'जेठालाल' ने बदली दिलीप जोशी की किस्मत

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- Author, सुशांत एस मोहन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
सलमान ख़ान के साथ 'मैंने प्यार किया', 'हम आपके हैं कौन' और शाहरुख़ ख़ान के साथ 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' जैसी फ़िल्म करने के बाद भी दिलीप जोशी की फ़िल्मी पारी बिलकुल फ़्लॉप रही लेकिन जब टीवी पर वो 'जेठालाल' बनकर आए तो उनकी किस्मत जैसे पलट ही गई.
इन दिनों डेली सोप 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में प्रमुख किरदार 'जेठालाल' इतना मशहूर हो चुका है कि दिलीप जोशी को कोई उनके असली नाम से नहीं बल्कि 'जेठालाल' के नाम से ही जाना जाता है.
सात सालों से जारी इस सीरियल ने दिलीप जोशी को इतना व्यस्त कर रखा है कि उनके पास कुछ और करने का वक़्त ही नहीं है.
'हीरो से कम नहीं'

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साल 1989 में गुजराती रंगमंच को छोड़कर मुंबई का रुख़ करने वाले दिलीप का फ़िल्मी करियर परवान ही नहीं चढ़ पाया.
लेकिन उन्हें इसका अफ़सोस नहीं.
वो कहते हैं, "बॉलीवुड में कड़ा मुक़ाबला है. मेरी किस्मत वहां चली नहीं तो मैं टीवी पर चला आया. अब तारक मेहता में मुझे सब कुछ करने को मिलता है. रोमांस, एक्शन, इमोशन. मैं किसी बॉलीवुड हीरो से कम थोड़े ना हूं."
'असली जेठालाल ऐसा नहीं'
'तारक मेहता' गुजराती लेखक तारक मेहता के एक गुजराती पत्रिका में लिखे व्यंग्य लेखों की सिरीज़ पर आधारित है.
लेकिन इस सिरीज़ में जो किरदार तारक मेहता ने लिखे हैं वे ऐसे नहीं हैं जैसे वो टीवी पर दिखते हैं.

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दिलीप बताते हैं, "तारक भाई का जेठालाल थोड़ा सा अलग है. वो दुबला पतला है, शराब पीता है और कई बार ग़ुस्से में भी आ जाता है लेकिन हम इसे एक पारिवारिक धारावाहिक बनाना चाहते थे इसलिए हमने इस किरदार का स्वरूप बदल दिया."
टाइप्ड होने का ख़तरा?
जेठालाल का किरदार सात सालों से निभाने की वजह से क्या टाइप्ड हो जाने का ख़तरा नहीं सताता?
दिलीप कहते हैं, "कई बार ये ख़्याल मुझे आया है कि कुछ और किया जाए लेकिन जितना प्यार और लोकप्रियता इस किरदार से मुझे मिली है वही दूसरे से भी मिले इसकी गारंटी नहीं है. ऐसे में इसे छोड़कर क्यों जाऊं."
दिलीप इस शो और छोटे पर्दे को छोड़कर जाने की सोच नहीं रखते.

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वह बताते हैं कि शो के ज़रिए सलमान ख़ान और शाहरुख़ ख़ान जैसे बड़े सितारे उन्हें और क़रीब से जान पाए क्योंकि ये कलाकर अपनी फ़िल्मों के प्रमोशन करने उनके शो में आते हैं.
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