अब तो फ़िल्म का नाम बंबई रखने से डरता हूं: अनुभव सिन्हा

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फ़िल्म 'पद्मावती' को लेकर जारी विवाद के बीच फ़िल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा ने कहा है कि आज की तारीख़ में फिल्ममेकर फ़िल्म का नाम तक रखने के पहले सतर्क रहते हैं.
उन्हें फिक्र होती है कि कहीं इसे लेकर कोई विवाद न शुरू हो जाए.
बीबीसी हिंदी रेडियो के साप्ताहिक कार्यक्रम इंडिया बोल में शामिल हुए अनुभव सिन्हा ने कहा, "मैं एक फ़िल्म लिख रहा हूं. मैं उसका नाम बंबई रखना चाहता हूं. अब मुझे पक्का पता नहीं है कि उसका कितना विरोध होगा. एक फ़िल्म में विवाद के लिए करण जौहर को माफ़ी मांगनी पड़ी थी. "
उन्होंने आगे कहा, "हम तो इस कदर डरे होते हैं कि पता नहीं हम नाम रख पाएंगे या नहीं. हमने नाम रजिस्टर करा लिया. अब मैं किससे पूछने जाऊं. मुझे क्या पता कौन नाराज़ हो जाएगा."
फ़िल्मकार संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'पद्मावती' को लेकर कई संगठन विरोध जता रहे हैं. उनका कहना है कि फ़िल्म में ऐतिहासिक तथ्यों को सही तरीके से नहीं दिखाया गया है.
कई राजनीतिक दलों ने भी इस विरोध का समर्थन किया है और फिलाहल फ़िल्म की रिलीज़ टल गई है.

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'विवाद समझ से परे'
शाहरुख ख़ान अभिनीत 'रा वन' और माधुरी दीक्षित अभिनीत 'गुलाब गैंग' जैसी चर्चित फ़िल्मों के निर्देशक अनुभव सिन्हा ने कहा कि उन्हें फ़िल्म 'पद्मावती' को लेकर जारी विवाद का कारण समझ नहीं आता.
उन्होंने कहा कि काफी पैसा और वक़्त लगाने के बाद कोई नहीं चाहता कि उनकी फ़िल्म प्रदर्शित नहीं हो.
अनुभव सिन्हा ने कहा, "किसी ने फ़िल्म नहीं देखी. किसी ने स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी और हम बात एक ऐसे आदमी के बारे में कर रहे हैं जिनको इसी सरकार ने पद्मश्री दी है. वे पढ़े लिखे जिम्मेदार आदमी हैं. उन्होंने एक फ़िल्म बनाई है तो उस पर रिसर्च किया है."
उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली और उनकी टीम ने भी ये ध्यान रखा होगा कि इससे किसी की भावनाएं आहत न हों.
सिन्हा ने कहा, "हो सकता है कि उनसे थोड़ी रिसर्च छूट गई तो फ़िल्म की शूटिंग शुरू होते ही इतना बड़ा विवाद हुआ. उनके साथ बदसलूकी की गई. जाहिर है कि पूरी टीम बैठी होगी कि हम ऐसा कुछ न कर दें कि कोई आहत हो जाए "
अनुभव सिन्हा कहते हैं कि हमेशा साफ़ सुथरी और जिम्मेदारी के साथ फ़िल्म बनाने वाले भंसाली अगर कहते हैं कि उनकी फ़िल्म में कुछ भी आहत करने वाला नहीं है तो उनका सम्मान करना चाहिए.

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करणी सेना से नहीं सरकार से शिकायत
अनुभव सिन्हा ये भी कहते हैं कि उन्हें करणी सेना के विरोध से भी कोई विरोध नहीं है. लेकिन वो सरकार के रूख पर सवाल उठाते हैं.
उन्होंने बीबीसी इंडिया बोल में कहा, " करणी सेना को भी अभिव्यक्ति की पूरी आज़ादी है. समस्याएं दो हैं. एक विरोध व्यक्त करने का तरीका. दूसरा विरोध के तरीके पर सरकार का जो रवैया है वो उपयुक्त नहीं लगता है."
अनुभव सिन्हा ने कहा कि दोनों पक्षों के पास विरोध का अधिकार है और इसकी व्यवस्था भी है.

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उन्होंने कहा, "संविधान में व्यवस्था है. एक संस्था है जिसका नाम है सेंसर बोर्ड ऑफ फ़िल्म सर्टिफिकेशन. उसमें समाज के अलग-अलग वर्ग से बहुत सारे लोग होते हैं. वो फिल्म देखते हैं. वो बताते हैं कि ये आपत्तिजनक बात है. अगर फ़िल्ममेकर को कोई आपत्ति होती है तो वो उससे ऊपर अपील में जाते हैं. इससे संतुष्टि न होने पर वो कोर्ट जा सकते हैं. "
वो ये भी कहते हैं कि अगर समाज के किसी वर्ग को भी फ़िल्म से विरोध है तो वो भी कोर्ट के पास जा सकते हैं.
अनुभव सिन्हा मानते हैं कि ऐसे विवादों से फ़िल्म को लेकर चर्चा बढ़ती है और उसे लेकर उत्सुकता में भी इज़ाफा होता है.
हालांकि वो ये भी कहते हैं कि विवाद को चर्चा हासिल करने के लिए आमंत्रित नहीं करता. उनकी ये राय करणी सेना के लिए भी है.
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