बॉलीवुड: कलाकारों के सामने कमाई के लाले, घर चलाना हुआ मुश्किल

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- Author, इकबाल परवेज़
- पदनाम, फ़िल्म पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
अगर आप अपने टीवी पर कोई रियलिटी शो देख रहे हैं और उस शो से तालियों की गड़गड़ाहट या हंसी के ठहाकों की आवाज़ आ रही हैं, तो ये ना समझें कि सब कुछ पहले जैसा हो गया है.
तालियों और हंसी की ये आवाज़ बैकग्राउंड में डाली गई हैं. ठीक उसी तरह जैसे कि आईपीएल मैचों में आपको दर्शकों का शोर सुनाई देता है.
कोरोना से लड़ाई के बीच सूने पड़े बॉलीवुड में हलचल तो शुरू हो गई है मगर अब भी स्थिति पूरी तरह वैसी नहीं बनी है जैसी कोरोना के आने से पहले थी. फ़िल्म, टीवी के धारावाहिक, ऐड फ़िल्म्स, वेब सिऱीज और रियलिटी शो की शूटिंग शुरू हो चुकी है मगर वो ग़रीब और जूनियर आर्टिस्ट, जो इस इंडस्ट्री से जुड़े हैं और रोज़ कमाते-खाते हैं, अब तक परेशान हैं.
टीवी रियलिटी प्रोग्राम की बात करें तो इसमें पार्टिसिपेंट्स हैं, जज हैं, मेहमान कलाकार हैं, होस्ट हैं, सारे टेक्नीशियन भी हैं मगर नदारद हैं ऑडियंस की जगह बैठे जूनियर आर्टिस्ट.
कपिल शर्मा के शो में तो जूनियर आर्टिस्ट की जगह अर्चना पूरन सिंह के पीछे कटआउट लगे हैं जो दर्शकों की कमी को पूरा कर रहे हैं. नतीजा ये है कि शूटिंग शुरू होने के बावाजूद जूनियर आर्टिस्ट के लिए अब भी घर चलाना मुश्किल हो रहा है.

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कपिल शर्मा शो के अलावा अमिताभ बच्चन का शो कौन बनेगा करोड़पति, डांस रियलिटी शो इंडियाज़ बेस्ट डांसर, सलमान खान के बिग बॉस जैसे शोज़ की शूटिंग चल रही है.
इन सब शोज़ में 50 से लेकर 200 जूनियर आर्टिस्ट बतौर ऑडियंस नज़र आते थे मगर कोरोना के डर की वजह अब ऐसा नहीं हो रहा है.
रियालिटी शो के निर्माता पंकज बागरेचा ने बीबीसी को बताया "कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में 100 से 150 जूनियर आर्टिस्ट की ज़रूरत पड़ती है. डांस रियलिटी शो में 150 से 200 जूनियर आर्टिस्ट दर्शक बनकर बैठते हैं. वहीं बिग बॉस में 50 जूनियर आर्टिस्ट की ज़रूरत पड़ती है. मगर कोरोना की वजह से अब जूनियर आर्टिस्ट को शो का हिस्सा नहीं बनाया जा रहा है."

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काम शुरू होने के बाद भी परेशानी
लेकिन एक तरफ जूनियर आर्टिस्ट की तकलीफ़ें कम नहीं हो रही हैं तो दूसरी तरफ निर्माताओं को फायदा हो रहा है, क्योंकि जूनियर आर्टिस्ट पर खर्च होने वाले उनके पैसे बच रहे हैं.
पंकज बागरेचा ने बताया कि "क्राउड में बैठे एक जूनियर आर्टिस्ट का एक दिन का मेहनतना 700 से 800 रुपया होता है."
फ़िल्मों और धारावाहिकों में भीड़ के रूप में दिखने वाले जूनियर आर्टिस्ट एक दिन में क़रीब 1300 रुपये तक कमाते हैं.
महिला कलाकार संघ की समिति सदस्या लक्ष्मी गोस्वामी ने कहा कि "परेशानी अब भी बनी हुई है. शूटिंग के लिए 100 की जगह 20 से 25 ही जूनियर आर्टिस्ट की ज़रूरत निकल रही है".
जूनियर आर्टिस्ट नीता डी पटेल ने कहा कि "कुछ सप्लायर का काम शुरू हुआ है और कुछ का नहीं हुआ है. पहले 20 से 25 दिन काम मिलता था, अब उतना काम भी नहीं मिल रहा है."

