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केके के लिए संगीतकार ने जब बदल दिए थे गाने के बोल
- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
हम रहें या ना रहें कल कल...याद आयेंगे ये पल..पल ये हैं प्यार के पल ..
बात दोस्ती की हो या प्यार की, ज़िंदगी के फ़लसफ़े को समेटे ये गाने एक समय जैसे एंथम बन गए थे. मसलन ये गाना .
यारों दोस्ती बड़ी ही हसीन है...
1999 में आई एल्बम 'पल' को गाने वाले इस सिंगर का नाम था केके. इस आवाज़ का मालिक कृष्णकुमार कुन्नथ यानी केके यूँ तो इससे पहले हज़ारों जिंगल गा चुके थे लेकिन 'याद आयेंगे ये पल' वाले गाने से उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बनाई. और अपनी रूहानी आवाज़ को वो एक अलग मकाम पर ले गए जब बिरह को उन्होंने अपनी गायकी में ढाला और गाया -'तड़प तड़प के इस दिल से आह निकलती रही'..
और कुछ इस तरह केके फ़िल्म संगीत की दुनिया में आए और छाए. कभी शाहरुख़ की रूमानियत बनकर (आँखों में तेरी अजब सी गज़ब सी अदाएँ हैं), कभी प्यार में सजदा करते रणवीर की आवाज़ बनकर (सजदे में यूँ ही झुकता हूँ , तुम पे आके रुकता हूँ) तो कभी प्यार का अल्हड़पन को आवाज़ दी ( दस बहाने करके ले गई दिल) तो कभी दिल की तड़प बनकर ('तड़प तड़प के).
अपने अंदर एक गायक को समेटे 53 साल के केके और भी बहुत कुछ थे - सिंगर, संगीतकार, फूडी, नेचर लवर, रोडी, वांडरर.. अपनी पहचान कुछ ऐसे बताते थे केके. दिल्ली में पले बढ़े केके बचपन से ही संगीत में दिलचस्पी रखते थे और गाते भी थे. संगीत की शिक्षा तो नहीं ली पर सुर-ताल कमाल का था.
महज़ 53 साल की उम्र में कोलकाता में अचानक उनका निधन हो गया है.
वो कोलकाता में एक कॉन्सर्ट में हिस्सा लेने गए थे. कार्यक्रम के दौरान ही उन्होंने तबीयत ख़राब होने की बात कही थी. कार्यक्रम से होटल लौटते ही उनको एक निजी अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है.
छोड़ आए हम वो गलियाँ
बीबीसी से बातचीत में केके ने बताया था, "बचपन से ही मुझे संगीत का शौक़ था, पुराने कैसेट प्लेयर में ख़ूब गाने सुना करता था. कॉलेज में दोस्तों के साथ मिलकर परफ़ॉर्म करता था. लेकिन जब शादी होने वाली थी तो किसी दोस्त ने मार्केटिंग में जॉब लगवा दी. पर काम करते हुए मुझे लगने लगा कि मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ. बस मुंबई चला गया. मैंने विज्ञापनों में जिंग्लस का काम शुरु किया और हज़ारों जिंग्ल्स गाए."
बस जिंगल के ज़रिए लोग उन्हें जानने लगे और फिर धीरे धीरे फ़िल्मों में आए. हालांकि फ़िल्मों में शुरुआत एक बड़े सोलो गाने से नहीं हुई थी. विज्ञापनों में काम करते करते केके को फ़िल्म माचिस में गाने का मौक़ा मिला- छोड़ आए हम वो गलियाँ.
वैसे कहने को तो दो ही लाइनें थीं पर विशाल भारद्वाज की फ़िल्म के बाद केके को एआर रहमान ने भी मौक़ा दिया फ़िल्म सपने में.
2014 में लंदन में दिए एक इंटरव्यू में केके ने बताया था, "फ़िल्म 'हम दिल दे चुके सनम' के लिए इस्माइल दरबार ने मुझे तड़प तड़प के इस दिल के लिए गाना गंवाया. आम तौर पर इस तरह के गाने के लिए संगीतकार किसी सीनियर गायक को ही लेते हैं. लेकिन इस्माइल ने मुझ पर भरोसा किया और मैंने भी दिल से गा दिया. वो गाना काफ़ी हिट हुआ. इसी साल मेरी एलबम भी रिलीज़ हुई. इसके गाने 'जैसे याद आएँगे वो पल' लोकप्रिय हो गए. आज भी कॉलेज वग़ैरह में जाता हूँ तो ये गाने बजते हैं."
