रोल के लिए पार्टी में जाने की मजबूरी!

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- Author, मधु पाल
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
विद्या बालन ने हाल ही में कहा था, "आपकी सुरक्षा आपके हाथ. कास्टिंग काउच के मामले में ये आप पर निर्भर करता है कि आप स्थिति से कैसे निपटते हो."
बॉलीवुड में जहां पुरुष कलाकारों को रोल पाने के लिए पसीना बहाना पड़ता है वहीं महिला कलाकारों के लिए भी राह आसान नहीं है. बॉलीवुड में कई बार कास्टिंग काउच के मामले सामने आ चुके हैं.
दिल्ली की रहने वाली तृप्ति शर्मा पांच साल पहले दिल्ली से मुंबई आईं. बॉलीवुड में एक मुक़ाम हासिल करने का अरमान लिए हुए.
STY'मेरे साथ छेड़खानी की, समझौता करने को कहा''मेरे साथ छेड़खानी की, समझौता करने को कहा'बॉलीवुड में एंट्री पाने के लिए संघर्ष कर रहे विनीत काकर दावा करते हैं कि उनसे रोल के बदले शारीरिक संबंध बनाने की मांग की जाती है. उनके मुताबिक़ ग्लैमर वर्ल्ड में लड़कों के साथ भी कास्टिंग काउच बेहद आम है. 2014-07-02T19:16:25+05:302014-07-03T15:45:08+05:302014-07-03T15:45:08+05:302014-07-03T19:25:45+05:30PUBLISHEDhitopcat2
लेकिन कुछ ऐड फ़िल्मों और यशराज बैनर की 'शुद्ध देसी रोमांस' में एक छोटे से रोल के सिवाय कुछ हाथ नहीं आया.
तृप्ति के मुताबिक़, "इंडस्ट्री में कई को-ऑर्डिनेटर होते हैं, जिनके पास तमाम मॉडल्स और एक्ट्रेस का डेटा होता है. निर्माता रोल्स के लिए इन्हीं से संपर्क करते हैं और फिर ये हमसे. हमें रोल देने के एवज़ में ये अच्छी ख़ासी रक़म लेते हैं."
तृप्ति, इंडस्ट्री के कास्टिंग डायरेक्टर्स पर भी सवाल उठाते हुए कहती हैं, "इन्हें पता होता है हम स्ट्रगलिंग कलाकारों की मजबूरी. इसलिए ये हमें उंगलियों पर नचाते हैं. साथ घूमने-फिरने को कहते हैं."
प्रिमी श्रीवास्तव

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इंदौर की प्रिमी श्रीवास्तव चार साल पहले मुंबई आईं. वो 'परिचय', 'सावधान इंडिया' 'ये है आशिकी' जैसे टीवी कार्यक्रमों में काम कर चुकी हैं.
PGLकिसने की किससे कानाफूसीकिसने की किससे कानाफूसीकिन हिरोइनों ने की फ़िल्म हमशकल्स के लॉन्च पर आपस में कानाफूसी. 'नो टोबैको डे' पर कौन सा हीरो और कौन से क्रिकेट स्टार नज़र आए एक संग, साथ ही आलिया और परिणीति का अलग अंदाज़.2014-05-28T20:57:42+05:302014-06-01T16:33:08+05:302014-06-01T16:33:08+05:302014-06-02T13:20:24+05:30PUBLISHEDhitopcat2
लेकिन ग्लैमर इंडस्ट्री के तौर तरीक़ों और लोगों से 'परेशान' होकर अब उन्होंने एक्टिंग छोड़कर एंकरिंग करने का फ़ैसला कर लिया है.
प्रिमी के मुताबिक़ फ़िल्म और टीवी जगत में जितनी पार्टी होती हैं सब बनावटी होती हैं. "लोग झूठे वादे करते हैं. अपने साथ पार्टी में ले जाते हैं. झूठ-मूठ में मुस्कुराना पड़ता है. कोई भी बड़ा प्रोड्यूसर या फ़ाइनेंसर सिर्फ़ इसलिए किसी को काम नहीं देता कि वो उसके साथ पार्टी में आई है."
पायल घोष

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कुछ टीवी कार्यक्रमों और फ़िल्मों में काम कर चुकी पायल घोष का अनुभव इतना बुरा नहीं है. उन्होंने दावा किया कि काम पाने के लिए उन्हें ना तो ढेर सारे ऑडिशन देने पड़े ना ही स्टूडियोज़ के चक्कर लगाने पड़े.
पायल कहती हैं, "मैं 16 साल की उम्र में जब छुट्टियां मनाने मुंबई आई तो एक निर्देशक ने मुझे देखा और अपनी एक टेली फ़िल्म में काम दिया. फिर मैंने एक तेलुगू फ़िल्म की. मेरे कई दोस्त हैं जो कई साल से संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन इंडस्ट्री में टैलेंट के साथ क़िस्मत होनी बहुत ज़रूरी है."
पायल, फ़िलहाल निर्देशक संजय छैल की फ़िल्म 'खन्ना-पटेल' में काम कर रही हैं.
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