कोरोना: महाराष्ट्र में लॉकडाउन लगा, तो फ़िल्म और टीवी इंडस्ट्री को कितना नुक़सान?

अक्षय कुमार

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    • Author, सुप्रिया सोगले
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, मुंबई से

अभी साल 2020 के लॉकडाउन की बुरी यादें ज़हन से गई भी नहीं थी कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर लोगों को डर के साए में रहने को मजबूर कर दिया है.

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक महाराष्ट्र है. बीते साल भी महाराष्ट्र में संक्रमितों की संख्या कई राज्यों की तुलना में काफ़ी अधिक थी.

मायानगरी मुंबई भी इससे अछूती नहीं है. बीते साल लगे लॉकडाउन से हुए भारी नुक़सान के बाद फ़िल्म इंडस्ट्री धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही थी. फ़िल्मों की शूटिंग दोबारा से शुरू हो सकी थी, लेकिन सब कुछ थम जाने का ख़तरा एक बार फिर मँडराने लगा है.

इस साल ये संक्रमण इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा है कि बॉलीवुड के कई कलाकार भी इससे बच नहीं पाए.

अक्षय कुमार, आमिर ख़ान, आलिया भट्ट, विक्की कौशल, कटरीना कैफ़, रणबीर कपूर, आर. माधवन, गोविंदा, कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर, संजय लीला भंसाली, सीमा पाहवा और कई कलाकार कोरोना संक्रमित हो गए.

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने फ़िलहाल 1 मई तक सभी गैर-ज़रूरी कामकाज स्थगित कर दिए हैं, जिससे मनोरंजन जगत पर सीधा असर पड़ रहा है.

विद्या बालन

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टीवी सीरियल की शूटिंग भी प्रभावित

साल 2020 के लॉकडाउन के बाद धीरे-धीरे फ़िल्मों की शूटिंग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP ) के साथ शुरू हुई थी. कई बड़े कलाकारों की फ़िल्मों की शूटिंग शुरू हुई थी. उम्मीद की जा रही थी कि साल 2021 बेहतर होगा, लेकिन फ़िलहाल इसकी उम्मीद काफ़ी कम हो गई है.

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए SOP में सख़्ती की गई है, जिससे रोज़मर्रा शूटिंग में कई बदलाव हुए हैं. इन सभी बदलावों और पाबंदियों का सबसे बुरा असर उन मज़दूरों पर पड़ा है, जो फ़िल्म इंडस्ट्री में दिहाड़ी पर काम करते हैं.

फ़ेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्प्लॉइज (FWICE) के प्रमुख बीएन तिवारी ने बीबीसी से इस संबंध में बात की.

वो कहते हैं, "सभी बड़ी फ़िल्मों की शूटिंग रुक गई है. काठियावाड़ी गंगूबाई फ़िल्म का एक दिन का काम बाक़ी था, लेकिन जब आलिया भट्ट कोरोना ग्रस्त हुईं, तो शूटिंग रुक गई. वैसे ही अक्षय कुमार की फ़िल्म 'रामसेतु' की शूटिंग रुक गई है. शाहरुख़ ख़ान की फ़िल्म 'पठान' को भी रोक दिया गया है. ब्रह्मास्त्र की शूटिंग रोकनी पड़ी है और यशराज बैनर के तले बन रही कई फ़िल्मों को रोकना पड़ा है."

वो कहते हैं, "आमतौर पर एक फ़िल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर 200 से 500 तक लोग रहते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में आदेश जारी किया गया है कि किसी भी फ़िल्म के सेट पर 50-100 से अधिक लोग नहीं होने चाहिए. सिर्फ़ सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 7 बजे से शाम के 7 बजे तक शूटिंग हो सकी, रात की शूटिंग बंद थी. सड़कों पर शूटिंग नहीं हो सकती थी, क्योंकि धारा 144 लगी हुई थी."

वो आगे कहते हैं, "एक डर का माहौल बना हुआ है. कहा जा रहा है कि इस बार कोरोना बहुत जल्दी फैल रहा है. अगर आर्टिस्ट काम नहीं भी करें, तो उनका काम चल सकता है, लेकिन जूनियर आर्टिस्ट अपने रिस्क पर काम पर जाता है और अगर पॉजिटिव हो गया तो उसे 7 से 17 दिन के लिए क्वारंटीन होना पड़ता है और उसे कुछ नहीं मिलता है."

