ब्रह्मास्त्र: क्या ये लगातार पिट रहे बॉलीवुड के तरकश का कारगर तीर होगा?

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- Author, प्रदीप सरदाना
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार एवं फ़िल्म समीक्षक
एक पुरानी कहावत है 'डूबते को तिनके का सहारा', लेकिन आज बॉलीवुड की डूबती फ़िल्म इंडस्ट्री फ़िल्म 'ब्रह्मास्त्र'में अपना सहारा ढूंढ रही है. इसीलिए सभी की निगाहें 9 सितंबर को रिलीज़ हो रही 'ब्रह्मास्त्र'पर लगी हुई हैं. लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 'ब्रह्मास्त्र' डूबती हिन्दी सिनेमा इंडस्ट्री का सहारा बन पाएगी?
पिछले कुछ महीनों से बॉक्स ऑफ़िस पर 'लाल सिंह चड्ढा','सम्राट पृथ्वीराज', 'जयेशभाई जोरदार,' 'जर्सी','अटैक','बच्चन पांडे','रनवे-34','अनेक', 'हीरोपंती-2' 'धाकड़','शमशेरा','दोबारा' और 'रक्षा बंधन' जैसी कई छोटी-बड़ी हिन्दी फ़िल्में जिस तरह धराशायी हुई हैं. उससे फ़िल्म इंडस्ट्री में एक सन्नाटा-सा पसरा है.
बड़े-बड़े फ़िल्मकार ही नहीं अक्षय कुमार, आमिर ख़ान, अजय देवगन, रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, टाइगर श्राफ़, आयुष्मान खुराना और अमिताभ बच्चन जैसे सभी सितारों की फ़िल्में जिस तरह कतार से फ़्लॉप हो रही हैं. उससे फ़िल्म उद्योग विशेषकर हिन्दी फ़िल्म उद्योग बुरी तरह टूट चुका है.
ऐसे में बहुप्रतीक्षित फ़िल्म 'ब्रह्मास्त्र' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शित कर यह दिखाने की कोशिश भी है कि बॉलीवुड के हौसले अभी बुलंद हैं.
हॉलीवुड अंदाज़ में बनी है फ़िल्म

फ़िल्म 'ब्रह्मास्त्र' को देश की ऐसी पहली फ़िल्म कहा जा सकता है जिसका निर्माण तो हॉलीवुड अंदाज़ में किया ही गया है, साथ ही इसे रिलीज़ भी हॉलीवुड की तर्ज पर ही किया जा रहा है.
सबसे बड़ी बात यह है कि 'ब्रह्मास्त्र' को दुनिया भर में आठ हज़ार स्क्रीन्स पर रिलीज़ किया जा रहा है जिसमें पांच हज़ार स्क्रीन भारत में होंगे और तीन हज़ार विदेश में. इससे पहले किसी भी हिन्दी फ़िल्म को इतनी बड़ी रिलीज़ नहीं मिली.
