पाकिस्तान में दिलीप कुमार और राज कपूर के घरों में म्यूज़ियम का रास्ता साफ़

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- Author, मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान
- पदनाम, बीबीसी उर्दू के लिए
पाकिस्तान सरकार ने पेशावर में भारतीय अभिनेताओं दिलीप कुमार और राज कपूर के पैतृक घरों को अपने नियंत्रण में ले लिया है और अब इन्हें उनके वास्तविक रूप में संरक्षित किया जाएगा.
हिंदी फ़िल्मों के दोनों जानेमाने कलाकारों की पैदाइश भी पेशावर की इन्हीं हवेलियों में हुई थी. हालांकि अब ये ख़स्ताहाल हैं.
ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह सूबे के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के निदेशक डॉक्टर अब्दुल समद ने बीबीसी को बताया है कि पेशावर के उपायुक्त ने उन्हें बताया है कि इन हवेलियों को अब पुरातत्व विभाग को सुपुर्द कर दिया गया है और उन्हें नियंत्रण में लेकर सील कर दिया गया है.
अधिकारी ने बताया कि अब इसके जीर्णोद्धार का काम शुरू होगा और इसमें पहला क़दम इसकी अनुमानित लागत को तय करना है.
ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह सूबे के पुरातत्व विभाग ने 2020 के सितंबर में इस संबंध में पेशावर के आयुक्त को एक पत्र भेज कहा था कि विभाग इन स्थानों को 'संरक्षित' घोषित करना चाहता है इसलिए इन हवेलियों को सरकारी क़ब्ज़े में ले लिया जाए.
तब एक अधिसूचना में कहा गया था कि दोनों कलाकारों के फ़िलहाल बंद पड़े घरों को संरक्षित कर उनमें संग्रहालय बनाया जाएगा जहां इन कलाकारों के अलावा, एक अन्य प्रमुख बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान से संबंधित वस्तुएं भी संरक्षित की जाएंगी.
विभाग का मानना है कि इससे सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.

दिलीप कुमार का घर और कपूर की हवेली
दिलीप कुमार का घर पेशावर के मशहूर और ऐतिहासिक क़िस्सा ख़्वानी बाज़ार के मोहल्ला ख़ुदादाद में है. तब का आवासीय इलाक़ा अब एक बड़े व्यापारिक केंद्र में तब्दील हो गया है.
दिलीप कुमार के नाम से मशहूर मोहम्मद यूसुफ़ ख़ान का जन्म 11 दिसंबर, 1922 को इसी घर में हुआ था. दिलीप कुमार साल 1930 में अपने परिवार के साथ बॉम्बे (अब मुंबई) चले गए थे.
1988 में जब दिलीप कुमार पाकिस्तान गए थे तो उन्होंने पेशावर का भी दौरा किया था और अपने पुराने घर जाकर उसके दरवाज़े को चूमा था और बचपन की यादों को लोगों से साझा किया था.

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संग्रहालयों की स्थापना का प्रस्ताव
कपूर हवेली पेशावर के दिलगरां इलाक़े में है. बॉलीवुड को कई सुपरस्टार देने वाले कपूर परिवार की एक पीढ़ी इस हवेली में पैदा हुई थी. ये हवेली 1918 से 1922 के बीच बनवाई गई थी. राज कपूर भी इसी हवेली में पैदा हुए थे. मुल्क के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया था.
हालांकि दोनों कलाकारों के घरों के बड़े हिस्से ढह गए हैं और उनके वर्तमान मालिकों ने इमारतों को गिराने और प्लाज़ा बनाने की कई बार कोशिश की है, लेकिन प्रशासन ने उसे रोक दिया.
सरकारी क़ब्ज़े में आने के बाद इन इमारतों की मूल स्थिति को बहाल किया जाएगा जिसके बाद यहां संग्रहालयों की स्थापना होगी. संग्रहालयों में दिलीप कुमार और कपूर परिवार से संबंधित चीज़ें, उनकी फ़िल्मों के रिकॉर्ड और यादगार वस्तुएं, साथ ही शाहरुख़ ख़ान से संबंधित वस्तुओं को सहेजा जाएगा.
हिंसा की चपेट में आने से पहले पेशावर संस्कृति और कला का केंद्र था. अब हालात बेहतर हुए हैं तो सरकार ने यहां की पारंपरिक संस्कृति को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया है और 100 साल से अधिक पुरानी इमारतों को संरक्षित किया जा रहा है.
पेशावर में ऐतिहासिक महत्व की 1800 इमारतें हैं और उन्हें चिन्हित करने की प्रक्रिया जारी है.
(ये कहानी इससे पहले बीबीसी हिन्दी पर 28 सितंबर 2020 को प्रकाशित हुई थी)
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