह लाख रुपए भी खर्च किए जा चुके हैं. |
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