|
विश्वनाथन का उपन्यास दुकानों से हटा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में एक भारतीय मूल की लेखिका काव्या विश्वनाथन का पहला और बहुचर्चित उपन्यास इन आरोपों के बाद अब दुनिया भर की दुकानों से हटाया जा रहा है कि उन्होंने अपना उपन्यास लिखने में साहित्यिक चोरी की है. प्रतिष्ठित हॉवर्ड विश्वविद्यालय की छात्रा काव्या विश्वनाथन ने अपने उपन्यास में एक अन्य लेखिका की किताबों के अंश शामिल करने के लिए माफ़ी मांगी है और आगे से ऐसी ग़लती नहीं करने का आश्वासन भी दिया है. अमरीका में इस उपन्यास का प्रकाशन करने वाली कंपनी लिटल ब्राउन ने देश के पुस्तक विक्रेताओं से इस किताब को वापस करने को कहा है. इसके अलावा कंपनी ने भारत और यूरोप के साथ-साथ अन्य देशों में भी इस पुस्तक को बाज़ार से हटाए जाने के निर्देश जारी कर दिए हैं. अमरीका में इस उपन्यास की 100, 000 प्रतियाँ छापी गई थीं. खबरों के मुताबिक भारत में भी एक महीने के भीतर ही इस किताब की 10,000 से ज़्यादा प्रतियाँ बेची जा चुकी हैं. और अब इसके विवादित हो जाने के बाद से इसकी बिक्री में तेज़ी भी बताई जा रही है. प्रकाशक कंपनी का कहना है कि विश्वनाथन अपने उपन्यास में ज़रूरी बदलाव करेंगी और उसके बाद इसे फिर से प्रकाशित किया जाएगा. भारत में जन्मी इस अमरीकी लेखिका का पहला उपन्यास बड़ी धूम के साथ बाज़ार में आया तो लेकिन विवादों में भी घिर गया. 19 वर्षीया इस नवयुवती का पहला उपन्यास – हॉव ओपल मेहता गॉट किस्ड, गॉट वाईल्ड, एंड गॉट अ लाईफ़ – को अप्रैल में ही बड़ी धूम धाम के साथ छापा गया था और समीक्षाओं में उनके लेखन को सराहा भी गया था. यहाँ तक की न्यूयॉर्क टाईम्स ने इस उपन्यास को अपनी बेहतरीन किताबों की सूची में भी शामिल किया था. हॉलीवुड की मशहूर कंपनी ड्रीम वर्क्स ने इस उपन्यास पर आधारित फ़िल्म बनाने के लिए भी काव्या विश्वनाथन के साथ सौदा किया. इसके अलावा लिटल, ब्राउन नामक प्रकाशन कंपनी ने इस उपन्यास के साथ एक और उपन्यास लिखने के लिए काव्या विश्वनाथन को 5 लाख डॉलर भी दे दिए हैं. यह मामला उस समय सामने आया जब पिछले रविवार, 23 अप्रैल को हॉवर्ड विश्वविद्यालय के कैंपस के एक समाचार पत्र – हॉवर्ड क्रिम्सन- में काव्या विश्वनाथन के इस उपन्यास के खिलाफ़ एक लेख छपा और आरोप लगाया गया कि इस उपन्यास में कम से कम 13 ऐसे अंश हैं जिसमे विश्वनाथन ने एक मशहूर अमरीकी लेखिका मेगन मैककैफर्टी की वर्ष 2001 और 2003 में लिखे गए दो उपन्यासों में से साहित्यिक चोरी की है. मैककैफर्टी के दो उपन्यासों का नाम है – स्लॉपी फ़र्स्ट्स – और – सेकंड हेलपिंग्स – जिनमे से यह अंश क़रीब-क़रीब हू-बहू नक़ल किए गए हैं. कितना बड़ा जुर्म? साहित्यिक चोरी को साहित्य की दुनिया में बहुत संगीन जुर्म माना जाता है. विश्वनाथन प्रतिष्ठित हॉवर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी साहित्य की पढ़ाई कर रही हैं और उनके उपन्यास की कहानी भी इसी विश्वविद्यालय के इर्द गिर्द घूमती है. उपन्यास की भारतीय मूल की ही अमरीकी पात्र ऑपेल मेहता भी इसी हॉवर्ड विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने के लिए आतुर होती हैं और उसके लिए तरह तरह के जतन करती हैं. काव्या विश्वनाथन ने एक बयान जारी कर इस मामले में मॉफी मांगी है. उनका कहना था कि उनसे अनजाने में ऐसी भूल हुई है और उन्होंने जान बूझकर यह साहित्यिक चोरी नहीं की है.