फिर यह फ़िल्म तीन विभिन्न फ़ॉर्मेट में रिलीज़ हो रही है - 2 डी, 3 डी और आईमैक्स 3 डी. उधर 'ब्रह्मास्त्र'को हिन्दी के साथ तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ यानी पांच भाषाओं में रिलीज़ करके फ़िल्म को एक नया शिखर देने का प्रयास है.
फ़िल्म निर्माताओं की रणनीति यह है कि नौ सितंबर से शुरू हो रहे सप्ताह में देश के अधिकांश थिएटर 'ब्रह्मास्त्र' से भरे हों. साथ ही विदेशों में भी भारतीय फ़िल्मों के प्रशंसकों को 'ब्रह्मास्त्र' देखने के ख़ूब मौके मिलें जिससे इस फ़िल्म को हॉलीवुड की फ़िल्मों की तरह बंपर ओपनिंग मिल सके. यह देखते हुए अमेरिका में तो भारत से पहले ही 30 अगस्त को ही इसकी एडवांस बुकिंग शुरू कर दी गई थी.
हालांकि फ़िल्म को हॉलीवुड जैसी बंपर ओपनिंग मिल पाएगी इस बात में तो संदेह है. लेकिन यह ज़रूर है कि 'ब्रह्मास्त्र' को लेकर देश में कोरोना काल के बाद पहली बार किसी मूलत: हिन्दी फ़िल्म के लिए एडवांस बुकिंग में दर्शकों का इतना उत्साह दिख रहा है.
देश में पीवीआर, सिनेपोलिस और आईनॉक्स जैसे तीन प्रमुख मल्टीप्लेक्स में एडवांस बुकिंग में 'ब्रह्मास्त्र' के पहले दिन के डेढ़ लाख से अधिक टिकट बिकने से क़रीब 5.25 करोड़ रुपए एकत्र हो चुके हैं. इससे फ़िल्म रिलीज़ से पहले 'ब्रह्मास्त्र' की पहले ही दिन की विशुद्ध आय में साढ़े चार करोड़ रुपए तो फ़िल्म के खाते में अभी से आ गए हैं.
उधर फ़िल्म के पहले तीन दिन अर्थात सप्ताहांत तक की एडवांस बुकिंग में सिर्फ़ मल्टीप्लेक्स से 'ब्रह्मास्त्र' की टिकट बिक्री से लगभग 14 करोड़ रुपए की विशुद्ध आय हो गई है. इस सब से यह संभावना बनती दिख रही है कि 'ब्रह्मास्त्र'प्रदर्शित होने पर देश में ही 20 से 25 करोड़ रुपए की ओपनिंग ले सकती है.
फिर विदेशों में भी इस फ़िल्म को लेकर अच्छा-ख़ासा क्रेज़ बन गया है. न्यू यॉर्क से डॉक्टर अचल शंकर दवे बताते हैं, ''ब्रह्मास्त्र को लेकर भारतीय समुदाय में बहुत उत्साह है. सभी इसकी रिलीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हैं. एडवांस बुकिंग में फ़िल्म के शुरुआती दिनों की अधिकांश टिकटें बिक चुकी हैं.''

