'गुलज़ार ना होते तो हम भी ना होते'
- Author, सुशांत एस मोहन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
गायिका रेखा भारद्वाज का कहना है कि वो और उनके पति फिल्मकार विशाल भारद्वाज आज जहां भी है, वो सिर्फ़ गीतकार और फ़िल्मकार गुलज़ार की वजह से हैं.
'नमक इश्क का' और 'कबीरा' जैसे गीत गाने वाली रेखा भारद्वाज बीते दिनों बीबीसी स्टूडियो आईं और उन्होंने अपनी पेशेवर और निजी ज़िंदगी के कई क़िस्से साझा किए.
वैसे तो रेखा अपने नए एल्बम 'मूनलाइट व्हिस्पर' के प्रमोशन के लिए आई थीं लेकिन जब बात चली तो दूर तक गई.
सिर्फ़ 15 मिनट का समय लेकर आईं रेखा भारद्वाज ने बीबीसी के स्टूडियो में अच्छा ख़ासा समय बिताया.
विशाल और रेखा

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कॉलेज के समय से साथ रेखा और विशाल भारद्वाज की संगीतमय जोड़ी हैं.
विशाल के संगीत पर रेखा के सुरों ने कई ऐसे गाने दिए हैं जो किसी के भी पसंदीदा गानों में से एक हो सकते हैं.
'ओंकारा' फ़िल्म से 'नमक इश़्क का', फ़िल्म कमीने से 'रात के ढाई बजे' या फिर साल 2010 में फ़िल्म इश्किया के गाने 'बड़ी धीरे जली' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गायिका का अवॉर्ड मिला.
विशाल के बारे में रेखा कहती हैं, "उनके लिए गाना हमेशा एक ख़ास अहसास होता है. विशाल एक अलग ही ज़ोन में रहता है और जब वो संगीत बनाता है तो उसे सुर में बांधने से जैसे उस गाने में आत्मा आ जाती है."
हाल ही में बीबीसी स्टूडियो में राहत फ़तेह अली ख़ान ने भी विशाल को भारत का सबसे अच्छा संगीतकार कहा था.
इस पर रेखा का जवाब था,"विशाल चुप रहते हैं, हमेशा हर चीज़ को समझते हुए और फिर हर चीज़ से संगीत बना लेते हैंं शायद यही उन्हें ख़ास बनाता है."
ग़ुलज़ार और हम

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गीतकार, लेखक और निर्देशक गुलज़ार और विशाल भारद्वाज की नज़दीकी किसी से छिपी नहीं है और रेखा इस नज़दीकी को अपने अंदाज़ में बयां करती हैं.
वो कहती हैं, "गुलज़ार साहब नहीं होते तो हम नहीं होते, विशाल की पहली कंपोज़ीशन मोगली वाले धारावाहिक के लिए थी, 'जंगल जंगल बात चली है' तब से गुलज़ार साहब से जो नाता जुड़ा है वो अभी भी क़ायम है."
"गुलज़ार साहब की ख़ामोशी भी आपको कुछ सिखा देती है फिर वो बोल दें तो बात ही क्या."
रेखा को गुलज़ार से मिलवाने वाले विशाल ही थे और जब गुलज़ार साहब से वो मिली तो गुलज़ार उनकी आवाज़ के फ़ैन हो गए.
रेखा कहती हैं, "वो सिर पर पिता के साए जैैसे हैं और जो एक चीज़ उन्होंने सिखाई है वो है 'डिसिप्लिन', वो समय और नियमों के पाबंद हैं और अगर आपने गुलज़ार के साथ रहकर 'डिसिप्लिन' नहीं सीखा तो आपने कुछ नहीं सीख़ा."
मीडिया से दूरी

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जाते जाते रेखा ने कहा कि उनको और विशाल दोनों को ही साक्षात्कार देना पसंद नहीं है, "कभी कभी वक़्त की कमी के चलते तो कभी पत्रकारों के सवाल से बोर होकर हम साक्षात्कार से कतराते हैं."
वो कहती हैं, "लोग अपना होमवर्क कर नहीं आते, ऐसे में हम कब तक पुराने घिसे पिटे सवालों का जवाब देते रहें, आपका पहला गाना कौन सा है?"
लेकिन उन्होंने कहा कि इंटरव्यू अच्छा होता है तो बातें निकलती हैं जैसी आज निकली,"बीबीसी के स्टूडियो आकर अच्छा लगा और उम्मीद है कि जल्द ही हम (विशाल और रेखा) जल्द ही आपसे मुख़ातिब होंगे."
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