|
अंतरिम बजट यानी अंतरिम इश्तेहार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरिम बजट यूं तो 2009-10 का अंतिम हिसाब किताब नहीं है, पर जो हिसाब किताब अंतरिम वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पेश किया है, उससे साफ होता है कि उनकी दिलचस्पी सारी उपलब्धियों को अपने सरकार के खाते में डालने की है. साथ ही तमाम समस्याओं के लिए उन्होंने वैश्विक मंदी को ज़िम्मेदार ठहराया है. असाधारण संकट के समय जिन असाधारण उपायों की जरुरत होती है, वे तो इस अंतरिम दस्तावेज में सिरे से गायब ही हैं, बल्कि जो हिसाब किताब 2009-10 के अंतरिम बजट में लगाए गए हैं, वे अगली सरकार के लिए विकट सिरदर्द साबित होंगे. अंतरिम बजट को दरअसल बजट दस्तावेज कहना अनुचित होगा, मोटे तौर पर सरकार का इश्तेहार है. मोटे तौर पर प्रणब मुखर्जी ने पिछले कई सालों से चल रहे 'ड्रीम रन' का श्रेय यूपीए सरकार को दिया है. राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना को बतौर उपलब्धि के तौर पर गिनाया है. तमाम मसलों पर अंतरिम असमर्थता जताते हुए प्रणब मुखर्जी यह बताना नहीं भूले कि 2009-10 में इस योजना के लिए 30 हज़ार 100 करोड़ रुपए रखे जाने का प्रस्ताव है. यह भी बताना प्रणब मुखर्जी नहीं भूले कि देश का रक्षा रक्षा बजट एक लाख 41 हज़ार 703 करोड़ रुपए कर दिया गया है. रक्षा बजट भी राजनीतिक तौर पर पर्याप्त लाभांश प्रदायक मसला है. इसलिए इस मसले पर घोषणा में कोई अंतरिम असमर्थता आड़े नहीं आयी. अंतरिम बजट के दस्तावेज से साफ है कि राष्ट्रीय रोज़गार योजना चुनावी प्रचार में मुख्य भूमिका निभाएगी. विरोधाभासों का दस्तावेज ख़ैर मूल मसला यह है कि अंतरिम बजट अपने आप में विरोधाभासों का दस्तावेज नज़र आता है. अपने बजट भाषण में प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि 2009-10 में स्थिति और ख़राब होने वाली है.
यह बात प्रणब मुखर्जी ना भी बताते, तो भी साफ है कि आने वाले साल में स्थिति और खराब होने वाली है. ऐसी सूरत में यह उम्मीद करना कि 2009-10 में 2008-09 के मुकाबले ज्यादा करों का संग्रह होगा, अति आशावादी होना ही है. पर प्रणब मुखर्जी इस संबंध में अति आशावादी हो रहे हैं. अंतरिम बजट के आंकड़ों के हिसाब से 2008-09 में कुल कर संग्रह छह लाख 87 हज़ार 715 करोड़ रुपए का होने की उम्मीद की गई थी. पर पुनरीक्षित आंकड़ों के हिसाब से यह रकम छह लाख 27 हज़ार 949 करोड़ रुपए से ज़्यादा नहीं हो पाएगी. पर यही अंतरिम बजट बताता है कि अगले साल यानी 2009-10 में कर संग्रह छह लाख 71 हज़ार 293 करोड़ रुपए यानी करीब सात प्रतिशत ज्यादा होगा. भविष्य की तस्वीर अगर अर्थव्यवस्था की, उद्योग जगत की स्थिति अगले साल खऱाब होने वाली है, जैसा कि वित्त मंत्री कह रहे हैं, तो किस तरह से कर संग्रह सात प्रतिशत बढ़ेगा, यह सवाल आने वाली सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा. अंतरिम आंकड़ों के मुताबिक 2008-09 के दौरान कॉरपोरेट टैक्स करीब दो लाख 22 हज़ार करोड़ रुपए रहेंगे, पर उम्मीद की गई है कि 2009-10 के दौरान यह बढ़कर दो लाख 44 हज़ार 200 करोड़ रुपए हो जाएगा. मंदी से जूझते कॉरपोरेट सेक्टर में कर में दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कैसे हो जाएगी, इस सवाल का कोई जवाब इस बजट में नहीं है. पर आंकड़े साफ करते हैं कि भविष्य की तस्वीर क्या है? भविष्य की तस्वीर यह है कि सरकार के राजकोषीय घाटे में विकट बढ़ोत्तरी होगी. फरवरी, 2008 के बजट में उम्मीद लगायी गई थी कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का करीब 2.5 प्रतिशत रहेगा, पर वास्तव में इसके छह प्रतिशत रहने के आसार हैं. 2009-10 में इसके करीब 5.5 प्रतिशत रहने के आसार हैं. यूं अपने भाषण में वित्त मंत्री ने असाधारण संकट के लिए असाधारण प्रयासों की बात कही थी, पर व्यवहार में ऐसा कुछ देखने में नहीं आया है. व्यवहार में यही देखने में आया है कि अंतरिम बजट सरकार के चुनावी प्रचार का प्रारंभिक दस्तावेज होकर रह गया है, जिसके कुछ आंकड़े आने वाली सरकार के लिए परेशानी का कारण बनेंग. |
इससे जुड़ी ख़बरें अंतरिम बजट पर मिलीजुली प्रतिक्रिया16 फ़रवरी, 2009 | कारोबार प्रधानमंत्री ने अंतरिम बजट को दी मंज़ूरी15 फ़रवरी, 2009 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||