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भव्यता की नई मिसाल

'ब्रह्मास्त्र' की सबसे ख़ास बात इसकी भव्यता और तकनीक है. फ़िल्म का बजट भी लगभग 400 करोड़ रुपए है. इसकी शूटिंग बुल्गारिया, न्यू यॉर्क, लंदन, एडिनबरा के साथ बनारस और मुंबई में की गई है.
फिर यह फ़िल्म देश की पहली योजनाबद्ध ट्रायलॉजी (तीन भागों में बनने वाली) फ़िल्म है जिसकी सम्पूर्ण योजना पहले भाग के प्रदर्शन से पूर्व ही बन चुकी है. हालांकि यह योजना तभी संभव हो सकेगी जब 'ब्रह्मास्त्र' की इस पहली कड़ी -'शिवा' को सफलता मिलेगी.
फ़िल्म में अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, मौनी रॉय, नागार्जुन, डिम्पल कपाड़िया और सौरव गुर्जर प्रमुख कलाकार हैं. फ़िल्म का एक और आकर्षण शाहरुख ख़ान भी हैं जो इसमें एक वैज्ञानिक की छोटी-सी भूमिका में हैं.
हालांकि 'ब्रह्मास्त्र' का सबसे बड़ा आकर्षण रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की जोड़ी है. यह पहली फ़िल्म है जब दोनों एक साथ पर्दे पर साथ आ रहे हैं. दोनों का 2018 में इसी फ़िल्म की शूटिंग के दौरान साथ हुआ और फिर उनकी प्रेम कहानी शुरू हो गई.
रणबीर-आलिया ने तभी शादी का प्लान भी कर लिया था. रणबीर के पिता ऋषि कपूर और मम्मी नीतू सिंह चाहते थे कि दोनों जल्द शादी कर लें. पर रणबीर चाहते थे कि 'ब्रह्मास्त्र' की रिलीज़ के बाद ही दोनों शादी करें. लेकिन 'ब्रह्मास्त्र' की शूटिंग और रिलीज़ लगातार आगे खिसकती रही जिससे दोनों की शादी भी टलती रही.
ऋषि कपूर तो बेटे की शादी का अरमान लिए दुनिया से चले गए. उधर 'ब्रह्मास्त्र' फिर भी आगे टलती रही तो रणबीर ने अपने पूर्व निर्णय को बदल कर 'ब्रह्मास्त्र' की रिलीज़ से पहले बीते अप्रैल में आलिया से विवाह रचा लिया.
असली ज़िंदगी में हिट और लोकप्रिय रणबीर-आलिया की जोड़ी की फ़िल्मी पर्दे पर कैमिस्ट्री दर्शकों को कितनी पसंद आती है, यह कुछ दिन बाद पता लगेगा.
उधर 'ब्रह्मास्त्र'में तीस साल बाद अमिताभ बच्चन और नागार्जुन एक बार फिर साथ आ रहे हैं. इससे पहले ये दोनों दिग्गज 1992 में प्रदर्शित 'ख़ुदा गवाह' में साथ आए थे. साथ ही दक्षिण के सुपर स्टार नागार्जुन की हिन्दी फ़िल्मों में वापसी भी 16 साल बाद हो रही है. इससे पहले वह 2003 में फ़िल्म 'एलओसी -कारगिल' में मेजर आचार्य की भूमिका में नज़र आए थे.
'ब्रह्मास्त्र'से अमिताभ बच्चन और डिम्पल कपाड़िया का साथ भी 18 साल बाद हुआ है. सन् 2004 में प्रदर्शित 'हम कौन हैं' के बाद अब इन्हें इस फ़िल्म में देखा जा सकेगा.
'ब्रह्मास्त्र' एक और कलाकार के लिए काफ़ी अहम है वह हैं-मौनी रॉय. टीवी स्टार मौनी यूं तो अक्षय कुमार के साथ 'गोल्ड' फ़िल्म में नायिका के किरदार के साथ और भी कुछ फ़िल्में कर चुकी हैं. लेकिन 'ब्रह्मास्त्र' में वह पहली बार मुख्य खलनायिका 'जुनून' के रूप में आ रही हैं. यदि यह फ़िल्म सफल हुई तो मौनी के करियर को इससे एक नई दिशा मिल सकती है.
यह फ़िल्म इतनी बड़ी और अहम है कि इसके निर्माण में देश-विदेश से कई लोग जुड़े हैं. भारत से धर्मा प्रोडक्शन के करण जौहर इसके प्रमुख निर्माता हैं. साथ ही फ़िल्म के निर्माण में स्टार स्टूडियो, प्राइम फ़ोकस, स्टारलाइट पिक्चर्स की अहम भागेदारी है. उधर फ़िल्म के निर्देशक अयान मुखर्जी और अभिनेता रणबीर कपूर भी फ़िल्म के सह निर्माताओं में शुमार हैं.
'ब्रह्मास्त्र' की रिलीज़ दुनिया भर में बड़े पैमाने पर हो सके, इसके लिए भारत में यह ज़िम्मेदारी स्टार स्टूडियो ने ली है. जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे 'वॉल्ट डिज़्नी स्टूडियो मोशन पिक्चर्स' के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा.

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सिनेमा उद्योग को है बड़ी उम्मीद

