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'ऑस्कर पर नज़रिया बदलना चाहिए' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्कर पुरस्कारों की दौड़ में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही फ़िल्म 'पहेली' के निर्देशक अमोल पालेकर का कहना है कि ऑस्कर पुरस्कारों के बारे में नज़रिया बदलना चाहिए. ज़ाहिर है, प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कारों के लिए अपनी फिल्म को भेजे जाने पर अमोल पालेकर काफी खुश हैं,"ये मेरे लिए और फिल्म की पूरी टीम के लिए गर्व की बात है." अमोल का कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि बोर्ड ने उनके प्रयास को सराहा औऱ इसे पूरी तरह से मौलिक और एक सच्ची भारतीय फिल्म क़रार दिया. लेकिन साथ ही अमोल ये भी जोड़ते हैं कि "मेरी दूसरी फिल्मों जैसे 'अनाहत' और 'दायरा' का भी कई दूसरे अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में काफी अच्छा प्रदर्शन रहा और वो बहुत सराही गईं इसलिए जरूरी है कि हम ऑस्कर के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलें और साथ में दूसरे पुरस्कारो की भी अहमियत समझें. फिर चाहे वो अपने राष्ट्रीय पुरस्कार ही क्यों न हों." अमोल मानते हैं कि पहेली में थिएटर विधा की गहरी छाप है और एक तरह से ऑस्कर के लिए पहेली का चयन कर बोर्ड ने थिएटर से प्रभावित सिनेमा को नई पहचान दी है. 'पहेली' राजस्थान के प्रसिद्ध साहित्यकार विजयदान देथा की कहानी पर आधारित है. बॉक्स ऑफ़िस शाहरूख खान, रानी मुखर्जी, अमिताभ बच्चन, सुनील शेट्टी और जूही चावला जैसे सितारों से सजी ये फिल्म कला समीक्षकों के बीच तो चर्चित रही लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पाई.
लेकिन अमोल पालेकर इससे निराश कतई नहीं हैं, "बॉक्स ऑफिस पर हिट होना ही किसी फिल्म की सफलता की कसौटी नहीं हो सकता, फिर शाहरूख खान और रानी मुखर्जी ने अपने पात्रों को न केवल जिया है बल्कि उनके साथ पूरा न्याय किया है." अमोल पालेकर के मुताबिक पहेली की सिनेमैटोग्राफी फिल्म का एक सशक्त पहलू है जबकि इसकी शूटिंग सिर्फ़ 47 दिनो में पूरी कर ली गई थी. उनका कहना है कि फिल्म के सभी स्पेशल इफ़ेक्ट्स के पीछे भारतीय तकनीशियनों का ही काम है जो हर तरह से अंतरराष्ट्रीय तकनीक की बराबरी करते हैं. इन दिनों देहरादून में विरासत महोत्सव के तहत अमोल पालेकर की फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग चल रही है. अमोल इसी समारोह में शिरकत करने अपनी पत्नी के साथ देहरादून आए हैं. पहेली की पटकथा उनकी पत्नी संध्या ने ही लिखी है. अमोल हिंदी और मराठी में लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिये चर्चित रहे हैं. इस समारोह में पहेली के अलावा उनकी पाँच और फिल्में 'अनाहत', 'आकृत', 'अनकही', 'कैरी' और 'थोड़ा सा रोमानी हो जाएं' दिखाई जा रही हैं. फिल्म निर्देशन में आने से पहले अमोल पालेकर ने हृषिकेश मुखर्जी के साथ रहस्य-रोमांच और हास्य की कई यादगार फिल्मों में लगभग एक दशक तक अपना जादू बिखेरा है जिसमें 'गोलमाल' जैसी सदाबहार फिल्म भी शामिल है. ये पूछे जाने पर कि क्या उन्हें दोबारा रूपहले पर्दे पर दिखने की चाह नहीं होती वो मुस्करा कर जवाब देते हैं कि "अभिनय से आज भी मेरा उतना ही लगाव है और रोल मिला तो जरूर करूँगा." |
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