तनु वेड्स मनु-संगीत में ताज़गी

- Author, पवन झा, संगीत समीक्षक
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
'तनु वेड्स मनु' नई रोमांटिक कॉमेडी है जो दो अलग अलग सामाजिक परिवेश के किरदारों के रिश्ते की दास्तां बयां करती है.
इसकी कहानी मुख्य किरदारों (जिसमें हीरो एक सीधा-सादा एनआरआई डॉक्टर है और हीरोइन कानपुर शहर की एक तेज़ तर्रार बिंदास बाला है) के अलग सामाजिक परिवेश और विपरीत जीवन शैली के बावजूद मेल की कहानी है.
ना सिर्फ़ फ़िल्म के निर्देशक आनंद राय नए हैं, वरन संगीतकार कृष्णा और गीतकार राजशेखर भी पहली बार फ़िल्मों में आए हैं.
संगीत रोमांटिक कॉमेडी शैली की फ़िल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है और इस फ़िल्म में भी संगीत की अहम भूमिका है.

एलबम में अलग अलग रंगों के कुल सात ट्रैक्स हैं. साउंडट्रैक में उत्सव का माहौल है, रोमांटिक गीत हैं, मोहल्लों की मस्तियां हैं, पारम्परिक बंदिशें हैं, सूफ़ी और लोक गीतों का आधार है और एक जबरदस्त भांगड़ा भी है.
फ़िल्म का संगीत एक सुखद आश्चर्य की तरह आया है और उम्मीद से बहुत बेहतर साबित हुआ है.
एलबम को धमाकेदार शुरुआत मिलती है लैम्बर हुसैनपुरी के गाए और आडीबी रचित "साडी गली खुल के" से. गीत आरडीबी और लैम्बर के कुछ वर्ष पुराने एलबम "थ्री" से लिया गया है और पहले से बहुत लोकप्रिय है. ख़ासकर शादी-ब्याह के संगीत आयोजनों में.
गीत में जोश है रवानी है और पारंपरिक भांगड़ा के साथ आधुनिक वाद्य संयोजन सुनने वालों को थिरकने पर मजबूर कर देता है. पिछले कुछ सालों में इस शैली के बहुत से गीत आए हैं मगर फिर भी "साडी गली" की ताज़गी बरकरार है.
साउंडट्रैक का अगला गीत "यूं ही" संगीतकार कृष्णा की एक मधुर रचना है. गीत को मोहित चौहान ने दिलकश अंदाज़ में गाया है और उनकी आवाज़ फ़िल्म में माधवन की इमेज पर बहुत जमती भी है.
राजशेखर के बोल मुख्य किरदार की कशमकश को बखूबी पेश करते हैं. कृष्णा ने पार्श्व में उज्जयनी के स्वरों का अच्छा इस्तेमाल किया है.
"मन्नू भय्या" किरदारों की मैच मेकिंग पर लिखा एक मज़ेदार गीत है. राजशेखर ने किरदारों के अलग अलग परिवेश को आधार बनाते हुए कानपुर और दिल्ली के रूपकों का उपयोग किया है.
कृष्णा के कोरस संयोजन में कहीं कहीं एआर रहमान की कोरस शैली का प्रभाव दिखाई देता है. मोहल्ले का माहौल लिये ये खुशनुमा सा गीत एलबम को एक अलग रंग भी देता है.
रंगरेज़ के गीत बरसों से हमारे संगीत का हिस्सा रहे हैं चाहे वो कबीर-वाणी हो हों, हमारे लोकगीत, भजन या सूफ़ी कलाम, हर दौर के गीतों में रंगरेज़ की दार्शनिकता मौजूद रही है.
इस दौर में भी रंग दे बसंती का शीर्षक गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था. 'तनु वेड्स मनु' में रंगरेज़ दो संस्करणों में है.
पहले संस्करण को संगीतकार कृष्णा ने ख़ुद के स्वर दिए हैं जबकि दूसरा संस्करण पंजाब के प्रसिद्ध सूफ़ी लोकगीत गायकों की जोड़ी वडाली बन्धुओं ने गाया है. दोनों ही संस्करण असरदार बन पड़े हैं.

रूपकुमार राठौड़ का गाया 'पिया ना रहे मन बसिया' एक और शानदार प्रस्तुति है. पारंपरिक किस्म की बंदिश और बोल हैं और कृष्णा ने एक मधुर रचना गढ़ी है. हालांकि इलेक्ट्रॉनिक साउंड्स गीत के असर को थोड़ा कम करते हैं मगर फिर भी गीत बार बार सुनने लायक है.
साउंडट्रैक में एक और पंजाबी गीत है 'जुगनी' जो कंगना रानावत के किरदार से परिचय कराता है.
कुल मिलाकर 'तनु वेड्स मनु' में संगीतकार कृष्णा और गीतकार राजशेखर की जोड़ी ने उम्मीद से बहुत बेहतर संगीत दिया है.
अलग अलग किस्म के गीत एक मनोरंजक, लोकप्रिय और मधुर एलबम बनाने में कामयाब रहे हैं. और ये नई जोड़ी आने वाले दिनों के लिये उम्मीद जगाती है.
नंबरों के लिहाज से विविधता के लिये एलबम को पाँच में से साढ़े तीन नंबर.












