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गुरुवार, 16 मार्च, 2006 को 20:04 GMT तक के समाचार
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महान गणितज्ञ रामानुजन पर फ़िल्म

श्रीनिवासन रामानुजन
श्रीनिवासन रामानुजन ने केवल 33 वर्ष की आयु में दुनिया छोड़ दी थी
ब्रिटेन और भारत के दो फ़िल्मकार मिलकर प्रख्यात भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवासन रामानुजन के जीवन पर एक फ़िल्म बनाने जा रहे हैं.

स्टीफ़न फ्राई और देव बेनेगल मिलकर रामानुजन के जीवन को पर्दे पर उतारेंगे जिनके सिद्धांतों ने डिजिटल क्रांति का सूत्रपात किया.

केवल 33 वर्ष की जवानी में दुनिया से विदा हो जानेवाले रामानुजन को पैसे की किल्लत की वजह से कॉलेज छोड़ना पड़ा था.

कॉलेज की पढ़ाई ना कर सकनेवाले रामानुजन की प्रतिभा को पहचाना इंग्लैंड की केम्ब्रिज युनिवर्सिटी ने जिसने 19वीं सदी की शुरुआत में उन्हें एक महान गणितज्ञ के रूप में मान्यता दी.

फ़िल्म रामानुजन और केम्ब्रिज के तब के डॉन (यूनिवर्सिटी के उच्च अधिकारी) गॉडफ़्रे हेराल्ड हार्डी के संबंधों और उनकी मित्रता पर आधारित होगी. कहा जाता है कि रामानुजन की प्रतिभा को हार्डी ने ही पहचाना था.

फ़िल्म

जी एच हार्डी
बताया जाता है कि गॉडफ़्रे हेराल्ड हार्डी ने ही रामानुजन की प्रतिभा को पहचाना था

फ़िल्म की शूटिंग तमिलनाड़ु और केम्ब्रिज में की जाएगी.

देव बेनेगल ने बताया कि फिल्म में क्रिकेट प्रेमी हार्डी की भूमिका निभाने के लिए एक बड़े अमरीकी या ब्रिटिश अभिनेता को लिया जाएगा.

और रामानुजन की भूमिका निभाने के लिए स्टीफ़न फ्राई किसी अच्छे अभिनेता को लेना चाहते हैं.

देव बेनेगल ने कहा,"निश्चित रूप से इस भूमिका के लिए शाहरुख़ या आमिर जैसे अभिनेताओं को नहीं लिया जाएगा, पर हमें विश्वास हैं कि हमें इस भूमिका के लिए सही कलाकार मिल ही जाएगा ".

करोड़ों की लागत से बन रही इस फ़िल्म की शूटिंग तमिलनाड़ु में रामानुजन के जन्म स्थान इरोड (कुंभकोनम) में होगी जहाँ श्रीनिवासन का अधिकांश जीवन बीता था.

इसके अलावार केम्ब्रिज में भी शूटिंग होगी जहाँ उन्होंने पाँच साल बिताए थे.

रामानुजन

देव बेनेगल
फ़िल्मकार देव बेनेगल इसके पहले इंग्लिश ऑगस्ट और स्प्लिट वाइड ओपन जैसी फ़िल्म बना चुके हैं

श्रीनिवास अयंगर रामानुजन 1919 में भारत लौटे और साल भर के भीतर ही उनकी मृत्यु हो गई.

युद्धग्रस्त ब्रिटेन में उनके शाकाहारी आहार और ब्रिटेन की कड़ाके की सर्दी ने उनकी सेहत को काफी नुक़सान पहुँचाया था.

रामानुजन का जन्म 1887 में एक गरीब परिवार में हुआ. छोटी उम्र में उन्हें कॉलेज छोड़ना पड़ा.

उन्होंने ज़्यादातर जीवन दूसरों की दया के सहारे बिताया. उनके गणित के प्रेम की वजह से उनकी बाकी विषयों में खास रुचि नहीं थी जिसकी वजह से वो इन विषयों में पीछे रह गए.

गणित

रामानुजन ने मद्रास के एक बंदरगाह पर कलर्क का काम करते हुए गणित से जुड़े अपने इस ज्ञान को प्रसिद्धि दिलाने के लिए कई प्रयास किए.

 आज जब आपकी एटीएम मशीन पैसे उगालने से पहले आपके एकाउंट और पैसे का हिसाब-किताब देखती है ये सब रामानुजन की पार्टिशन थ्योरी का ही नतीजा है
देव बेनेगल

इसी धुन में वे लगातार अपने गणित सिद्धांतों से भरे पत्र इंग्लैंड की केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी को भेजते रहे.

उनकी तीसरी चिठ्ठी जी एच हार्डी के हाथ पड़ी जिन्होंने ग़रीब और पिछड़े रामानुजन को आत्मविश्वास से भरे घमंडी और तानाशाह अंग्रेज़ों के बदले प्राथमिकता दी.

पहले-पहल हार्डी को लगा कि रामानुजन की 10 पन्नों वाली गणित के 10 सूत्रों से भरी चिठ्ठी कोई मज़ाक है.

लेकिन जब उन्होंने अपने विभाग के लोगों को इसे दिखाकर सलाह-मशविरा किया तो सबका यही निष्कर्ष निकला कि इसके नतीजों में कुछ तो सच्चाई होगी, क्योंकि इस तरह की कल्पना करना किसी के लिए संभव नहीं.

इसके बाद हार्डी ने रामानुजन को केम्ब्रिज बुलाया जहाँ उनके कार्य को पहचाना गया और दोनों ने मिलकर खूब काम किया.

बेनेगल कहते हैं,"हैरानी की बात ये हैं कि दुनिया के दो कोनों के अलग अलग पृष्ठभूमि से आए दो लोग आराम से संख्या और गणित की दुनिया में संवाद कायम कर सके."

याद

स्टीफ़न फ़्राई
स्टीफ़न फ़्राई ख़ुद भी केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर चुके हैं

बेनेगल फ़िल्म की कहानी की खोज करने इरोड और कुंभकोनम पहुँचे जहाँ उन्हें पता चला कि उनके ज़्यादातर रिश्तेदारों का या तो देहांत हो चुका हैं या फिर कोई अता-पता नहीं.

रामानुजन की पत्नी का देहांत 80 के दशक में हुआ और अपने पति की मौत के बाद उन्होंने एक बेटा गोद लिया.

बेनेगल का कहना है,"मेरा मानना है कि रामानुजन के सूत्र डिजिटल टेक्नॉलोजी के डीएनए की तरह हैं..आज जब आपकी एटीएम मशीन पैसे उगालने से पहले आपके एकाउंट और पैसे का हिसाब-किताब देखती है ये सब रामानुजन की पार्टिशन थ्योरी का ही नतीजा है."

बेनेगल को कावेरी नदी के किनारे टहलते इस फिल्म को बनाने का विचार आया जिसके किनारे बसे शहर में रामानुजन का जन्म हुआ और बचपन बीता.

कुछ महीने पहले उनकी अचानक मुलाकात हुई स्टीफ़न फ़्राई से जो ख़ुद भी केम्ब्रिज से पढ़े हैं.

देव कहते हैं,"मुझे रामानुजन-हार्डी के केम्ब्रिज-चर्चित किस्से के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं लेकिन फ्राई को है. और उनकी खुद इस विषय में खासी रुचि है."

फ्राई और बेनेगल जल्दी ही केम्ब्रिज के एक और पूर्ववर्ती छात्र, भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रामानुजन के जन्मस्थान के पास के निवासी भारतीय राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिलनेवाले हैं.

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