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वो ऐसा अमर है कि कभी मर नहीं सकता: नौशाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कौन कहता है कि सहगल मर गया, सहगल मरा नहीं है. संगीत प्रेमियों के दिल पर अब भी सहगल की अमिट छाप है और उनके दिलों में सहगल आज भी ज़िंदा है. सहगल को फ़रामोश कोई कर नहीं सकता उसके जैसा गायक न आया है और न आएगा. सहगल की जगह हमेशा ख़ाली रहेगी. सहगल का अपना एक अंदाज़ था जो वो अपने साथ ले गए. बहुत से लोगों ने उनकी नकल उतारने की कोशिश की लेकिन वो बात पैदा नहीं हो सकी. मुकेश और किशोर कुमार ने भी शुरुआती दिनों में नकल कर रहे थे लेकिन सहगल की बात अलग ही थी. ऐसा कोई फ़नकार-ए-मुकम्मल नहीं आया हर शायर की तमन्ना उस वक़्त के हर शायर की तमन्ना थी कि मेरी लिखी हुई ग़ज़ल यदि सहगल गा दे तो मुझे शोहरत मिलेगी. मैंने इस पर लिखा था, कोई शै मुसव्विर की दमसाज़ मिलती लेकिन ग़ज़लों के मामले में सहगल की पसंद बहुत अच्छी थी. उन्होंने ग़ालिब, आतिश और मीर जैसे हर बड़े उस्ताद की ग़ज़लें गाईं. वो आमतौर पर आजकल के लोगों के कलाम नहीं गाते थे. इसमें भी उनका बड़ा योगदान है. बहुत से लोगों को 'नुक्ताचीं है ग़मे दिल...' बहुत से लोगों को समझ में नहीं आता लेकिन उन्होंने इसका रिकॉर्ड रखा है और वो इसे लगातार सुनते रहते हैं, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि इसे सहगल ने गाया है. सहगल हर दिल अज़ीज़ था और वह दिल में मौजूद और ज़िंदा है. वैसे भी कलाकार मरता नहीं, संगीत प्रेमियों के दिल में रहता है. (नौशाद इस समय अकेले संगीतकार हैं जिनके संगीत निर्देशन में कभी कुंदनलाल सहगल ने गाना गाया था. बीबीसी संवाददाता अनुराधा प्रीतम ने उनसे बात की.) |
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