कंगना रनौत

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बीएन तिवारी का कहना है कि 85% फ़िल्म इंडस्ट्री के मज़दूर बेरोज़गार हैं. जिसमें स्पॉट ब्वॉय से लेकर कई दूसरे अहम लोग शामिल हैं, जिनके बिना कोई शूट पूरा नहीं हो सकता है.

वो कहते हैं, "पहले जब 2-4 लोग कोरोना पॉजिटिव होते थे, तो फ़ेडरेशन उनकी दिहाड़ी दिलवाने में मदद करता था. निर्माता पैसे भी दे देते थे और अस्पताल का ख़र्च भी दे देते थे. लेकिन इन मज़दूरों को निर्माता तक सप्लायर पहुँचाते हैं. सप्लायर ही मज़दूर चुनते हैं, जिसमें निर्माता की कोई भागीदारी नहीं होती. अगर टेस्ट नेगेटिव है, फिर तो काम मिल सकता है लेकिन अगर टेस्ट पॉजिटिव आया, तो 17 दिन तक घर पर बैठना पड़ता है."

ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखा है, जिसमें फ़िल्म इंडस्ट्री के दिहाड़ी मज़दूरों के लिए राहत पैकेज का एलान करने की अपील की है.

वहीं सिने और टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (CINTAA )के कार्यकारी सदस्य अमित भेल का मानना है कि बहुत अधिक घबराने की ज़रूरत नहीं है. उनका मानना है कि जिस तेज़ी से लोग संक्रमित हो रहे हैं, उसी तेज़ी से वो ठीक भी हो रहे हैं.

वो कहते हैं, "इस बार हम बेहतर तैयार हैं. बुज़ुर्ग आर्टिस्ट वैक्सीन के दोनों शॉट ले चुके है और पिछले अनुभवों को देखते हुए पूरी सावधानी बरत रहे हैं."

सलमान ख़ान

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सिनेमाघर पर गिरी सबसे बड़ी गाज

2020 में लॉकडाउन के दौरान सबसे अधिक नुकसान सिनेमाघरों को उठाना पड़ा था. सात महीने बंद रहने के बार नवंबर में दीपावली वाले हफ़्ते में 50% दर्शक क्षमता के साथ सिनेमाघर खुले. लेकिन कोई बड़ी फ़िल्म रिलीज़ नहीं हुई.

इस साल के शुरु में जब कोरोना का कहर कम होता दिख रहा था और सरकार ने पूरी क्षमता के साथ सिनेमाघरों को खोलने का आदेश दे दिया था, तो कुछ बड़े बैनर ने अपनी फ़िल्मों की रिलीज़ की घोषणा कर दी थी, जिनमें रोहित शेट्टी और अक्षय कुमार की सूर्यवंशी, सलमान ख़ान की फ़िल्म राधे भी शामिल थीं.

लेकिन एक बार फिर इन फ़िल्मों की रिलीज़ को टाल दिया गया है.

सिनेमा ओनर एक्ज़िबीटर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (COEAI ) के अध्यक्ष नितिन दातर कहते हैं, "इस साल जिस तरह से कोरोना फ़ैल रहा है और थिएटर बंद हो रहे हैं, उससे थिएटर मालिक को बहुत नुक़सान झेलना पड़ रहा है और सरकार की तरफ़ से कोई मदद नहीं मिल रही. हम कोई सब्सिडी नहीं मांग रहे हैं. हम अपना हक़ मांग रहे हैं, जैसे प्रॉपर्टी टैक्स, लाइट बिल में राहत."

महाराष्ट्र डिवीज़न स्टेट के तहत अगर कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो प्रॉपर्टी टैक्स माफ़ किया जाता है या 50% कर दिया जाता है. वो कहते हैं, "इलेक्ट्रिसिटी डिमांड चार्जेज़ जो 14 हज़ार रुपए देने ही पड़ते हैं, भले थिएटर बंद क्यों ना हो, उसे माफ़ करना चाहिए. कई दूसरे राज्यों ने इसे लेकर राहत दी है और बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस पर टिपण्णी की है."