'ब्रह्मास्त्र' की इस एडवांस बुकिंग को देख फ़िल्म उद्योग में एक नया जोश, नया उत्साह दिखाई दे रहा है. जब हमने देश के बड़े मल्टीप्लेक्स 'पीवीआर' के सीईओ कमल ज्ञानचंदानी से बात की तो वह 'ब्रह्मास्त्र' से अच्छी उम्मीदें संजोने लगे.
ज्ञानचंदानी बताते हैं- ''ब्रह्मास्त्र की जो एडवांस बुकिंग हो रही है वह हमारी उम्मीद से भी ज़्यादा है. दर्शकों का यह उत्साह बताता है कि उन्हें इस फ़िल्म का नया कॉन्टेन्ट पसंद आ रहा है. इससे पिछले दो-तीन महीनों से हिन्दी सिनेमा में जो निराशाजनक स्थितियाँ बन रही थीं वह 'ब्रह्मास्त्र' की सफलता के बाद बदल जाएंगी.''
''अच्छी एडवांस बुकिंग से यह साफ़ हो गया है कि दर्शक इस फ़िल्म को देखने के लिए बहुत उत्सुक हैं. साथ ही फ़िल्म का पहले तीन दिन का बिज़नेस काफ़ी अच्छा रहेगा. हमको इस फ़िल्म में अब काफी अच्छी संभावनाएं नज़र आ रही हैं.''
ज्ञान चंदानी यह भी बताते हैं, ''उम्मीद है दर्शक इस फ़िल्म से थिएटर्स की ओर लौटने लगेंगे. इसलिए हम अपने देश भर की 860 स्क्रीन्स में से क़रीब 650 स्क्रीन्स पर 'ब्रह्मास्त्र' को ही दिखाने जा रहे हैं.''
उधर मल्टीप्लेक्स की एक और बड़े चेन 'सिनेपोलिस'के सीईओ देवांग संपत बताते हैं- ''ब्रह्मास्त्र की जिस तरह एडवांस बुकिंग हुई है उससे फ़िल्म की सफलता की अपार संभावनाएं बन गई हैं. फ़िल्म की सफलता के मुझे चार प्रमुख कारण नज़र आ रहे हैं. एक यह कि डिज़्नी फ़िल्म की मार्केटिंग बहुत ही अच्छे ढंग से कर रहा है. दूसरे फ़िल्म को जिस तरह 'ग्लोबल एक्स्पोज़र'मिला है वह फ़िल्म के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है. तीसरे फ़िल्म तकनीकी रूप से बहुत आगे है और चौथी बात ये कि फ़िल्म का संगीत भी दर्शकों को पसंद आ रहा है. फिर फ़िल्म में अयान मुखर्जी की लंबी मेहनत साफ़ दिख रही है जिससे यह एक ऐसी भव्य फ़िल्म बन गई है जिसे देख दर्शक रोमांचित होंगे.''
सम्पत यह भी बताते हैं, ''फ़िल्म की ऐसी विशेषताओं और दर्शकों का उत्साह देख हमने 'ब्रह्मास्त्र' को अपनी कुल 400 स्क्रीन्स में से 320 स्क्रीन्स पर रिलीज़ करने का फ़ैसला लिया है.''

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फ़िल्म की कहानी

'ब्रह्मास्त्र' की कहानी की बात करें तो यह 'बुराई पर अच्छाई की जीत' की कहानी है. हमारे वेदों-पुराणों और अन्य धार्मिक ग्रन्थों में विभिन्न अस्त्रों और उनकी शक्तियों की गाथा प्राचीन काल से बताई जा रही है जिनमें 'ब्रह्मास्त्र'को सृष्टि का सर्व शक्तिशाली अस्त्र कहा जाता रहा है.
फ़िल्म की कहानी भी सारे अस्त्रों के देवता 'ब्रह्मास्त्र' और एक ऐसे युवा शिवा की है जो इस बात से अनभिज्ञ है कि उसके पास ब्रह्मास्त्र को जगाने की शक्ति है.
यूं तो शिवा एक डीजे है, लेकिन उसका अग्नि से कुछ ऐसा रिश्ता है कि आग उसे जला नहीं सकती. अग्नि चक्र में फँसकर भी वह अग्नि से पूरी तरह सुरक्षित रहता है क्योंकि वह स्वयं एक अग्निशस्त्र है.
उधर अंधकार की रानी जुनून ब्रह्मास्त्र को पाकर अपने नापाक इरादों का जाल बुनने में लगी है. फ़िल्म में जल अस्त्र, वायु अस्त्र, प्रभात अस्त्र, वानर अस्त्र और नंदी अस्त्र जैसे और भी कुछ अस्त्रों की व्याख्या विभिन्न रूपों में की गई है.
फ़िल्म में आलिया ईशा के किरदार में है जो शिवा से प्रेम करती है. ईशा नाम यहाँ इसीलिए रखा है क्योंकि यह पार्वती का पर्याय है. अमिताभ बच्चन गुरु की भूमिका में हैं जो ब्रह्मांश के प्रमुख हैं. उधर नागार्जुन अनीश बने हैं जो एक कलाकार होने के साथ-साथ ब्रह्मांश के सदस्य भी हैं. फ़िल्म में नागार्जुन की भूमिका बड़ी नहीं है. लेकिन उनके फ़िल्म से जुड़ने से दक्षिण में फ़िल्म को अच्छे दर्शक मिल सकते हैं.
कुल मिलाकर फ़िल्म की कहानी एक ऐसी काल्पनिक रोमांचक प्रेम गाथा है जिसका ताना-बाना सुपर नेचुरल पावर और साई-फ़ाई थ्रिलर के साथ बुना गया है.

