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सोमवार, 18 अप्रैल, 2005 को 09:04 GMT तक के समाचार
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न जमा निकालने की सुविधा न ब्याज की

राम बैंक की पासबुक
पासबुक में दर्ज किया जाता है कि खातेदार ने कितने रामनाम जमा किए
उदारीकरण के इस दौर में अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए बैंकों ने भले कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी हो लेकिन छत्तीसगढ़ में कुछ बैंक ऐसे भी हैं, जहां किसी भी खातेदार को अपना जमा धन निकालने की सुविधा नहीं है.

चौंक गए न! असल में यह बैंक दुनिया में अपनी तरह का अनूठा बैंक है.

यहां रुपए-पैसे नहीं 'राम नाम' जमा किए जाते हैं. हिंदूओं के अराध्य भगवान राम का नाम एक ख़ास किस्म की पुस्तिका में लिख कर जमा करने वाले इस बैंक का नाम ही है-श्री राम नाम बैंक.

शाखाएँ

इस बैंक की शाखाएं हैं, खातेदार हैं और बैंक मैनेजर भी.

 चौरासी लाख या इससे अधिक राम नाम लिखने से मनुष्य को मोक्ष मिल जाता है. राम नाम लिखने भर से मनुष्य की इंद्रियां वश में हो जाती हैं और एक पुस्तिका लिखने भर से ही मन को अद्वितीय शांति मिलती है
वीएल जोशी, संस्थापक

कोलकाता के मोमिनपुर इलाके में वीएल जोशी द्वारा स्थापित इस बैंक की देश भर में कई शाखाएं हैं.

कोलकाता के अलावा अयोध्या और वृंदावन जैसे शहरों में भी इस तरह के बैंक स्थापित किए गए हैं, जिनकी देश भर में सैकड़ों शाखाएं हैं.

वीएल जोशी का दावा है, "चौरासी लाख या इससे अधिक राम नाम लिखने से मनुष्य को मोक्ष मिल जाता है. राम नाम लिखने भर से मनुष्य की इंद्रियां वश में हो जाती हैं और एक पुस्तिका लिखने भर से ही मन को अद्वितीय शांति मिलती है."

जहिर है, धर्म के नाम पर श्री जोशी और उनके जैसे लोगों द्वारा किए जाने वाला दावा लोगों के सर चढ़ कर बोल रहा है.

अकेले बिलासपुर के गोंड़पारा इलाके में चलने वाले 'श्री राम नाम बैंक' में हर माह हज़ार से ज़्यादा पुस्तिकाएं एकत्र हो जाती हैं. बिलासपुर के ही सीताराम मंदिर में स्थापित इसी तरह के एक बैंक में लगभग 21 करोड़ राम नाम कुछ समय में एकत्र किए गए हैं.

पुस्तिकाओं में राम नाम लिखने वाले लोगों में बड़ी संख्या ऐसे बुजुर्गों की है, जो अब अपने उम्र के आख़री पड़ाव पर किसी भी तरह अपना 'परलोक' सुधार लेना चाह रहे हैं.

 मैं खुद राम नाम लिखता हूं और इससे मेरे मन को शांति मिलती है, मेरे संस्कार सुधरते हैं. यह एक ऐसा बैंक है, जहां खाता खुलवाने वाला हमेशा लाभ में रहेगा
मुरारी लाल शर्मा, 'ब्रांच मैनेजर'

घरेलू स्त्रियों की संख्या भी कम नहीं है. हाल के दिनों में युवा पीढ़ी में भी राम नाम लिख कर बैंक में जमा करने वालों की संख्या बढ़ी है.

श्री राम नाम बैंक के 'ब्रांच मैनेजर' पंडित मुरारी लाल शर्मा के युवा पुत्र विपुल कहते हैं- “ मैं खुद राम नाम लिखता हूं और इससे मेरे मन को शांति मिलती है, मेरे संस्कार सुधरते हैं. यह एक ऐसा बैंक है, जहां खाता खुलवाने वाला हमेशा लाभ में रहेगा.”

लेकिन बैंकों में जमा धन न केवल वापस मिलता है, बल्कि उस पर आकर्षक ब्याज भी बैंक देते हैं. इस राम नाम बैंक में केवल राम नाम के 'भक्ति धन' के जमा करने की परंपरा है. इसका जवाब एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत नागेंद्र शर्मा मुस्कुराते हुए देते हैं- “इस धन की वापसी ब्याज समेत होती है, ऊपर वाले के घर में.”

पासबुक भी

राम नाम लिख कर अपना इहलोक और परलोक सुधारने की इच्छा रखने वाले लोग बैंक से मिलने वाली मुफ्त पुस्तिका ले जाते हैं और लाल स्याही से पूरी पुस्तिका में राम-राम लिख कर बैंक में जमा कराते हैं.

राम नाम
लाल रंग की स्याही से राम नाम लिखना होता है

इन राम भक्तों के पास बुक में इस बात का उल्लेख किया जाता है कि खातेदार ने किस तारीख़ को कितना राम नाम, बैंक में जमा किया है.

साल में एक बार श्री राम नाम बैंक की सभी शाखाओं से राम नाम की पुस्तिका बैंक के मुख्यालय में एकत्र की जाती है और शोभायात्रा निकाल कर उन्हें नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता है.

लेकिन कुछ बैंक की शाखाएं ऐसी हैं, जहां संख्या के आधार पर राम नाम की पुस्तिका मुख्यालय में जमा करायी जाती हैं.

बिलासपुर के सीताराम मंदिर के पुजारी ने अपने बैंक में 21 करोड़ राम नाम एकत्र कर लिए हैं. जब इनकी संख्या 25 करोड़ हो जाएगी, तब इन्हें अयोध्या भेज दिया जाएगा.

“राम नाम के हीरे मोती, बैंक बिखराए गली-गली, ले लो रे कोई राम के प्यारे, बैंक पुकारे गली-गली” जैसा कोई 'भजन' अगर आपके कानों से टकराए तो समझ लीजिए अगला श्री राम नाम बैंक आपके ही इलाके में खुलने वाला है.

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