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बॉलीवुड में 32 एसोसिएशन को मिलाकर बनी एक संस्था फ़ेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉई के प्रेसिडेंट बी एन तिवारी ने बताया कि जूनियर आर्टिस्ट को शूटिंग दिलाने के लिए वो लगातार प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए वो निर्माताओं से मुलाक़ातें कर रहे हैं.
बी एन तिवारी ने कहा "हम कोशिश कर रहे हैं कि जूनियर आर्टिस्ट को भी काम मिले क्योंकि ये दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग हैं. कोरोना ने इनकी भी कमर तोड़ी है. हम निर्माताओं से मिल रहे हैं, उनसे बात कर रहे हैं. फिलहाल कौन बनेगा करोड़पति में जूनियर आर्टिस्ट को भेजने की अनुमति मिल चुकी है."

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'लॉकडाउन हट गया लेकिन काम नहीं है'
बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम करने वाली नीता डी कहती हैं, "हम अपने भाई के बेटे की शादी में गए थे. जो थोड़ा बहुत हम बचाते हैं वो शादी में खर्च हो गए. ऐसे में काम के बंद होने से हम तकलीफ़ में आ गए. हमारे लिए घर चलाना मुश्किल हो गया."
लक्ष्मी गोस्वामी कहती हैं, "अचानक हुए लॉकडाउन से हम परेशान हो गए. हम रोज़ कमाने वाले लोग हैं. ऐसे में जब हमारा काम बंद हुआ तो कमाई भी बंद हो गई. हमने इस दौरान काफ़ी तकलीफें उठाईं."
जूनियर आर्टिस्ट रंजीत सैनी ने बताया "हमने कुछ सामान खरीद रखा था EMI पर जिसकी वजह से बहुत बेइज़्ज़ती उठानी पड़ी. बैंक ने फोन करके बहुत परेशान किया. कमाई बंद होने से तकलीफ़ थी उपर से बैंक वाले परेशान कर रहे थे. वो समय एक बुरे सपने जैसा है."
बेनडिक्टा डिसूज़ा के मुताबिक़ "हमारी स्थिति भूखे मरने जैसी हो जाती. मेरे पति एक कंपनी में काम करते हैं जहां से आधी तनख़्वाह आ जाती थी. जैसे तैसे करके उन्हीं थोड़े पैसों से हमने वो दिन गुज़ारे हैं."
बॉलीवुड में छाए इस अंधेरे में आर्टिस्ट सप्लाई करने वाले कई आर्टिस्ट कोऑर्डिनेटर की भी हालात ख़राब है. आर्टिस्ट कोऑर्डिनेटर मंसूर हुसैन के मुताबिक़ "जब हम इन आर्टिस्ट को काम पर भेजते हैं तब हमें पैसे मिलते हैं. ऐसे में जब काम बंद हुआ तो हमारी कमाई भी बंद हो गई थी. बहुत बुरा समय था. हमारे पास बिल्कुल पैसे नहीं थे. हमने कई स्टार्स से संपर्क करने की कोशिश की ताकि हमारी कोई मदद हो सके मगर कोई मदद नहीं मिली. बहुत मुश्किलों से और अपने कुछ दोस्तों से उधार कर्ज़ लेकर वो बुरा समय काटा है."