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कितनी सफल होगी फ़िल्म

फ़िल्म की एडवांस बुकिंग चाहे 'ब्रह्मास्त्र' को लेकर बड़े सपने दिखा रही है, लेकिन इसकी सफलता पर इस सबके बावजूद कई प्रश्न चिह्न हैं. पहली आशंका तो यही है कि सुपर नैचुरल पावर की थीम पर बनी 'ब्रह्मास्त्र' क्या आज की पीढ़ी को पसंद आएगी.
फिर यदि मल्टीप्लेक्स और महानगरों के एक दर्शक वर्ग को यह फ़िल्म पसंद भी आ गई तो छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन सिनेमा के दर्शकों को यह विषय पसंद आएगा, इसकी संभावनाएं कम लगती है.
असल में फ़िल्म का बजट 400 करोड़ इतना ज़्यादा है कि पहले तो यह लागत निकाले, फिर फ़िल्म के थिएटर्स के किराये और फिर प्रचार का खर्च निकाले. इसके लिए फ़िल्म को बॉक्स ऑफ़िस पर 600 करोड़ का बिज़नेस करना पड़ेगा. दर्शक कितने भी सिनेमा में लौट आएं. पर अभी भी हालात ऐसे नहीं दिख रहे कि यह फ़िल्म इतनी कमाई कर सकेगी.
फ़िल्म ट्रेड से जुड़े और फ़िल्म ट्रेड जनरल 'कंप्लीट सिनेमा' के संपादक अतुल मोहन कहते हैं, 'ब्रह्मास्त्र' की सफलता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा फ़िल्म का बजट है. यदि यह फ़िल्म 100-150 करोड़ के बजट की होती तो फिर भी इसकी सफलता की आस हो सकती थी. अब यदि 200 करोड़ रुपए की आय यह फ़िल्म डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स से कर ले, फिर भी टिकट के माध्यम से 400 करोड़ एकत्र करना बहुत मुश्किल लगता है.''
अतुल यह भी कहते हैं, ''ब्रह्मास्त्र ओपनिंग तो अच्छी ले सकती है. लेकिन कोरोना काल में आई हिन्दी फ़िल्म 'सूर्यवंशी' के 26 करोड़ के पहले दिन के कलेक्शन के रिकॉर्ड से आगे जा पाएगी या नहीं यह देखना होगा.''
यूं हॉलीवुड की बहुत-सी फ़िल्में सुपर नैचुरल पावर के विषय के साथ बनकर अच्छी ख़ासी कमाई करके बड़े-बड़े रिकॉर्ड बनाती रही हैं. 'ब्रह्मास्त्र'को भी जिस भव्यता से बनाया गया है, वह फ़िल्म के प्रति एक आकर्षण तो पैदा करता है. इसलिए आठ हज़ार स्क्रीन्स पर लगकर दुनिया भर से यह फ़िल्म अच्छी सफलता पा जाये तो यह एक चमत्कार तो होगा ही. साथ ही भारतीय फ़िल्मों के 'बाहुबली' के बाद शुरू हुए नए युग को आगे भी बढ़ाएगा.
यूं हाल ही में ब्रिटेन, कनाडा और जर्मनी जैसे देशों में जब हमने हिन्दी सिने प्रेमियों से बात की तो पता लगा कि वहाँ इस फ़िल्म को लेकर कोई ख़ास उत्साह नहीं है.
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बायकॉट का असर भी देखना होगा