हंगामा

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वो आगे कहते हैं, "पिछले साल सभी फ़िल्में OTT पर रिलीज़ हुईं और एक्ज़िबीटर को कोई रिलीज़ नहीं मिली. जब थिएटर खुले, तब 50% दर्शक क्षमता के कारण बड़े निर्माता अपनी फ़िल्म रिलीज़ करने से हिचकिचा रहे थे और एक्ज़िबीटर्स नुक़सान झेल रहे थे. सब उम्मीद लगाए बैठे थे कि सरकार 100% दर्शक क्षमता के आदेश दे देगी, लेकिन कुछ राज्यों के अलावा ज़्यादातर में ऐसा नहीं हुआ."

वो कहते हैं, "आज सिंगल स्क्रीन ख़त्म हो रहे हैं. देश भर में 12 हज़ार सिनेमाघर हैं, जिनमें से 5700 ही बिज़नेस कर रहे हैं. महाराष्ट्र में 1200 सिनेमा हॉल में से सिर्फ़ 470 सिनेमाहॉल ही चल रहे हैं. और इस साल कोरोना के चलते और 30% सिनेमा हॉल नहीं खुल पाएँगे. मतलब 150 थिएटर बंद हो जाएँगे. अगर ऐसे ही सिनेमाघर बंद हो जाएँगे, तो इसका असर ना सिर्फ़ सरकार की आय पर पड़ेगा, बल्कि निर्माताओं को भी इसका नुक़सान उठाना पड़ेगा. ऐसे माहौल में कोई बड़ी फ़िल्म रिलीज़ नहीं होगी, तो नुक़सान हमें ही झेलना पड़ेगा."

नितिन दातर के मुताबिक़, फ़िल्म इंडस्ट्री को पिछले साल क़रीब 8000 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ है. महाराष्ट्र में ही अकेले 100 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ है. इस साल का नुकसान लॉकडाउन और सिनेमाघर खुलने के आँकड़ों पर निर्भर करेगा. अगर ऐसा ही हाल रहा, तो इस साल भी ऐसा ही नुक़सान देखने को मिल सकता है.

टाइगर श्रॉफ़

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निर्माताओं पर बोझ

क़रीब एक साल से सिनेमाघरों में बड़ी फ़िल्में रिलीज़ नहीं हुई है. कोरोना दौर में दर्शकों की कमी के कारण कई बड़ी फ़िल्मों ने अपनी रिलीज़ एक साल से रोकी हुई है.

कई बड़ी फ़िल्मों की शूटिंग शुरु हुई है, लेकिन निर्माताओं पर फ़िल्म में काम कर रहे हर व्यक्ति के कोरोना टेस्ट का ख़र्चा आ गया है. फ़िल्म सेट पर सब स्वस्थ और सुरक्षित रहें, इसलिए हेल्थ एंड सेफ़्टी ऑफ़िसर की टीम तैनात करनी पड़ रही है. सेट पर मौजूद हर शख़्स का बीमा किया जा रहा है. अगर कोई कोरोना पॉजिटिव होता है, तो निर्माता उस व्यक्ति के अस्पताल और दूसरे ख़र्चे संभालता है.

शूटिंग के दिन बढ़ते जा रहे हैं, जिससे निर्माताओं की लागत भी बढ़ती जा रही है.

टीवी सीरियल की शूटिंग में अगर कोई कोरोना पॉजिटिव होता है, तो तीन-चार दिन के लिए शूटिंग स्थगित कर दी जाती है और सबका कोरोना टेस्ट होता है जिसका ख़र्च निर्माता उठाते हैं.

प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ़ इंडिया के सीईओ नितिन तेज आहूजा ने निर्माताओं पर बढ़ते बोझ पर बीबीसी से कहा, "वास्तव में ये दौर बहुत चुनौतीपूर्ण है. एक साल के बाद हमें उम्मीद थी कि वैक्सीन रोल आउट के बाद बेहतर दिन आएँगे. फरवरी 2021के महीने में सिनेमाघरों को संचालित करने की अनुमति दी जा रही थी. जिसके चलते रिलीज़ की तारीख़ों की घोषणा की सुगबुगाहट थी. हम इससे ख़ुश थे कि फिर से दर्शकों से जुड़ाव होगा लेकिन..."