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सितारों, बड़े बैनरों ने की मदद
सितारों के साथ मिलकर रंगीन परदों को खूबसूरत बनाने वाले इन जूनियर आर्टिस्ट की मदद के लिए इनकी फेडरेशन के साथ-साथ फ़िल्म स्टार्स और निर्माताओं ने हाथ बढ़ाया. सलमान ख़ान, यशराज फ़िल्म्स और नेटफ्लिक्स जैसे कई बैनर भी मदद के लिए सामने आए.
रंजीत सैनी ने कहा कि "सलमान ख़ान ने मेरे अकाउंट में 3,000 रुपये ट्रांसफर किये थे. उनके अलावा कुछ और निर्माताओं ने भी मदद की थी". लक्ष्मी गोस्वामी ने बताया कि "स्टार्स और निर्माताओं के साथ कुछ सप्लायर ने भी अपनी हैसियत के मुताबिक़ जूनियर आर्टिस्ट की मदद की."
इतनी बड़ी इंडस्ट्री में ज़रूरतमंदों तक मदद पहुंचाना भी आसान नहीं था. फ़ेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज ने इसके लिए काफी मेहनत की क्योंकि लॉकडाउन में डेटा इकठ्ठा करना और मदद पहुंचना आसान नहीं था. उस समय सभी संस्थाओं के सारे दफ्तर भी बंद थे.
फ़ेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज के प्रेजिडेंट बी एन तिवारी के मुताबिक़ "दफ्तरों के बंद होने के कारण डेटा निकालना मुश्किल था. फिर भी हमने 23,000 लोगों की डिटेल सितारों और निर्माताओं को भेजी ताकि उनकी मदद की जा सके."

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सितारों, बड़े बैनरों ने की मदद
बी एन तिवारी ने बताया, "सलमान ख़ान की तरफ से 23,000 लोगों के एकाउंट में 3,000 रुपये डाले गए. यानी सलमान ख़ान ने 6.90 करोड़ रुपये पहली किश्त में दिए. दूसरी किश्त में सलमान खान 1,500 रुपये के हिसाब से 23,000 लोगों को मदद दे रहे हैं. यशराज ने 5,000 रुपये के हिसाब से 1.5 करोड़ इन आर्टिस्टों में बांटे."
"अजय देवगन ने 51 लाख, रोहित शेट्टी ने 51 लाख, वरुण धवन ने 25 लाख, अनिल कपूर, अर्जुन कपूर, जान्हवी कपूर ने 22 लाख और निर्माता टी पी अग्रवाल ने 11 लाख रुपये दे कर मदद की. बॉलीवुड की प्रोड्यूसर गिल्ड एसोसिएशन और आईएफ़टीसी ने 1.87 करोड़ रुपये की सहायता की. नेटफ्लिक्स ने 5,000 रुपये के हिसाब से 6900 लोगों के एकाउंट में पैसे डाले. फ्लेम फ़िल्म प्रोडक्शन ने 4000 लोगों की सहायता राशन का पैकेट देकर की. कई निर्माताओं ने 500 रूपये के हिसाब से कुछ लोगों के एकाउंट में पैसे डाले."
"अमिताभ बच्चन, सोनी टीवी और कल्याण ज्वेलर्स ने मिलकर लोगों को राशन खरीदने के लिए 1,500 रुपये की क़ीमत के 1 लाख कूपन दिए हैं. 35,000 कूपन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए थे और बाक़ी रीजनल फिल्मों के मज़दूरों के लिए."
अदालत का दरवाज़ा खटखटना पड़ा
जब देश सरकार ने चरणबद्ध तराके से अनलॉक करना शुरू किया, तब फ़िल्म इंडस्ट्री भी खुलने लगी. शूटिंग तो शुरू हो गई लेकिन उम्रदराज़ लोगों को काम करने की इजाज़त नहीं थी.
ऐसे में फ़ेडरेशन को अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा और फिर जा कर अदालत से अनुमति मिली. बी एन तिवारी के मुताबिक़, "अदालत से अनुमति मिली तभी जाकर अमिताभ बच्चन ने कौन बनेगा करोड़पति की शूटिंग शुरू की."
बी एन तिवारी ने बताया कि "अभी क्राउड का काम कम है. हम प्रयास कर रहे हैं और चैनल के साथ साथ निर्माताओं से भी मिल रहे हैं ताकि इन्हें काम मिलना शुरू हो सके. काम के साथ-साथ हम आर्थिक सहायता दिलवाने के लिए भी कोशिश कर रहे हैं ताकि उनके नुकसान की कुछ भरपाई हो सके."
जूनियर आर्टिस्ट को भी उम्मीद है कि तकलीफे़ं धीरे-धीरे कम होंगी और उनके घरों में फिर रौनक लौटेगी.
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