इधर 'ब्रह्मास्त्र' जिस तरह दर्शकों के एक वर्ग के निशाने पर आकर 'बायकॉट' की ओर बढ़ रही है, वह भी इस फ़िल्म पर कितना असर डालता है यह देखना होगा.
यूं पिछले कुछ समय से फ़िल्मों के बायकॉट का चलन लगातार बढ़ रहा है. आमिर ख़ान की 'लाल सिंह चड्ढा' इसका हालिया बड़ा निशाना रही. हालांकि पिछले कुछ समय के बायकॉट ज़्यादातर धार्मिक संगठनों द्वारा किए गए. लेकिन 'ब्रह्मास्त्र' तो भारत की प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक-धार्मिक शक्तियों पर ही केन्द्रित है.
फ़िल्म के निर्देशक अयान मुखर्जी स्वयं शिव भक्त हैं. वह कहते भी हैं कि इस फ़िल्म को बनाने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता द्वारा बचपन में सुनाई गयी धार्मिक कथाओं से ही मिली. लेकिन शिव भक्त और हिन्दू संगठन भी इस फ़िल्म का विरोध इसलिए कर रहे हैं कि रणबीर कपूर ने कुछ बरस पहले ख़ुद को 'बीफ़' खाने का शौक़ीन बताया था.
इसी के चलते रणबीर और आलिया जब उज्जैन में महाकाल के दर्शन के लिए गए तो उन्हें आंदोलनकारियों ने मंदिर में यह कहकर प्रवेश नहीं करने दिया कि जो गाय मांस खाता है, वह शिव मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता. जबकि अयान अकेले महाकाल के दरबार में फिल्म की सफलता की प्रार्थना कर आए हैं.
अयान के निर्देशन में यह तीसरी फ़िल्म है. दिलचस्प यह है कि इससे पूर्व की उनकी दोनों फ़िल्में 'वेक अप सिड' और 'ये जवानी है दीवानी' दोनों के निर्माता करण जौहर थे. वहाँ दोनों फ़िल्मों के नायक भी रणबीर कपूर थे.
इस फ़िल्म को अयान ने दिल से बनाया है और काफ़ी समय और मेहनत से भी. इस फ़िल्म को बनाने में उन्हें दस साल लग गए. सन 2011 में फ़िल्म को बनाने का फ़ैसला किया. उसके बाद इसकी पटकथा पर उन्होंने काफ़ी समय लिया. सन 2018 में फ़िल्म की शूटिंग शुरू हुई जो चार साल तक चलती रही.
फ़िल्म का बनने में ज़्यादा समय लगना भी कभी-कभी फ़िल्म के लिए घातक हो जाता है. उधर फ़िल्म की लंबाई भी 2 घंटे 48 मिनट यानी क़रीब-क़रीब तीन घंटे हो गई है. आज के दौर में इतनी लंबी फ़िल्म भी एक समस्या बन सकती है.
कहा तो यह भी जा रहा है कि अमिताभ बच्चन फ़िल्म की बार-बार शूटिंग और इसमें लंबा समय लगने से अयान से नाराज़ हो गए. इसलिए वह इस फ़िल्म के प्रमोशन में भी हिस्सा नहीं ले रहे. लेकिन अमिताभ ने अपनी यह नाराज़गी कहीं सार्वजनिक नहीं की है.
जहां तक फ़िल्म के संगीत की बात है तो वह सुपर हिट तो नहीं हुआ है. लेकिन प्रीतम के संगीत में अरिजित के गाये दो गीत-'देवा देवा' और 'केसरिया' पसंद किए जा रहे हैं.
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'ब्रह्मास्त्र'पर टिका है रणबीर का भविष्य

यूं तो इस फ़िल्म की सफलता से जहां हिन्दी फ़िल्म उद्योग के उजड़े चमन में बहार आ सकती है. वहाँ इसकी असफलता तो हिन्दी सिनेमा के साथ रणबीर कपूर के लिए भी ख़तरे की बड़ी घंटी होगी.
रणबीर कपूर निश्चय ही बहुत अच्छे कलाकार हैं. अपने शानदार अभिनय से उन्होंने कपूर ख़ानदान का चिराग भी रोशन रखा है. लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी फ़िल्मों की रिलीज़ में बड़ा अंतराल आ रहा है या उनकी फ़िल्में चल नहीं रहीं.
रणबीर की पिछली सफल फ़िल्म 'संजू' 2018 में आई थी. जबकि उससे पहले उनकी सफल फ़िल्म 'ये जवानी है दीवानी' 2013 में आई थी. उनकी कुछ समय पहले आई फ़िल्म 'शमशेरा' तो फ़्लॉप हुई ही.
'संजू' से पहले भी उनकी 'बेशर्म', 'रॉय', 'बॉम्बे वेल्वेट' और 'जग्गा जासूस' जैसी फ़िल्में फ़्लॉप होती रहीं. इसलिए यदि 'ब्रह्मास्त्र' भी नहीं चल सकी तो यह रणबीर जैसे प्रतिभाशाली अभिनेता के करियर के लिए बड़ा झटका होगा.
देखते हैं 'ब्रह्मास्त्र' हिन्दी सिनेमा की टूटती साँसों को ऑक्सीज़न देती है या उसे आईसीयू में ले जाती है.
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