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मंगलवार, 28 सितंबर, 2004 को 12:26 GMT तक के समाचार
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लता का पाँच दशक का सुरीला सफ़र
लता मंगेशकर
लता ने 20 से अधिक भाषाओं में तीस हज़ार से ज़्यादा गाने गाए हैं
स्वर साम्राज्ञी, बुलबुले हिंद और कोकिला जैसे सारे विशेषण जो लता मंगेशकर के लिए गढ़े गए वे हमेशा ही नाकाफ़ी लगते रहे हैं.

महाराष्ट्र में एक थिएटर कंपनी चलाने वाले अपने ज़माने के मशहूर कलाकार दीनानाथ मंगेशकर की बड़ी बेटी लता का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ.

मधुबाला से लेकर माधुरी दीक्षित और काजोल तक हिंदी सिनेमा के स्क्रीन पर शायद ही ऐसी कोई बड़ी तारिका रही हो जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ उधार न दी हो.

बीस से अधिक भारतीय भाषाओं में लता ने 30 हज़ार से अधिक गाने गए, 1991 में ही गिनीस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने माना था कि वे दुनिया भर में सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई गायिका हैं.

भजन, ग़ज़ल, क़व्वाली शास्त्रीय संगीत हो या फिर आम फ़िल्मी गाने लता ने सबको एक जैसी महारत के साथ गाया.

लता मंगेशकर की गायिका के दीवानों की संख्या लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में है और आधी सदी के अपने करियर में उनका कोई सानी कभी नहीं रहा.

कठिन शुरूआत

जब भारत छोड़ो आंदोलन अपने शीर्ष पर था तब 1942 में सिर्फ़ 13 वर्ष की लता को छोड़कर उनके पिता दुनिया से विदा हो गए, उनके कंधों पर पूरे परिवार का ख़र्च चलाने की ज़िम्मेदारी आ गई.

लता मंगेशकर
लता ने 13 वर्ष की उम्र में एक मराठी फ़िल्म के लिए गाना गाया था

उस्ताद अमान अली ख़ान और अमानत ख़ान से संगीत की शिक्षा लेने वाली लता को रोज़ी-रोटी चलाने के लिए संघर्ष शुरू करना पड़ा, उन्होंने 1942 में ही एक मराठी फ़िल्म 'किती हासिल' में गाना गाकर अपने करियर की शुरूआत की लेकिन बाद में यह गाना फ़िल्म से हटा दिया गया.

इसके पाँच साल बाद भारत आज़ाद हुआ और लता मंगेशकर ने हिंदी फ़िल्मों में गायन की शुरूआत की, 'आपकी सेवा में' पहली फ़िल्म थी जिसे उन्होंने अपने गायन से सजाया लेकिन उनके गाने ने कोई ख़ास चर्चा नहीं हुई.

लता का सितारा पहली बार 1949 में चमका और ऐसा चमका कि उसकी कोई मिसाल नहीं मिलती, इसी वर्ष चार फ़िल्में रिलीज़ हुईं--'बरसात', 'दुलारी', 'महल' और 'अंदाज़'.

'महल' में उनका गाया गाना 'आएगा आने वाला आएगा' के फौरन बाद हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री ने मान लिया कि यह नई आवाज़ बहुत दूर तक जाएगी, यह वह ज़माना था जब हिंदी फ़िल्मी संगीत पर शमशाद बेग़म, नूरजहाँ और ज़ोहराबाई अंबालेवाली जैसी वज़नदार आवाज़ वाली गायिकाओं का राज चलता था.

लता मंगेशकर को शुरू के वर्षों में काफ़ी संघर्ष करना पड़ा कई फ़िल्म प्रोड्यूसरों और संगीत निर्देशकों ने यह कहकर उन्हें गाने का मौक़ा देने से इनकार कर दिया कि उनकी आवाज़ बहुत महीन है.

लंबी पारी

ओपी नैयर को छोड़कर लता मंगेशकर ने हर बड़े संगीतकार के साथ काम किया, मदनमोहन की ग़ज़लें और सी रामचंद्र के भजन लोगों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ चुके हैं.

लता मंगेशकर
लता ने हिंदी फ़िल्म संगीत पर पाँच दशक तक एकछत्र राज किया (फोटो-एचएमवी)

पचास के दशक में नूरजहाँ के पाकिस्तान चले जाने के बाद लता मंगेशकर ने हिंदी फिल्म पार्श्वगायन में एकछत्र साम्राज्य स्थापित कर लिया, कोई ऐसी गायिका कभी नहीं आई जिसने उनके के लिए कोई ठोस चुनौती पेश की हो.

बेमिसाल और सर्वदा शीर्ष पर रहने के बावजूद लता ने बेहतरीन गायन के लिए रियाज़ के नियम का हमेशा पालन किया, उनके साथ काम करने वाले हर संगीतकार ने यही कहा कि वे गाने में चार चाँद लगाने के लिए हमेशा कड़ी मेहनत करती रहीं.

लता को सबसे बड़ा अवार्ड तो यही मिला है कि अपने करोड़ों प्रशंसकों के बीच उनका दर्जा एक पूजनीय हस्ती का है, वैसे फ़िल्म जगत का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहब फ़ाल्के अवार्ड और देश का सबसे बड़ा सम्मान 'भारत रत्न' लता मंगेशकर को मिल चुका है.

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