जिन्होंने बनाया जयाप्रदा को स्टार

इमेज स्रोत, Sargam
- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
जया प्रदा को हिंदी फ़िल्मों में लॉन्च करने का क्रेडिट अगर किसी को जाता है तो उस हस्ती का नाम है के. विश्वनाथ. वही के. विश्वनाथ जिन्हें इस बार का दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड मिला है.
आप कह सकते हैं कि बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट सोनू निगम को भी इन्होंने ही मौका दिया था.
के. विश्वनाथ ने तेलुगु में एक फ़िल्म बनाई थी जिसे राकेश रोशन के साथ सलाह मशवरे के बाद उन्होंने 1982 में हिंदी में 'कामचोर' के नाम से बनाया.

इमेज स्रोत, Getty Images
इसी फिल्म में सोनू निगम बतौर बाल कलाकार, राकेश रोशन के भतीजे के रोल में नज़र आए थे.
यही वो फ़िल्म थी जिसने असल रूप में राकेश रोशन को बतौर निर्माता नाम बनाने का मौका दिया. और बाद में राकेश रोशन को डायरेक्शन की राह पर डाला.
ईश्वर, कामचोर जैसी फ़िल्में बनाईं

इमेज स्रोत, filmshistorypic
70 के दशक में ये वो दौर था जब ऋषि कपूर रफ़ू चक्कर, खेल खेल में जैसी फ़िल्मों में बार-बार 'अर्बन लवरबॉय' के ही रोल में नज़र आ रहे थे.
1979 में निर्देशक के. विश्वनाथ की फ़िल्म 'सरगम' ने ऋषि कपूर को एक अलग अंदाज़ में दिखाया.
वहीं बोल-सुन न सकने वाली एक नृतकी के रूप में जया प्रदा को अपनी पहली हिंदी फ़िल्म से ही पहचान बनाने का मौका मिला.

इमेज स्रोत, Mahesh babu
कमल हसन और भरतनाट्यम
बहुतों के लिए के. विश्वनाथ का नाम शायद अंजाना होगा लेकिन वे तेलुगु फ़िल्म इंडस्ट्री के दिग्गजों में से एक हैं और हिंदी में कई बेहतरीन फ़िल्में दी हैं.

इमेज स्रोत, k vishwanath
के विश्वनाथ की बेहतरीन फ़िल्मों में से एक रही सागरा संगमम जिसमें भारतनाट्यम में माहिर कमल हसन को अपनी एक्टिंग ही नहीं बल्कि क्लासिकल डांस में अपने हुनर को दिखाने का मौका मिला.
फ़िल्म का सीन है जिसमें कमल हसन एक नई डांसर के बारे में ख़राब रिव्यू छापते हैं. जब वो तमतमाती हुई कमल हसन के दफ़्तर आती है तो कमल हसन वहीं चप्पल उतार उसे भरतनाट्यम, कथक, कुचुपुड़ी करके दिखाते हैं और आप देखते रह जाते हैं.
ऑस्कर के लिए भेजा गया

इमेज स्रोत, Ikamalhaasan
1986 में आई के. विश्वनाथ की तेलुगु फ़िल्म स्वाति मुथयम को ऑस्कर के लिए भेजा गया था जिसमें कमल हसन ने काम किया था.
एक ऑटिस्टिक,यतीम युवक और एक विधवा की प्रेम कहानी वाली इस फ़िल्म को हिंदी में उन्होंने 'ईश्वर' नाम से बनाया.
इसमें अनिल कपूर ने काम किया था. इसके लिए उन्हें बेस्ट स्टोरी का फ़िल्मफेयर अवॉर्ड मिला.
कोई 50 फ़िल्में बना चुके के. विश्नवाथ पाँच बार नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड जीत चुके हैं और 1992 में उन्हें पदमश्री भी मिला. उनकी कई फ़िल्में अंततराष्ट्रीय समाराहों में गईं.
दक्षिण में उनका कितना नाम है उसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कमल हसन, पवन कल्याण, महेश बाबू जैसे साउथ के बड़े बड़े सितारों ने उनके योगदान को याद करते हुए संदेश लिखे हैं.
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार पहली दफ़ा 1969 में दिया गया था. पहला पुरस्कार मिला था देविका रानी को. के विश्वनाथ ये अवॉर्ड जीतने वाले 48वें व्यक्ति हैं. पिछले साल ये पुरस्कार मनोज कुमार को मिला था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












