#AmrishPuri क्यों नहीं चाहते थे कि उनका बेटा बॉलीवुड में आए

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बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड में एक्टिंग करने वाले अमरीश पुरी को उनके लंबे चौड़े क़द, दमदार आवाज़, डरावने गेटअप और ज़बरदस्त शख़्सियत के लिए जाना जाता है.
उनका एक डायलॉग मोगैंबो खुश हुआ आज भी लोगों की ज़ुबान पर छाया हुआ है.
सोशल मीडिया पर लोग अमरीश पुरी को उनकी पुण्यतिथि के मौके पर अपने-अपने अंदाज़ में श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
अमरीश पुरी का जन्म 22 जून, 1932 में लाहौर पाकिस्तान (तब अविभाजित भारत) में हुआ था. और उनका निधन 12 जनवरी, 2005 को हुआ था.
अभिनेता अमरीश पुरी के बेटे राजीव पुरी ने बीबीसी की सहयोगी मधु पाल से खास बातचीत में उनसे जुड़ी यादों को साझा किया.
अदाकारी का असर
राजीव ने बताया कि पर्दे पर खलनायक के तमाम यादगार किरदार निभाने वाले अमरीश पुरी की अदाकारी का असर ऐसा था कि घर आने वाले दोस्त तक उनके पिता से डरते थे.

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राजीव ने कहा, "मैं और मेरा पूरा परिवार उन्हें कई सालों से थिएटर करते देख चुके थे. हमें पता था कि वो सिर्फ किरदार निभाते हैं थिएटर में. लेकिन मेरे दोस्त जब मेरे घर आया करते थे, तब वो मेरे पिता की मौजूदगी में हमेशा सहमे हुए रहते थे. लगातार मिलने के बाद वो उन्हें बेहतर तरीके से समझने लगे और धीरे-धीरे उनका डर ख़त्म हो गया."
'हिम्मती इंसान'
परदे पर कठोर दिखने वाले अमरीश पुरी क्या निजी ज़िन्दगी में भी ऐसे ही थे?
बकौल राजीव, "नहीं, मेरे पिता कठोर नहीं थे. वो एक हिम्मती इंसान थे. वो एक पारिवारिक आदमी थे. उन्हें अनुशासन में रहना पसंद था. उन्हें हर काम सही तरीके से करना पसंद था."

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राजीव के मुताबिक अमरीश पुरी ने उन पर कभी अपनी मर्जी नहीं थोपी.
राजीवने बताया, "उस वक्त बॉलीवुड की स्थिति अच्छी नहीं थी तो उन्होंने मुझे कहा कि यहां मत आओ और जो अच्छा लगता है वो करो. तब मैं मर्चेंट नेवी में गया."
'देर से मिली पहचान'
अमरीश पुरी ने 30 सालों से भी ज़्यादा समय तक हिंदी फिल्मों में काम किया.
उन्होंने ज्यादातर खलनायक की भूमिकाएं ही निभाईं. नकारात्मक भूमिकाओं को वो इस ढंग से निभाते थे कि हिंदी फिल्मों में 'बुरे आदमी' का पर्याय बन गए.

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राजीव पुरी बताते हैं, "पापा को 40 साल की उम्र में फ़िल्मों में पहचान मिली. उनके जैसे किरदार और जिस तरह से वो अपने किरदार के चहरे बदलते थे वो अब तक कोई नहीं कर पाया हैं. आज के दौर में एक खलनायक के तौर पर किसी में इस तरह के एक्सपेरिमेंट करने की हिम्मत नहीं हैं."
पसंदीदा फ़िल्में
अमरीश पुरी ने 'नसीब', 'विधाता', 'हीरो', 'अंधा कानून', 'अर्ध सत्य', 'हम पांच' और 'ग़दर' जैसी फिल्मों में बतौर खलनायक ऐसी छाप छोड़ी कि फ़िल्म प्रेमियों के मन में उनके नाम से ही ख़ौफ़ पैदा हो जाता था.

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साल 1987 में फ़िल्म 'मिस्टर इंडिया' में उनका किरदार 'मोगैम्बो' बेहद मशहूर हुआ. फ़िल्म का संवाद 'मोगैम्बो खुश हुआ', आज भी लोगों के ज़ेहन में बरक़रार है.
उनकी फ़िल्मों को याद कर राजीव ने बताया," मुझे अपने पापा की आठ फ़िल्में बेहद पसंद हैं. 'विरासत', 'घातक' ,'कोयला', 'त्रिदेव', 'विश्वात्मा', 'मिस्टर इंडिया', 'ग़दर' और 'नागिन'. फ़िल्म 'नागिन' में उन्होंने तांत्रिक का ऐसा किरदार निभाया जिसे मैं आज तक भुला नहीं पाया हूँ."

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पोता फ़िल्मों में
अमरीश पुरी के बेटे राजीव पुरी तो फ़िल्मों में नहीं आए लेकिन उनके पोते फ़िल्मों से जुड़े हुए हैं.
राजीव ने बताया कि उनका बेटा हर्षवर्धन पुरी यशराज फ़िल्म्स में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहा है.
उन्होंने अब तक तीन फ़िल्मों 'इश्कज़ादे', 'शुद्ध देशी रोमांस' और 'दावते इश्क़' में कैमरे के पीछे रहकर काम किया हैं.
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