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'रेखा को छोड़ो, शाहरुख़ है या नहीं'

रेखा
भारत और पाकिस्तान के बीच एक दिवसीय मैचों की रिपोर्ट करने के लिए लंदन से दिल्ली रवाना हो ही रहा था कि हसीन इत्तेफाक़ से बॉलीवुड के कुछ जगमगाते हुए सितारों से टकरा गया.

बोर्डिग पास लेते वक़्त किसी को कहते हुए सुना कि जूही चावला मुंबई वाली उड़ान पर सफ़र कर रही हैं.

सोचा कि जूही को पकड़ लिया जाए (इंटरव्यू के लिए) लेकिन जिसने लंदन का हीथरो एयरपोर्ट देखा है वही समझ सकता है कि ये हवाई अड्डा कम और शहर ज़्यादा है और इसकी भूलभुलइया में किसी को खोजना लगभग असंभव है.

बहरहाल मैंने कोशिश को अपना कर्त्तव्य समझा और जूही की खोज में लग गया.

रेखा को देखा

सोचा कि पहले परफ्यूम की ड्यूटी फ्री दुकान से अपनी खोज शुरू करूँ क्योंकि औरतों का ख़ुश्बू बिखेरने से ख़ास लगाव होता है.

जूही को खोजते-खोजते क़ीमती चश्मे की एक दुकान में गया तो देखा कि रेखा शीशे के सामने खड़ी चश्मे ‘ट्राई’ कर रही थीं.

काला डिज़ाइनर कुर्त्ता और चूड़ीदार पाजामा और एक काला बड़ा चश्मा. फ़िल्मी सितारे न जाने क्यों कुछ भी पहन ले और कितने भी बूढ़े हो जाएँ, अच्छे ही लगते हैं.

 मुझे फ़ौरन समझ में आ गया कि रेखा अब तक शादी क्यों नहीं कर पाई. दरअसल कोई भी उनके पैमाने पर खरा नहीं उतरा

मैंने रेखा की ख़रीदारी ख़त्म होने का इंतज़ार किया. रेखा ने 300 पाउंड (लगभग 25 हज़ार रूपए) के दो चश्मे ख़रीदे और एक मोटे-मोटे मोतियों का हार ख़रीदा जिसकी क़ीमत मैं मालूम नहीं कर सका.

ख़ैर मैंने सोचा कि जूही नहीं तो रेखा ही सही, और आगे बढ़कर एक छोटे से इंटरव्यू की प्रार्थना कर डाली.

रेखा ने अपने काले चश्मे के पीछे से मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और इस तरह नज़र अंदाज़ कर दिया जैसे मैं वहाँ मौजूद ही नहीं था.

मुझे फ़ौरन समझ में आ गया कि रेखा अब तक शादी क्यों नहीं कर पाई. दरअसल कोई भी उनके पैमाने पर खरा नहीं उतरा और एक बार जो उतरा भी था (अमिताभ बच्चन) तो उसकी पहले से ही शादी हो चुकी थी.

दिल की बात

शादी से याद आया कि अमिताभ बच्चन और मुझमें काफी चीज़े मिलती जुलती हैं. हम दोनों का संबंध उत्तर प्रदेश राज्य से है, दोनों लंबे हैं और मेरी बीवी का क़द भी जया भादुड़ी की तरह ज़्यादा नहीं.

अमिताभ और रेखा फ़िल्म सिलसिला में

अमिताभ की तरह मेरे भी दो बच्चे हैं और रेडियो पर नौकरी के लिए जिस तरह अमिताभ को नामुनासिब समझा गया था उसी तरह मुझ से भी कई बार माफी माँगी गई.

बस फ़र्क़ सिर्फ़ इतना रहा कि अमिताभ ने हिम्मत हार दी, फ़िल्मों की तरफ़ चले गए और सुपर स्टार बन गए लेकिन मैं रेडियो में ही बना रहा.

मैंने सोचा कि पाँच मिनट के इंटरव्यू के लिए इतनी इंसानियत तो होनी चाहिए थी.

