शिल्पा राव को किसके साथ काम करने में डर लग रहा था

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'ख़ुदा जाने', 'बुल्लेया', 'कलंक', 'वो अजनबी', 'घूंघरू' जैसे ब्लॉकबस्टर गाने गाकर बॉलीवुड में अपना नाम बनाने वाली शिल्पा राव बचपन में सिंगर बनना नहीं चाहती थी.
बॉलीवुड में उनके 15 साल पूरे हो चुके हैं और अब वो सिंगिंग में एक बड़ा नाम हैं.
बीबीसी हिन्दी ने शिल्पा राव से ख़ास बातचीत में उनके जमशेदपुर से मुंबई तक के सफ़र को जाना है.
जमशेदपुर की रहने वाली शिल्पा कहती हैं कि उन्होंने अपने पैरेंट्स की वजह से म्यूज़िक सीखा. हरिहरन के साथ वो मुलाक़ात का ज़िक्र करते हुए कहती हैं, "उस वक्त मैं 13 साल की थी और मेरी मां के पास हरिहरन का फोन नंबर था. हम हरिहरन जी से मिले, उन्होंने कहा कि तुम्हारे अंदर पोटेंशियल है, फिर मैंने म्यूज़िक सीखा."
शिल्पा राव कहती हैं कि एक अच्छी बात ये रही कि उन्हें अपने आप से कुछ ख़ास उम्मीद नहीं थी. वो इसे समझाते हुए कहती हैं, "मुझे लगता है ये जीने का अच्छा तरीक़ा है. क्योंकि बच्चों को कभी-कभी ऐसा लगता है कि मुझे ये बनना है, वो बनना है. मुझे लगता है कि बच्चों को बच्चों की ही तरह रहना चाहिए. अगर आपके पास कोई महत्वाकांक्षा नहीं है तो कोई बात नहीं है. लेकिन, हरिहरन जी से मिलने के बाद ऐसा लगा कि लाइफ में काफी टाइमपास कर लिया, अब कुछ करना चाहिए."

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जिंगल से शुरू किया था सफ़र
शिल्पा राव ने मुंबई आने के बाद कुछ समय तक जिंगल पर काम किया था. मशहूर सिंगर-कंपोजर शंकर महादेवन के कहने पर वो जमशेदपुर से मुंबई आईं और यहां उन्होंने जिंगल से शुरुआत की.
शिल्पा कहती हैं, "वो (महादेवन) मुझे फिल्म का गाना दे सकते थे लेकिन उन्होंने कहा कि तुम अभी सीखो, आर्ट ऑफ रिकॉर्डिंग, उसमें जो मेहनत लगती है उसे समझो. इसके बाद उन्होंने मुझे पहला गाना सलाम-ए-इश्क के लिए दिया और इसी के साथ मिथुन ने मुझे एक गाना दिया. दोनों ही गाने एक ही महीने के आसपास आए और दर्शकों ने ख़ूब प्यार दिया."
शिल्पा को वैसे तो अपने सभी गानों के लिए प्यार मिला है लेकिन वो 'मनमर्ज़िया' को एक अलग सा गाना मानती हैं और कहती हैं कि भले ही पॉपुलर ज़ोन में नहीं आया लेकिन ये गाना काफ़ी अलग है.

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'सबसे सख़्त हैं इलैयाराजा'
क्या शिल्पा राव को किसी म्यूज़िक डायरेक्टर से डांट पड़ी है? इस सवाल के जवाब में बॉलीवुड के कई बड़े म्यूज़िक डायरेक्टर्स के साथ काम कर चुकी शिल्पा कहती हैं कि उन्हें इलैयाराजा सबसे सख़्त लगे.
शिल्पा बताती हैं, "वो बहुत सख़्त हैं. टास्कमास्टर हैं. हर गाने के लिए उनका एक विज़न है. उनके साथ काम करते वक्त मैं बहुत नर्वस थी. रिकॉर्डिंग के पहले मैं सो नहीं पाई थी. मैंने हज़ारों बार उस गाने की प्रैक्टिस की थी. वो गाना था 'मुड़ी, मुड़ी'."
शिल्पा राव को अपने ये तीन गाने सबसे कठिन लगते हैं:
- मुड़ी, मुड़ी, फिल्म- पा
- बुल्लेया, फिल्म- ये दिल है मुश्किल
- कलंक, फिल्म-कलंक
वहीं पसंदीदा गायकों की बात करें तो शिल्पा को मेहदी हसन काफ़ी पसंद हैं. शिल्पा कहती हैं कि उन्हें वो बचपन से सुन रही हैं और अब भी उन्हें सुनकर सीखने की कोशिश कर रही हैं. इसके अलावा वो नुसरत फ़तेह अली ख़ान और फ़रीदा ख़ानम को सुनना पसंद करती हैं.
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ऑटो ट्यून पर क्या है शिल्पा की राय?
आज के दौर में कई सारे एक्टर भी सिंगिंग में हाथ आजमा रहे हैं. ऑटो ट्यून पर भी ख़ूब चर्चा होती है.
इस पर शिल्पा राव कहती हैं, "मेरे हिसाब से म्यूज़िक सिर्फ ऑटो ट्यून नहीं है, वो बस एक हिस्सा है. गाने के कई पहलू होते हैं. सबसे पहला पहलू होता है कि इस गाने में वो कैरेक्टर दिख रहा है कि नहीं. एक्टर अपने गाने में वो किरदार लेकर आता है तो सही है. हॉलीवुड में भी कई ऐसे एक्टर हैं जो म्यूज़िक में हाथ आजमा रहे हैं और हमें कोई शिकायत नहीं है. ह्यू जैकमैन, एन हैथवे जैसे एक्टर ने खूब सारे म्यूजिकल दिए हैं. मैं सोचती हूं कि हमें खुले विचारों से ये सब चीज़ें देखनी चाहिए और गाने को गाने की तरह लेना चाहिए."
जो एक्टर गानों में अपना हाथ आजमाते हैं उनमें शिल्पा को अमिताभ बच्चन पसंद हैं.

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'केके के साथ काम करना सम्मान की बात'
बॉलीवुड के जानेमाने गायक कृष्णकुमार कुन्नथ (केके) का हाल ही में निधन हो गया. शिल्पा राव ने उनके साथ काम किया था. वो कहती हैं कि अब भी वो ये मान नहीं पाती हैं कि केके नहीं हैं.
शिल्पा का कहना है, ''90 के दशक के बच्चे होने के नाते हमारी बहुत सारी यादें हैं. वो जमशेदपुर जब आए थे तब मैं स्कूल में थी. हम सब कंसर्ट देखने गए थे. केके की आवाज़ अब भी बहुत ताज़ा है. जब मैं मुंबई आई और मैंने उनके साथ ख़ुदा जाने किया, वो मेरे लिए सम्मान की बात थी.''
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