पाकिस्तान में फ़िल्म रिलीज़ नहीं होने से सलमान ख़ान को कितना नुकसान?

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- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
'एक था टाइगर', 'बजरंगी भाईजान' और अब 'ट्यूब लाइट' में सलमान ख़ान का निर्देशन करने वाले कबीर ख़ान से सलमान ने उनकी पहली फ़िल्म 'क़ाबुल एक्सप्रेस' में 'चरमपंथी' का किरदार निभाने की इच्छा जताई थी.
बीबीसी से रूबरू हुए निर्देशक कबीर ख़ान ने बताया कि क्यों सलमान ख़ान उनकी पहली फ़िल्म का हिस्सा न बन सके, बावजूद इसके कि सलमान ख़ान ने ख़ुद काम करने की इच्छा जताई थी.
अपनी पहली फ़िल्म 'क़ाबुल एक्सप्रेस' की स्क्रिप्ट लेकर कबीर ख़ान दर-दर भटक रहे थे, तब एक दोस्त ने सलमान ख़ान से उनकी मुलाकात करवाई थी, जहाँ उन्होंने सलमान के साथ अपने अफ़ग़ान देश में किए काम और स्क्रिप्ट की चर्चा की.

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सलमान का सवाल
कबीर ख़ान के स्क्रिप्ट से प्रभावित सलमान ख़ान ने उस फ़िल्म के अहम 'चरमपंथी' का किरदार निभाने की इच्छा कबीर के सामने रखी.
उस दौरान नए निर्देशक कबीर ख़ान को सलमान ख़ान की ये कहना मज़ाक लगा और उन्होंने वो फ़िल्म बिना सलमान खान के ही बना दी.
कुछ सालों बाद जब सलमान ख़ान से दुबारा मुलाकात हुई तो सलमान खान ने कबीर से पूछा, 'आप वापस नहीं आए?'
और तब जाकर कबीर ख़ान को ये समझ में आया कि सलमान ख़ान ने मज़ाक में फ़िल्म के लिए हामी नहीं भरी थी.

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अफ़ग़ानिस्तान में अनुभव
हालांकि सलमान ख़ान ने जिस 'चरमपंथी' का किरदार करने की इच्छा जताई थी वो कबीर ख़ान की निजी ज़िंदगी में घटी एक घटना से प्रेरित था.
एक 'चरमपंथी' के साथ अफ़ग़ानिस्तान में हुई मुलाकात के अनुभव शेयर करते हुए कबीर ने बताया कि सितंबर, 11 की घटना के बाद 2001 में वो अफ़ग़ानिस्तान में जंग की डॉक्यूमेंट्री पर काम करने वहाँ पहुंचे.
अफ़ग़ानियों की मदद से वो पंजशीर वैली में हिरासत में रखे गए अल-क़ायदा और तालिबान के चरमपंथियों से मुलाकात करने गए थे.
कबीर ख़ान दो दिन उन आतंकवादियों के बीच रहे. उन्हीं के बीच ख़ालिद नामक पाकिस्तानी चरमपंथी ने जाते समय कबीर ख़ान से सैटेलाइट फ़ोन मांगा.

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कटरीना का इकरार
हिचकिचाते हुए कबीर ख़ान ने अंततः फ़ोन दिया और उस चरमपंथी ने अपने घर चार साल बाद बात की और जब उस चरमपंथी की छोटी बेटी फ़ोन पर आई तो छह फ़ीट तीन इंच का वो शख़्स फूट-फूट कर रोने लगा.
इस घटना ने कबीर के दिल में जगह बना ली और उन्होंने तय किया की वो फ़िल्म बनाएंगे और उन्होंने 2006 में 'क़ाबुल एक्सप्रेस' बनाई.
सलमान ख़ान के साथ ख़ास रिश्ता रखने वाले कबीर ख़ान ने माना कि उनकी फ़िल्म 'न्यूयॉर्क' में कटरीना कैफ़ को राज़ी करने के पीछे भी सलमान ख़ान का ही हाथ था.
कबीर कहते हैं, "जब मैं आदित्य चोपड़ा के कहने पर कटरीना के पास फ़िल्म लेकर गया तो वो कहानी सुनकर दंग और परेशान हो उठीं. क्यूंकि कटरीना की वो पहली यशराज फ़िल्म थी. उन्हें फ़िल्म से नाच गाने की उम्मीद थी. वो न्यूयॉर्क फ़िल्म में नहीं था. उस दौरान कटरीना सलमान ख़ान को डेट कर रही थीं. उदास कटरीना ने जब सलमान ख़ान से ये ज़िक्र किया तो सलमान ख़ान ने पूछा कि डायरेक्टर कौन है? जब सलमान ख़ान को पता चला कि मैं डायरेक्शन कर रहा हूँ तो उन्होंने कटरीना से कहा, आँखें बंद करके पिक्चर साइन कर लो."

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पाकिस्तान में 'ट्यूबलाइट' नहीं
दो देशों की राजनीति को समझते हुए फ़िल्म बनाने वाले कबीर ख़ान ने साफ़ किया कि वो बिना राजनीति के फ़िल्म नहीं बना पाएंगे.
कबीर कहते हैं, "ट्यूबलाइट फ़िल्म भले ही 62 का दौर बता रही हो पर इसमें जो मुद्दे उठाए गए है वो आज भी अहम हैं. ये फ़िल्म ताक़तवर बयान देती है."
उनकी पिछली फ़िल्म 'बजरंगी भाईजान' ने पाकिस्तान में बहुत अच्छा कारोबार किया था, पर 'ट्यूबलाइट' पाकिस्तान में रिलीज़ नहीं हो पाएगी.
इस नुकसान पर टिप्पणी करते हुए कबीर कहते हैं, "नुकसान तो है पर सलमान ख़ान की फ़िल्म की कमाई पर इसका बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा. पर क्या कर सकते हैं. राजनीति के हाथों हम कष्ट झेलते हैं."
कारण बताते हुए कबीर ख़ान आगे कहते हैं, "लोग ये तय नहीं करते कि कौन सी फ़िल्म रिलीज़ होगी पर राजनीति तय करती है. लोग गैर क़ानूनी तरीके से फ़िल्म देख ही लेंगे. राजनीति हमेशा बीच में आ जाती है. क्या कर सकते हैं."
फ़िल्म 'ट्यूबलाइट' में सलमान खान, सोहैल खान और चीनी अभिनेत्री ज़ू ज़ू अहम भूमिका में दिखेंगी.
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