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'दर्शक अच्छी फ़िल्में देखना चाहते हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय अभिनेत्री नंदिता दास को 11 मई से शुरू होने वाले कान फ़िल्म समारोह में ज्यूरी में शामिल किया गया है. नौ सदस्यीय ज्यूरी में शामिल होना फ़िल्म जगत के किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत सम्मानजनक माना जाता है क्योंकि यह ज़्यूरी समारोह में आने वाली फ़िल्मों में से विजेता का चयन करती है. कान रवाना होने से पहले उन्होंने निवेदिता पाठक से बातचीत की. बड़े अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में भारतीय फ़िल्मों का प्रतिनिधित्व न होने पर आपकी क्या राय है? नंदिता दास- यह बहुत दुख की बात है कि जो देश हिंदी और प्रदेशिक भाषाओं में हर साल एक हज़ार से ज़्यादा फ़िल्में बनाता हो उस देश की कोई भी फ़िल्म ऐसे समारोह में शामिल न हो. ये एक आत्मचिंतन का विषय है, जब इतनी सारी फ़िल्में बनती तो हमें फ़िल्म की विषय वस्तु के बारे में सोचना पड़ेगा. केवल संख्या से फ़िल्में अच्छी नहीं हो जाती हैं. दूसरी तरफ छोटे-छोटे देश हैं जहाँ फ़िल्मों के विषय वस्तु पर विशेष पर ध्यान दिया जाता है. दूसरा कारण ये होता है कि इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टेवल में हिस्सा लेने की प्रक्रिया लोगों को नहीं मालूम होती और कई बार अच्छी छोटे बजट की फ़िल्में तो बनती है. लेकिन व्यावसायिक फ़िल्मों का इतना दबाव होता है कि अच्छी फिल्मों को उतना प्रोत्साहन नहीं मिल पाता. तो फ़िर आपकी दृष्टि में अच्छी फ़िल्म क्या होती है? नंदिता दास- ये एक बहुत ही व्यक्तिनिष्ठ विषय है. मोटे तौर पर अच्छी फ़िल्म वही होती हैं जो मौलिक हो. जहाँ तकनीक के हर पहलू पर ध्यान दिया गया हो. मैं समारोह शुरू होने से पहले जा रही हूँ क्योंकि वहाँ कुछ मापदंड बताए जाएंगे जिसके आधार पर फ़िल्मों को जज करना होगा तभी ये पता चलेगा कि कौन सी फ़िल्म अच्छी है. मुझे इस बात की बहुत खुशी हो रही है कि लोग और व्यवसायिक फ़िल्मों के दबाव में न आकर अच्छे-अच्छे विषयों पर छोटी फ़िल्में भी बना रहे हैं जो कलात्मक और व्यावसायिक फ़िल्मों के बीच की श्रेणी में आती है. ऐसा नहीं है कि दर्शक ऐसी फ़िल्में नहीं देखना चाहते. बल्कि कारण ये है कि दर्शकों को नए विषयों पर फ़िल्में देखने को मिलती नहीं है. अगर बीच में ऐसी फ़िल्में बनती भी हैं तो उनके न चलने का एक कारण ये भी है कि उसकी ठीक ढंग से मार्केटिंग नहीं की जाती. भविष्य की आपकी क्या योजना है? नंदिता दास- मैं आने वाले दिनों में खुद भी निर्देशन के क्षेत्र में आना चाहती है. मैं कुछ ऐसी फ़िल्में बनाना चाहती हूँ कि जो व्यावसायिक रूप से सफल हो लेकिन दूसरी ओर सर्जनात्मकता को भी संतुष्ट करे. |
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