डेढ़ करोड़ खर्च कीजिए, बूढ़ा बनने के लिए!

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- Author, श्वेता पांडेय
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
तकरीबन चार दशकों से बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के मेकअप आर्टिस्ट रहे दीपक सावंत का मानना है कि बॉलीवुड में भी हॉलीवुड मेकअप आर्टिस्ट की ही ज़्यादा तवज़्ज़ो दी जाती है.
बीते कुछ दशकों में फ़िल्मों में तकनीक का इस्तेमाल बेहद बारीकी से होने लगा है. कुछ ऐसे कि कई फ़िल्मों में तो कलाकारों को हू-ब-हू किरदारों का रूप दे दिया गया.
उन फिल्मों में ‘पा’ का नाम सबसे पहले आता है. निर्देशक आर बाल्की की फ़िल्म ‘पा’ में ‘ऑरो’ बने अमिताभ बच्चन ने सभी को प्रभावित किया.
लेकिन उनका ‘ऑरो’ का मेकअप उनके नियमित मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत ने नहीं, बल्कि हॉलीवुड के प्रसिद्ध मेकअप आर्टिस्ट क्रिस्टियन टिंस्ले ने किया था.

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क्रिस्टियन ने हॉलीवुड की मशहूर फ़िल्मों जैसे 'फ़ास्ट एंड फ़्यूरियस', 'ट्रांसफ़ॉरमर्स' और 'प्रिज़न ब्रेक' जैसी मशहूर फ़िल्मों में काम किया है. वो विन डीज़ल, एंजेलीना जोली और जॉन स्टाथाम जैसे कलाकारों के लिए मेकअप कर चुके हैं.
क्रिस्टियन को सिर्फ़ बॉलीवुड ही नहीं चीनी फ़िल्म इंडस्ट्री, यूरोपियन स्वतंत्र फ़िल्म इंडस्ट्री में भी कई बार बुलाया जाता है.

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अमिताभ बच्चन का कई दशकों से मेकअप कर रहे दीपक ने बताया, "हम सभी को वहां मौजूद रहने के लिए कहा गया, लेकिन मेकअप क्रिस्टियन ने किया और बढ़िया किया था."
वे आगे कहते हैं, "हमें उनसे काफ़ी कुछ सीखने को मिला. लेकिन मेरा ये भी मानना है कि भारत में भी इतने काबिल मेकअप आर्टिस्ट हैं जिन पर भरोसा किया जा सकता है. वो प्रोस्थेटिक मेकअप कर सकते हैं."
दीपक आगे कहते हैं कि यहां के मेकअप आर्टिस्ट को कमतर आंका जाता है. वे कहते हैं कि मेहनताना तो दूर, हमें दिए जाने वाली पगार से सामान की लागत भी नहीं निकलती है.

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दीपक की बातों से सहमति जताते हुए दूसरे मेकअप आर्टिस्ट पेरी पटेल कहते हैं, "प्रोस्थेटिक मेकअप में लगने वाला सामान काफी महंगा आता है. एक छोटी सी डिब्बी ही बीस हजार की आती है. और ये एक बार में ही खत्म हो जाती है."
भारतीय मेकअप आर्टिस्ट की अनदेखी की बात पर पेरी ने कहा कि हॉलीवुड के मेकअप आर्टिस्ट को फ़िल्म निर्माता करोड़ों दे सकते हैं लेकिन भारतीय मेकअप आर्टिस्टों को लाख रुपए मेहनताना भी फ़ालतू लगता है.

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अभिनेता ऋषि कपूर को शकुन बत्रा की फ़िल्म 'कपूर एंड संस' में बूढ़ा बनाने के लिए तकरीबन डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं.
अपनी शर्तो पर काम करने के लिए मशहूर मेकअप आर्टिस्ट मिक्की कॉन्ट्रेक्टर बाहर से आने वाले मेकअप आर्टिस्ट को 'गोरों की बाढ़' की उपमा देते हैं.

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मिक्की कहते हैं कि स्पेशल मेकअप की बात तो समझ में आती है, लेकिन ये क्या नियमित मेकअप के लिए भी बाहर के आर्टिस्ट को तवज़्ज़ो दी जा रही है.
मिक्की ने बताया कि 'कपूर एंड सन्स' के लिए ऋषि कपूर को 'दादू' का लुक दिया जा रहा था, तो मैं वहीं था.

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उन्होंने बताया, "दरअसल, मुझे खुद चिंटू (ऋषि कपूर) जी ने बुलाया था, उनका मेकअप ग्रेग कैनॉम कर रहे थे. ग्रेग नौ बार अकादमी पुरस्कार के लिए नामांकित हुए हैं और तीन बार उन्होंने पुरस्कार प्राप्त भी किया है."
मिक्की कहते हैं कि ग्रेग मेकअप की दुनिया के जादूगर हैं, उन्हें एनॉटॉमी की जितनी समझ और मेकअप की तकनीक का जैसा ज्ञान है, वो कम ही लोगों के पास होता है.
मिक्की ने आगे कहा कि ग्रेग जैसे लोग अपवाद हैं, यदि इन्हें छोड़ दिया जाए तो बाहर से जो मेकअप आर्टिस्ट आ रहे हैं उनके बदले भारतीय कलाकारों को मौके देने चाहिए.

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आपको बता दें कि ग्रेग कैनॉम ने शाहरुख ख़ान की आगामी फ़िल्म 'फ़ैन' में उनके 'गौरव' नाम के किरदार का मेकअप किया है.
भारतीय मेकअप आर्टिस्टों को और काबिल बनाने की मांग करते हुए पेरी पटेल कहते हैं कि मेकअप आर्टिस्टों की आर्थिक रूप से मदद करके उन्हें नई तकनीकों का ज्ञान दिया जा सकता है.
प्रोडक्शन हाउस उन पर खर्च कर उन्हें अप-टू-डेट बनाएं और अपनी फिल्मों में उनसे काम लें, क्योंकि एक समय बाद आपके देश में भी काबिल मेकअप आर्टिस्ट बन जाएंगे और भविष्य में प्रोडक्शन हाउस पर आर्थिक दबाव भी नहीं पड़ेगा.
लेकिन फ़िलहाल तो निर्माताओं को हॉलीवुड से आने वाले आर्टिस्ट ही पसंद आ रहे हैं और इस विषय पर टिप्पणी करने से अधिकांश निर्माता निर्देशकों ने किनारा कर लिया.
निर्माता निर्देशकों के अनुसार, वो कोई टिप्पणी कर किसी विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते. लेकिन वे कहते हैं कि किसी प्रोडक्शन हाउस पर निर्भर रहने की बजाय मेकअप आर्टिस्ट को सिखाने के लिए मेकअप एसोसिएशन काम कर सकती है.
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