काव्या विश्वनाथन ने अपने ब्यान में कहा, “हाल ही में मैने जब ये समानताएँ देखीं तो मुझे बहुत आश्चर्य और दुख भी हुआ. मुझे लगता है कि चूँकि मैंने मैककैफर्टी के उपन्यास बचपन से ही पढ़े हैं इसलिए शायद वो मेरे मस्तिष्क में बैठ गए हैं और अनजाने में ही मैंने उन उपन्यासों के कुछ अंश अपने उपन्यास में शामिल कर लिए.” लेकिन साहित्यिक दुनिया के लोग शायद उनके इस तर्क को मानने के लिए तैयार नहीं हैं. काव्या विश्वनाथन ने मैककैफर्टी से माफ़ी मांगी है और कहा है कि वह अपने उपन्यास में से वह विवादित अंश हटा देंगी लेकिन मैककैफर्टी की किताबें प्रकाशित करने वाले रैंडम हाउस की प्रवक्ता जोएन पुलसीनी का कहना हैं कि जिस प्रकार से भाषा, पात्र और कहानी की संरचना की गई है उससे नहीं लगता है कि विश्वनाथन ने ग़लती से वह अंश अपने उपन्यास में शामिल किए थे. उनके मुताबिक कुल 45 ऐसे अंश हैं जो मैककैफर्टी की किताबों से लिए गए हैं. क्या भूल हुई है? मेगन मैककैफर्टी की प्रवक्ता जोएन पुलसीनी कहती हैं, “हमारे लिए यह मानना बहुत मुश्किल है कि काव्या विश्वनाथन ने यह साहित्यिक चोरी अनजाने में या भूल से की है.” लेकिन अभी इस मामले में साहित्यिक चोरी का कोई मुक़दमा दायर नहीं किया गया है. इस काल्पनिक उपन्यासकार काव्या विश्वनाथन का जन्म भारत के चेन्नई शहर में हुआ था और बचपन में ही इनके माता-पिता, जो दोनो डॉक्टर हैं, अमरीका आ गए थे.
अब वह अपने माता-पिता के साथ ही न्यू जर्सी में रहती हैं. और विश्वनाथन का सपना है कि वह वॉल स्ट्रीट की बैंकर बने. सितम्बर 2005 में उन्होंने हॉवर्ड विश्वविद्यालय में प्रवेश पाया और इसी हॉवर्ड विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रणाली के बारे में उन्हें उपन्यास लिखने की सूझ गई. इस तरह सिर्फ़ 17 साल की उम्र में ही उन्होंने उपन्यास लिखना शुरू कर दिया. लेकिन इस साहित्यिक चोरी के मामले ने रंग में भंग का काम किया है. हॉवर्ड जैसे विश्व के मशहूर विश्वविद्यालय में इस प्रकार की साहित्यिक चोरी की घटना को बेहद शर्मनाक माना जाता है. अब हॉवर्ड विश्वविद्यालय के अधिकारी भी इस मामले की जाँच कर रहे हैं. विश्वविद्यालय के सहायक डीन जॉन एलिसन इस जाँच का निर्देशन करेंगे. और अगर काव्या विश्वनाथन पर साहित्यिक चोरी का इलज़ाम साबित हो जाता है तो उन्हें विश्वविद्यालय से निकाला जा सकता है और हमेशा के लिए उनके प्रवेश पर पाबंदी भी लग सकती है. जबकि काव्या विश्वनाथन के प्रकाशक लिटल ब्राउन के पबलिशर माईकल पीएश को यकीन नहीं होता कि विश्वनाथन ने किसी प्रकार की साहित्यिक चोरी की है. उनका कहना है कि विश्वनाथन तो मेगन मैककैफर्टी को भविषय में प्रकाशित होने वाली प्रतियों में आभार भी प्रकट करना चाहती थीं. विश्वनाथन के प्रकाशक माईकल पीएश ने कहा, “हमे काव्या विश्वनाथन पर पूरा यक़ीन है. उन्होंने इस ग़लती के लिए खुलेआम माफी भी मांगी है. यह सिर्फ़ एक ग़लती है और हम उन्हें इसे सही करने का हर मौका देंगे.” विश्वनाथन के एजेंट वॉल्श भी उनकी ही तरफ़दारी करते हुए कहते हैं, “हम जानते हैं कि काव्या विश्वनाथन कितनी भली इंसान हैं और ऐसी कोई भी ग़लती अनजाने में ही हुई होगी. इस तरह के नई उम्र के लड़के-लड़कियाँ एक दूसरे की बोलचाल के तरीके और भाषा को अपना ही लेते हैं.” | इससे जुड़ी ख़बरें ताज महल पाकिस्तान में प्रदर्शित हुई24 अप्रैल, 2006 | मनोरंजन न्यूयॉर्क में 'मुस्लिम फ़िल्मोत्सव'20 अप्रैल, 2006 | मनोरंजन न्यूयॉर्क में देसी फ़िल्मों का फेस्टिवल05 नवंबर, 2005 | मनोरंजन अमिताभ का जादू सर चढ़कर बोला17 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन भारत के बाहर का भारत31 अक्तूबर, 2003 | मनोरंजन न्यूयॉर्क में भांगड़ा की धूम20 अक्तूबर, 2003 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||