देश के मुद्दों पर कितना बोलते हैं बॉलीवुड सितारे

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- Author, सूर्यांशी पांडेय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'सत्या' में 'शूल' का अक़्स ढूंढने निकलेंगे तो मनोज बाजपेयी आपको 'मिसिंग' नज़र आएंगे क्योंकि फ़िल्मों में अपने किरदार में गुम हो जाने के लिए मशहूर हैं मनोज बाजपेयी.
बॉलीवुड के बुद्धिजीवी कलाकारों की सूची में मनोज बाजपेयी का नाम भी शामिल किया जाता है, लेकिन देश के गंभीर मुद्दों पर क्या यही बुद्धिजीवी कलाकार अपना पक्ष रखने पर यक़ीन करता है?
आजकल आम आदमी से लेकर नामचीन चेहरों के पास एक ऐसा हथियार है जिसका प्रयोग कर वह देश के तमाम मुद्दों पर अपनी राय देने से कतराते नहीं.
यह हथियार है सोशल मीडिया. इस पर कई कलाकार अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने के लिए मशहूर हैं तो कई यहां भी चुप्पी साधने में अपनी समझदारी समझते हैं. तो मनोज बाजपेयी इन दोनों में से किस श्रेणी में आते हैं?
दरअसल, मनोज बाजपेयी लेकर आ रहे हैं फ़िल्म 'गली गुलियां' जिसके लेखक और निर्देशक हैं दिपेश जैन. कहानी एक मानसिक रूप से विक्षिप्त शख़्स की है.
इस फ़िल्म के बारे में बीबीसी से ख़ास बातचीत करने के दौरान मनोज बाजपेयी ने ऐसे ही कुछ तीखे सवालों का सामना किया.
लेकिन सबसे पहले उन कलाकारों की बात जो 'किसी से नहीं डरते' इस कैटेगरी में आते हैं.
1. अनुराग कश्यप

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सोशल मीडिया में आलोचना का ज़िक्र हो और अनुराग कश्यप का नाम ना आए, ऐसा हो नहीं सकता. अनुराग कश्यप अपने ट्वीट्स के ज़रिए अपने विचार रखने के लिए जाने जाते हैं.
साल 2016 में जब करण जौहर की फ़िल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' में पाकिस्तानी कलाकार फ़वाद ख़ान के काम करने के कारण देश में पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने की बात शुरू हुई थी तो अनुराग कश्यप ने कुछ इस अंदाज़ में अपना पक्ष रखा था.
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यही नहीं वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बोलने से भी नहीं कतराते. हाल में उनके द्वारा किया गया ये ट्वीट उसकी बानगी है.
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2. अभिजीत भट्टाचार्य

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बॉलीवुड सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य हिंदुत्व पर अपने विचारों को लगातार ट्विटर पर व्यक्त करते रहते थे.
उनके अकाउंट को ट्विटर ने बैन भी कर दिया था जिसके बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने ट्विटर पर हिंदुओं के ख़िलाफ़ और सरकार के ख़िलाफ़ बोलने वालों को एंटी-मोदी, एंटी-हिंदू करार दिया था.
3. स्वरा भास्कर

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हाल ही में 13 अगस्त को जेएनयू के छात्र उमर ख़ालिद पर हुए हमले के बाद बॉलीवुड कलाकार स्वरा भास्कर ने ट्वीट करते हुए देश की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए थे.
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यही नहीं वह देश के कई मुद्दों पर अपनी राय रखती आई हैं.
4. कंगना रनौत

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बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद पर खुल कर बोलने वाली कंगना रनौत भी अपने विचार रखने से परहेज़ नहीं करतीं. हाल ही में सदगुरु के साथ हुई उनकी एक ख़ास बातचीत को लोगों ने सोशल मिडिया पर शेयर किया जिसमें कंगना उदारवादियों की आलोचना करती नज़र आ रही हैं.
हालांकि इसके बाद लोगों ने ट्विटर पर उन्हें 'दक्षिणपंथियों की स्वरा भास्कर' बता डाला.
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मनोज बाजपेयी का नज़रिया

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बीबीसी से ख़ास बातचीत के दौरान जब मनोज बाजपेयी से ये पूछा गया कि क्या वे सोशल मीडिया पर देश के मसलों पर अपने विचार रखने में विश्वास रखते हैं?
इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''मैं ऐसा कलाकार हूं जो कभी चुप नहीं रहता. हां यह बात अलग है कि मेरे शब्दों में आप विरोध का स्वर नहीं देखेंगे, बल्कि मेरे विचार उनके ज़रिए व्यक्त होता पाएंगे.''
20 अगस्त को बिहार के भोजपुर ज़िले के बिहियां शहर में एक महिला को 16 साल के लड़के की हत्या के शक़ में भीड़ ने अपना शिकार बनाया. उसको नग्न अवस्था में गांव में घुमाया गया. इस अत्याचार पर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए मनोज बाजपेयी ने ये ट्वीट किया-

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सवाल अपने विचार व्यक्त करने का नहीं है, सवाल है मुद्दों के प्रति संवेदनशील होने का.
कंगना रनौत ने अपनी फ़िल्म 'मेंटल है क्या' के प्रमोशन के दौरान कहा था कि देश के संवदेनशील मुद्दों पर अगर नामचीन चेहरे ख़ामोश रहेंगे तो 'सिलेब्रिटी स्टेटस' का फ़ायदा ही क्या?
जिनकी एक आवाज़ से लोग इकट्ठा हो सकते हैं उन्हें सामने आने में किसी तरह का संकोच नहीं करना चाहिए.
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