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द राइज़िंगः सबसे महँगी फ़िल्म | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की सबसे महँगी फ़िल्म 'द राइज़िंग' बनकर लगभग तैयार है, इसके निर्माण में तीन वर्ष लगे हैं. इस फ़िल्म का निर्माण भारतीय कंपनी कैलाइडोस्कोप और ब्रिटिश कैपिटल पिक्चर्स ने मिलकर किया है. ब्रितानी शासन के ख़िलाफ़ 1857 में हुए विद्रोह पर बनी इस फ़िल्म के बारे में अभिनेता आमिर ख़ान का मानना है कि यह फ़िल्म सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी. इस फ़िल्म के आख़िरी दृश्यों की शूटिंग ताजिकस्तान के एक गाँव में हो रही है. दक्षिण ताजिकस्तान के गाँव आएची में अचानक ही फ़िल्म की यूनिट पहुँची थी. पहाड़ और धूल भरे मैदानों के बीच ठीक वही माहौल था जो फ़िल्म के निर्देशक केतन मेहता उन्नीसवीं सदी के अफ़ग़ानिस्तान में दिखाना चाहते थे, जहाँ गदर से जुड़ी कुछ घटनाएँ घटी थीं. 'द राइज़िंग' मूल रुप से गदर की शुरुआत करने वाले मंगल पांडे के जीवन पर आधारित है. तीन फ़िल्मों की श्रृंखला की पहली फ़िल्म 'द राइज़िंग' के निर्माण में दो करोड़ डॉलर यानी कोई सौ करोड़ रुपए का ख़र्च आ रहा है. हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में बन रही यह फ़िल्म अंतरराष्ट्रीय और भारतीय दर्शकों दोनों को ध्यान में रखकर बन रही है. हिंदी फ़िल्मों के प्रेमी बीबीसी संवाददाता मोनिका विटलॉक का कहना है कि ताजिकस्तान के सुदूर गाँव में भी अभिनेता आमिर ख़ान को नज़दीक से देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा थी.
ताजिकस्तान में बॉलीवुड की फ़िल्में कितनी लोकप्रिय हैं इसका अंदाज़ा इसी बात से लग सकता है कि लोग आमिर ख़ान को अपने घर खाना खाने के लिए बुलाने को लेकर होड़ लगाए हुए थे और इसके लिए उन्हें पैसे भी देने को तैयार थे. फ़िल्म की शूटिंग के लिए 400 ताजिक लोगों और घुड़सवारों को एक्स्ट्रा के तौर पर काम दिया गया था. घुड़सवारों को इसके लिए तीस डॉलर प्रतिदिन का भुगतान हुआ, जो आमतौर पर इस ग़रीब किसानों के लिए एक महीने की आमदनी हुआ करती है. फ़िल्म इस साल के अंत तक दुनिया भर में रिलीज़ की जा रही है. पता नहीं वह ताजिकस्तान के इस गाँव वालों को कब देखने को मिलेगी. |
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