देसी टीवी पर जलवे फ़िरंगी मेम के

- Author, श्राबंती चक्रवर्ती
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी के लिए
हिंदी फ़िल्मों में कटरीना कैफ़, जैकलीन फ़र्नांडिज़, नर्गिस फ़खरी जैसी स्टार्स के बाद अब टीवी पर भी विदेशी चेहरे दिखने लगे हैं.
बीते कुछ वक़्त से टीवी पर बदलती कहानियों के चलते विदेशी कलाकारों को इन सीरियलों में रोल मिल रहे हैं.
चाहे 'अशोका' में ग्रीस की महारानी का रोल हो या 'महाकुंभ' की कैथरीन, विदेशी बालाओें के लिए भारतीय टीवी के दरावाज़े खुल रहे हैं.
कहानी की मांग

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भारतीय टीवी की पहली गोरी बहू सुज़ैन बर्नेर्ट जर्मनी से भारत आई हैं. सुज़ैन मानती है कि अब ऐसी कहानियां बनने लगी हैं जिनमें उनके लिए काम है.
सुज़ैन कहती हैं, "2004 में मैंने 'अस्तित्व एक प्रेम कहानी' में कैथरीन का किरदार निभाया, जिसका ट्रैक लंदन में था और उसमें मेरा काम करना स्वाभाविक था. लेकिन फिर 'कसौटी ज़िंदगी की' में मुझे टीवी की बहू का किरदार मिला, क्योंकि वो कहानी की मांग थी."
इसी तरह ग्रीस से आई कल्लीरोई तज़ीएफ़्ता बताती हैं, "पहले बजट के चलते विदेशी कलाकारों को नहीं लिया जाता था, लेकिन अब तो निर्देशकों के पास बजट भी ज़्यादा होता है तो विदेशी कलाकारों के लिए यहां मांग बढ़ गई है."
कल्लीरोई फ़िलहाल लाइफ़ ओके चैनल के लोकप्रिय शो 'महाकुम्भ' में कैथरीन के क़िरदार में नज़र आ रही हैं.
थोड़ा मुश्किल तो होता है

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विदेश से यहां काम करने आए कलाकारों को गहरा कल्चरल शॉक लगता है.
सुज़ैन बताती हैं, "शुरू-शुरू में सेट पर बाकी कलाकार मुझे थोड़ा असुविधाजनक तरीके से देखते थे, लेकिन वक़्त के साथ उन्होंने मुझे अपना लिया."
वो कहती हैं, "मैंने करियर में मकरंद देशपांडे, आमिर खान, एकता कपूर, अपर्णा सेन, श्याम बेनेगल जैसे लोगों के साथ काम किया है मैं खुश हूं. "
सुज़ैन अभी 'सम्राट अशोका' में रानी हेलेना का रोल कर रही हूँ.
मुश्किलें भी, आसानी भी

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विदेशी कलाकारों के लिए डॉयलॉग बोलना एक टेढ़ी खीर होती है.
'महाकुंभ' के सेट पर पहले 10 दिन कल्लीरोई के लिए चुनौती से भरे थे.
वो कहती हैं, "पहले 10 दिन सारे डायलॉग्स मुझे समझ ही नहीं आ रहे थे, बस मैं उन्हें याद कर बोल रही थी."
सुज़ैन भी बताती हैं, "अशोका में कई बार संस्कृत शब्दों का प्रयोग करना पड़ता है जो कि मेरे लिए मुश्किल हो जाता है, लेकिन साथी मदद करते हैं."
सुज़ैन अब हिंदी बोल लेती हैं, लेकिन नए कलाकारों के लिए ये बहुत मुश्किल होता है.
छोटे पर्दे पर काम करने वाली इन विदेशी बालाओं को भारतीय टीवी खूब रास आ रहा है और ये उन्हें अपने वतन से ज़्यादा आर्गेनाईज्ड भी लगता है.
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