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ग़ज़ल बेहद ख़ूबसूरत चीज़ है:पीनाज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई से नैरोबी के लिए हवाई जहाज़ में चढ़ते ही एक ख़ूबसूरत चेहरे से सामना हुआ, चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लगा, घुंघराले बाल, चौड़ी मुस्कान. नाम जब दिमाग़ में कौंधा और धुंधली तस्वीर कुछ साफ़ हुई तो बातचीत करने का मोह छोड़ नहीं पाया. पीनाज़ मसानी से मैने बातचीत का सिलसिला कुछ यूँ शुरु किया. रीमिक्स के दौर में ग़ज़ल को कहाँ पातीं हैं आप? आजकल क्या नया कर रही हैं? फ़िल्मों के लिए भी कुछ कर रहीं हैं क्या? मेरा एक नया एलबम ‘पीनाज़ - ए लाइफ़ स्टोरी’ है. स्टेज शो तो लगातार चलते ही रहते हैं, अभी दारेस्लाम जा रही हूँ. फिल्मों के लिए तो अभी कुछ नहीं कर रही, राजेश रौशन, रहमान, आर.डी. बर्मन, नौशाद जैसे लोगों के साथ काम किया है. आज भारतीय संगीत पटल पर युवाओं को बहुत अवसर मिल रहे हैं, प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, क्या आप असुरक्षित महसूस करती हैं? आज जिस तरह से युवा कलाकारों को मौक़े मिल रहे है वैसा हमारे समय में नहीं था. हम सीढ़ी दर सीढ़ी आगे बढ़े हैं जबकि आज रातों-रात शोहरत और पैसा मिलने लगता है. यह अच्छी बात है.
जहाँ तक असुरक्षा की भावना की बात है मुझे असुरक्षा किसी कलाकार को लेकर नहीं होती बल्कि अपने काम को लेकर होती है मुझे हमेशा यह लगता है कि मेरी ग़ज़ल कहीं भी उन्नीस न पड़े. हाल ही में जिस तरह से फ़िल्मी दुनिया में ‘कास्टिंग काउच’ पर काफ़ी हंगामा हुआ है, क्या संगीत की दुनिया में ऐसा कुछ होता है? प्रतिभा और मेहनत के बग़ैर कहीं भी आगे बढ़ना मुश्किल होता है. अब यह व्यक्ति विशेष को तय करना होता है कि वो मज़िल पाने के लिए कौन सा रास्ता अपनाता है. आपने ग़ज़ल गायकी में इतना लंबा सफ़र तय किया है, कैसा लगता है इस मुकाम पर पहुँच कर? बहुत अच्छा लगता है. संगीत ही मेरी ख़ुशी है. गुरुओं का आशीर्वाद और दोस्तों का साथ हमेशा से ही मेरे साथ रहा है लेकिन अब भी लगता है कि कितनी ही मज़िलें और तय करनीं हैं. आपने अपनी और संगीत की दुनिया में जोड़ी नहीं बनाई, कोई ख़ास वजह? (मुस्कुरा कर) जोड़ी के बारे में कभी सोचा ही नहीं. मेरे माता-पिता हैं, बहन है. संगीत ही मेरा सबकुछ है. फिर मैं इस बात पर यक़ीन करती हूँ कि जो कुछ जब होना होता है वो तब ही होता है. |
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