जिसने 'बाहुबली' को जुबां दी

इमेज स्रोत, Manoj Muntashir
- Author, इंदु पांडेय
- पदनाम, दिल्ली से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
साल 2015 में जिस गीत का जादू सबके सिर चढ़ कर बोला वो 'एक विलेन' फ़िल्म की ‘तेरी गलियां’ था. इसके बोल लिखे थे, मनोज मुंतशिर ने. सबसे बड़ा हिट होने के साथ ही इस गाने को साल 2015 के लगभग सारे अवार्ड मिले.
2015 की सुपर-सुपर हिट फ़िल्म बाहुबली के हिंदी संवाद भी मनोज मुंतशिर ने ही लिखे थे.
आज फ़िल्म के लिए गीत लिखना हो या टीवी रिएलिटी शो के लिए डायलॉग, मनोज की कलम किसी पहचान की मोहताज नहीं. लेकिन उनका सफ़र आसान नहीं था.

दसवीं क्लास में पहली बार मनोज मुंतशिर को अहसास हुआ था कि उनके पास शब्दों की ताक़त है.
उन्होंने जब माता-पिता से बताया कि वह लेखक बनना चाहते हैं तो उऩ्हें लगा कि उनकी परवरिश में कोई कमी रह गई है, जो उनका बच्चा राइटर बनना चाहता है.
पर मनोज इरादा कर चुके थे और जेब में महज सात सौ रुपये लेकर मुंबई आ गए. फिर शुरू हुआ चुनौतियों का सिलसिला.
ट्रेन से दादर उतरे तो कहीं जगह नहीं मिली. फुटपाथ ने आसरा दिया. यहां वे क़रीब एक साल तक रहे. इन्हें मनोज अपनी ज़िन्दगी के बेहतरीन दिन बताते हैं.
वो बताते हैं, "फुटपाथ पर हर दिन समोसा जलेबी खाकर सोता था." फुटपाथ पर डेढ़ साल रहे, बहुत प्यार मिला.

इमेज स्रोत, Manoj Muntashir
यहीं उनकी ज़िंदगी में वो पल आया जिसने सबकुछ बदल दिया.
किसी ने उनके हुनर को देखते हुए अमिताभ बच्चन से मिलने की सलाह दी. मनोज ने मजाक में कहा, “मिलवा दो, इससे कम से तो मैं किसी से मिलना भी नहीं चाहता.”
मजाक में कही बात सच हो गई और एक दिन मनोज अमिताभ बच्चन के सामने बैठे थे.
वो बताते हैं, “मुझे याद है तब मेरे बदन पर ढाई सौ रुपये के भी कपड़े नहीं थे, बहुत ग़रीबी की हालत थी.”

इमेज स्रोत, Ek Villain
यहां से जीवन का नया पन्ना शुरू हुआ. तब बच्चन 'कौन बनेगा करोड़पति-पार्ट टू' प्लान कर रहे थे.
अमिताभ बच्चन ने कहा था आपकी भाषा बहुत सुंदर है. वो दिन है और आज का दिन है, टीवी के लिए लिखने का जो सिलसिला चला वो आज तक जारी है.
जिन्हें आप सपने समझ कर इग्नोर कर देते हैं कि ये मुझसे तो नहीं होगा, उनको मनोज एक संदेश देना चाहते हैं.
उनका कहना था, “सपनों की अंधी उड़ान, जितनी भर सको भर लो” कोई है जो उसे सच कर दिखाता है.
केबीसी शुरू होने के तीन महीने के अंदर उनके पास घर था, गाड़ी थी, हाथ में फ़िल्में थीं- रंग रसिया, वेलकम बैक, एक विलेन, दो दूनी चार.

इमेज स्रोत, T series
फिर एक वक़्त आया जब टॉप टीवी चैनलों के लगभग हर रिएलिटी शो पर वही छाए हुए थे.
वो मानते हैं कि छोटे पर्दे ने उन्हें ज़िंदगी दी. मनोज के सपने बाक़ी हैं. उनकी हसरत है कि वे जीवन में रिएलिटी शो के बाद फ़िल्म लिखें.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)