टीवी सीरियल

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हेल्थ एंड सेफ़्टी ऑफ़िसर की क्यों है ज़रूरत?

हाल फ़िलहाल में कई दिग्गज अभिनेता फ़िल्म शूटिंग के दौरान कोरोना संक्रमित हुए, जिससे उनकी फ़िल्मों की शूटिंग स्थगित हो गई, जिसका भार निर्माता पर पड़ा.

पिछले साल लॉकडाउन के बाद जब शूटिंग शुरू हुई, तब से निर्माताओं ने हेल्थ एंड सेफ़्टी ऑफ़िसर की टीम तैनात की, ताकि कोरोना संक्रमण से फ़िल्म में काम कर रहे लोग बच सकें.

अभिषेक बच्चन ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, "अभिनेता को बिना मास्क पहने कैमेरे के सामने काम करना पड़ता है, इसलिए ये बहुत ज़रूरी हो जाता है कि कैमरे के पीछे काम करने वाले सभी लोग प्रोटोकॉल का पालन करें."

नेटफ़्लिक्स, डिज़्नी हॉटस्टार और सोनी जैसे चैनल के साथ काम कर चुके हेल्थ एंड सेफ़्टी ऑफिसर विक्टोरियन डिसूज़ा ने बीबीसी को बताया कि वो किस तरह से फ़िल्म सेट्स को कोरोना मुक्त बनाने में मदद करते है.

वो कहते हैं, "हम सेट पर आने वाले हर व्यक्ति की RTPCR रिपोर्ट चेक करते हैं और प्रोटोकॉल का पालन करवाते हैं. शूटिंग के दिन जिन-जिन लोगों की सेट पर ज़रूरत होती है, जैसे अभिनेता, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर सभी के लिए बायो बबल बनाया जाता है और सेट को भी बायो बबल में तब्दील कर दिया जाता है. बायो-बबल एक सुरक्षित जगह है, जिसमें कोरोना संक्रमण का कोई ख़तरा नहीं होता. इससे व्यक्ति को बाहरी दुनिया से दूर रखा जाता है ताकि कोरोना संक्रमण से बचा जा सके."

विक्टोरियन डिसूज़ा के मुताबिक़, अगर शूटिंग में 100 -150 लोग होते हैं, तो उनकी टीम से क़रीब चार लोग सेट पर मौजूद रहते हैं. वहीं अगर सेट पर 200 से 250 लोग होते हैं, तो क़रीब आठ हेल्थ एंड सेफ़्टी अफसर की टीम को सेट पर मौजूद रहना पड़ता है.

इस बायो बबल को बनाने और संभालने में निर्माता की भारी लागत लग जाती है. महाराष्ट्र में लॉक डाउन को ध्यान में रखकर कई टीवी शो अपनी शूटिंग अब दूसरे राज्यों में कर रहे हैं.

फ़िल्म ट्रेड विश्लेषक अतुल मोहन मुश्किल दौर से गुज़र रही फ़िल्म इंडस्ट्री के बारे में कहते हैं, "सब कुछ हाथ से निकल गया है. फ़िल्म इंडस्ट्री अपने आप को सँभालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन दूसरी लहर ने सब पर विराम लगा दिया है. अब लॉकडाउन के कारण फिर से थिएटर बंद हैं. एक साल से सिनेमाघर बंद थे, तो क़रीब-क़रीब 4000 करोड़ का नुक़सान तो है ही."

आर बालकी

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सरकार से गुहार

नितिन दातर का मानना कि सिनेमाघर बहुत ही मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं. ऐसे में वो निर्माताओं को OTT रिलीज़ की मनाही नहीं कर सकते, क्योंकि फ़िल्में एक समय तक ही मनोरंजन करती हैं, ऐसे में वो अपना पूरा पैसा गँवा सकते है. OTT के ज़रिये वो थोड़ी बहुत कमाई कर सकते है.

कई निर्माता और एक्ज़िबीटर्स दिवालिया हो चुके है. फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए ये काफ़ी नाज़ुक वक़्त है.

वही प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ़ इंडिया के सीईओ नितिन तेज आहूजा सरकार से गुज़ारिश करते हुए कहते है कि सरकार इंडस्ट्री के लोगों के बारे में सोचे और राहत पैकेज की घोषणा करे.

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