हमराज़, दस, गैंगस्टर, बचना ए हसीनो, झंकार बीट्स - अलग अलग मिजाज़ वाले गानों को केके ने अपनी आवाज़ में ढाला. अपने समकालीन गायकों के बीच केके की अपनी अलग पहचान थी.
मकबूलियत अपनी जगह थी लेकिन केके के अपने कुछ उसूल भी थे. एक किस्सा सुनाते हुए केके ने मुझे बताया था, "एक बार एक नए संगीतकार ने मुझसे गाना गंवाया. अचानक मुझे लगा कि ये कैसे बोल हैं. मैं गाना छोड़ कर चला गया. फिर बाद में फ़ोन आया कि गाने के बोल बदल दिए हैं आप आ जाइए. संगीतकार की पहली फ़िल्म थी और प्रोड्यूसर बड़ा था, तो संगीतकार भी न नहीं कह पा रहा था. अब शायद लोगों को पता है कि मैं ऐसे गाने नहीं गाता."
केके उन गायकों में से थे जिनके गाने संगीत प्रेमी जानते थे, उनकी आवाज़ पहचानते थे लेकिन पीआर के इस दौर में उन्हें चेहरे से सब पहचानते हों इसकी कोई गारंटी नहीं थी.
वो ख़ुद को अच्छा सिंगर कहलाना ज़्यादा पसंद करते थे- ऐसा गायक जिसकी आवाज़ लोग पहचानें भले उसे पहचाने न पहचानें. इसकी एक झलक आप उनके सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पर देख सकते हैं. आख़िरी ट्वीट भी उन्होंने 2018 में किया था.
अच्छे गायक की उनकी अपनी परिभाषा थी. केके मानते थे कि अच्छा सिंगर वही है जो किसी संगीतकार के गाने को अपना बना के गा सके.
केके गाते भी थे और संगीत कम्पोज़ भी करते थे. अपन एल्बम हमसफ़र में केके ने संगीत दिया था. हिंदी के साथ-साथ केके ने तमिल, तेलूगु, मलायमल में गाया है. दरअसल शुरुआत उन्होंने तमिल फ़िल्मों से ही की थी.
1985 में पहली जिंगल गाने वाला ये गायक पिछले 37 सालों से सुरों के ज़रिए अपने फ़ैन्स के साथ जुड़ा रहा. शायद औरों के मुकाबले कम गाने गए पर उनके गाने सुन हमेशा लगा कि दिल से गाए.
संगीत निर्देशक केके को व्हाइस ऑफ़ प्यूरिटी कहते थे.
अपने गानों को लेकर केके ने बीबीसी से बातचीत में बताया था, "हो सकता है कि जो गाना मेरे पास आए वो गाना ख़ुशनुमा हो पर आपका मूड कुछ और हो..इसलिए मैं एक दिन में एक ही गाने की रिकॉर्डिंग रखता हूँ. जब तक गायक ख़ुद गाने को महसूस नहीं कर सकता तब तक सुनने वाले को कैसे अच्छा लगेगा."
अपने किसी भी दूसरे शो की तरह 31 मई 2022 की शाम भी केके कोलकाता में अपने फ़ैन्स के लिए उनका पसंदीदा गाना गा रहे थे जो उनकी आख़िरी शो बन गया - अजब इत्तेफ़ाक देखिए कि बोल वही थे-
हम रहें या ना रहें कल कल
याद आयेंगे ये पल
पल ये हैं प्यार के पल
चल आ मेरे संग चल
चल सोंचे क्या छोटी सी है ज़िन्दगी
कल मिल जाए तो होगी ख़ुशनसीबी
हम रहें या ना रहें याद आयेंगे ये पल
शायद इसीलिए गायिका हरशदीप कौर ने लिखा है- प्यार की आवाज़ हमेशा के लिए चली गई, द व्याइस ऑफ़ लव इज़ गोन.
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