'कभी-कभी ने बदल दी ज़िंदगी'

ख़य्याम
इमेज कैप्शन, ख़य्याम को पद्म भूषण देने का ऐलान किया गया है.
    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पद्म भूषण सम्मान से नवाज़े जाने के ऐलान के बाद बीबीसी से ख़ास बात करते हुए संगीतकार ख़य्याम ने इसके लिए अपने प्रशंसकों और सरकार का शुक्रिया अदा किया.

ख़य्याम फ़िल्म कभी-कभी को अपने करियर का सबसे महत्तवपूर्ण मोड़ मानते हैं.

वो कहते हैं, "कभी-कभी ने मुझे शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया. इसके गाने कभी-कभी मेरे दिल में, मैं पल दो पल का शायर हूं और मेरे घर आई एक नन्ही परी मेरे सबसे पसंदीदा गानों में से एक हैं."

कभी-कभी के अलावा ख़्य्याम ने त्रिशूल, उमराव जान, नूरी, थोड़ी सी बेवफ़ाई और रज़िया सुलतान जैसी फ़िल्मों का सुपरहिट संगीत दिया है.

ख़य्याम कहते हैं कि उनको मिली कामयाबी में उनके परिवार का और ख़ासतौर से उनकी पत्नी जगजीत कौर का सबसे महत्तवपूर्ण योगदान है.

अपनी कामयाबी की वजह बताते हुए ख़य्याम कहते हैं, "मैं जब संगीत रचता हूं तो हमेशा ही कहानी, किरदार यहां तक कि लोकेशंस का ध्यान रखता हूं. उन्हीं के आधार पर संगीत बनाता हूं."

ख़य्याम ये भी मानते हैं कि उनके लिए ज़्यादातर गाने बेहतरीन शायरों ने लिखे हैं उसी वजह से वो इतना बेहतरीन संगीत दे पाए हैं.

ख़य्याम के पसंदीदा संगीतकार सी रामचंद्र हैं. इसके अलावा वो रोशन, मदनमोहन और जयदेव जैसे संगीतकारों के भी मुरीद हैं.

मौजूदा दौर के संगीत से ख़य्याम ख़ास प्रभावित नहीं हैं. वो कहते हैं, "हमारे दौर के संगीत की तो कोई बराबरी ही नहीं कर सकता. आजकल के गानों में बोलों का तो महत्तव ही नहीं होता. बस शोर ज़्यादा होता है."

हालांकि ख़य्याम ये भी मानते हैं कि इस दौर में भी कई प्रतिभाशाली संगीतकार हैं, लेकिन फ़िल्म निर्माताओं के दबाव में उन्हें ऐसा चालू संगीत देना पड़ता है.

उषा उत्थुप
इमेज कैप्शन, उषा उत्थुप को पद्म श्री से नवाज़ा जाएगा.

ख़य्याम को पद्म भूषण के साथ ही जानी मानी गायिका उषा उत्थुप को पद्म श्री सम्मान देने का ऐलान किया गया है.

उषा कहती हैं, "मैं इतने लंबे समय तक इतना प्यार देने के लिए अपने प्रशंसकों की शुक्रगुज़ार हूं. इसी वजह से मैं इस मुक़ाम तक पहुंच पाई हूं. भगवान का बहुत-बहुत धन्यवाद."

उषा के मुताबिक उनका सफ़र ख़ासा मुश्किल रहा क्योंकि उनकी आवाज़ उस दौर के बाकी गायकों से बिलकुल अलग थी.

वो कहती हैं, "भारत में लोग यही समझते हैं कि सिर्फ़ पार्श्व गायक ही कामयाब हो पाते हैं. इस लिहाज़ से मैं ख़ुशनसीब हूं कि मैं इतने लंबे वक़्त तक चल पाई. मुझे मिले इस सम्मान के बाद मेरे जैसे दूसरे गायकों को भी प्रोत्साहन मिलेगा."