दिल को ज़रा ठेस पहुँची, सोचा कि दिल कि बात ज़ुबान पर ले आऊँ और रेखा को बता दूँ कि माना कि तुम हो बेहद हसीन, लेकिन ऐसे बुरे तो हम भी नहीं. (मेरी तस्वीर शायद आपने ऊपर देख ही ली होगी)

लेकिन इंसान अपनी ज़िंदगी में किस-किस से क्या-क्या कहना चाहता है पर कह कब पाता है?

इससे पहले शबाना आज़मी और शर्मिला टैगोर के हाथों भी रुसवा हो चुका हूँ. लेकिन वह एक अलग कहानी है. उस वक़्त भी मैं ख़ून का घूँट पीकर रह गया था.

जूही का इंटरव्यू

कुछ बेआबरू और कुछ मायूस हो कर दुकान से बाहर निकला तो एक हसीन इत्तेफाक ही कहिए, जूही से टकरा गया.

जूही को मैं बचपन से जानता हूँ, या शायद जवानी से, यह अलग बात है कि जूही मुझे बिल्कुल नहीं जानतीं.

जूही चावला

मैंने जूही से इंटरव्यू के लिए पूछा, जूही ने थोड़ी आनाकानी की, मैंने उन्हें समझाया कि इंसान को ज़िंदगी में हर चीज़ का मज़ा लेना चाहिए और इससे पहले कब उन्होंने हीथरो एअरपोर्ट के टर्मिनल 3 की एक गैलरी में खड़े होकर किसी को इंटरव्यू दिया है.

बात उनकी समझ में आ गई और वह मान गईं.

यहाँ तक तो काम आसान था, मेरे सामने मुश्किल यह थी कि मैंने बरसों से कोई हिंदी फ़िल्म नहीं देखी है (एक-आध को छोड़कर, वह भी बीवी बच्चों के दबाव में).

जूही इंटरव्यू के लिए तैयार थी और मेरे पास उनसे पूछने के लिए कोई सवाल नहीं था.

बहरहाल, मैंने कुछ इधर-उधर की बातें पूछीं. कुछ घिसे-पिटे सवाल किए.

मैंने पूछा कि फ़िल्मों में अगर वे न आतीं तो क्या करतीं और आमिर ख़ान के साथ जोड़ी इतनी कामयाब क्यों रही. आजकल किन फ़िल्मों में व्यस्त हैं, कैसी फ़िल्में करती हैं.

कास्टिंग काउच पर टिप्पणी
 ये लड़की पर निर्भर करता है कि वह क्या चाहती है. बाकी दुनिया की तरह बालीवुड में भी हर तरह के लोग हैं. मैं खुश किस्मत रही कि मेरे साथ ऐसा कोई हादसा पेश नहीं आया
जूही चावला

और फिर मैंने वो सवाल पूछा जिसने बालीवुड को हिलाकर रख दिया है. मैंने पूछा क्या बालीवुड में ‘कास्टिंग काउच’ होती है. (यानी क्या रोल देने के लिए लड़कियों के जिस्म का इस्तेमाल किया जाता है.)

जूही बोलीं, "ये लड़की पर निर्भर करता है कि वह क्या चाहती है. बाक़ी दुनिया की तरह बालीवुड में भी हर तरह के लोग हैं. मैं ख़ुश क़िस्मत रही कि मेरे साथ ऐसा कोई हादसा पेश नहीं आया."

इंटरव्यू पूरी तरह से मतलब आप ख़ुद ही निकाल लीजिए.

मैं तो आप को वो डायलॉग सुनाना चाहता हूँ जो दो लड़कियों की ज़ुबान पर था. जब जूही से बातचीत हो रही थी तो पास में दो लड़कियाँ आकर खड़ी हो गई.

जूही के जाने के बाद उन्होंने पूछा कि और कौन-कौन से फ़िल्मी सितारे आए हुए हैं? मैंने जवाब दिया ‘रेखा’. तो उन्होंने कहा "रेखा को छोड़ो यह बताओ शाहरुख है क्या?"

कहते हैं कि बदलते वक़्त की हर एक के दिल पर हुकूमत है और उनके सुझाव पर मैं रेखा को भूल गया.

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