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रविवार, 11 जनवरी, 2009 को 07:09 GMT तक के समाचार
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सत्यम के नए बोर्ड सदस्यों की घोषणा
सत्यम के कर्मचारी
सत्यम के घोटाले से सबसे अधिक निराश और नाराज़ कंपनी के कर्मचारी हैं

भारत सरकार ने निजी कंपनी सत्यम कंप्यूटर्स में अनियमितताओं के ख़िलाफ कार्रवाई के बाद कंपनी को चलाने के लिए नए बोर्ड की घोषणा की है.

सत्यम के नए बोर्ड के लिए सरकार ने फिलहाल तीन नामों की घोषणा की है और कहा है कि नए बोर्ड की बैठक 24 घंटों में होगी जिसमें कंपनी के लिए आगे की रणनीति तैयार की जाएगी.

नए बोर्ड में किरन कार्निक, एचडीएफसी बैंक के पूर्व प्रमुख दीपक पारेख और सेबी के पूर्व सदस्य वी अच्युतन को शामिल किया गया है.

 सत्यम एक जानी मानी अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी है और इसमें बेहतरीन लोग काम करते हैं. कंपनी और उसके कर्मचारियों के हित में जो होगा वो सरकार करेगी
प्रेम गुप्ता, कारपोरेट मामलों के मंत्री

कारपोरेट मामलों के मंत्री प्रेम गुप्ता ने दिल्ली में संवाददाताओं के समक्ष इन नामों की घोषणा करते हुए कहा कि सत्यम जैसी बड़ी कंपनी को आगे चलाने के लिए जो संभव होगा किया जाएगा.

उनका कहना था, '' सत्यम एक जानी मानी अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी है और इसमें बेहतरीन लोग काम करते हैं. कंपनी और उसके कर्मचारियों के हित में जो होगा वो सरकार करेगी. ''

उन्होंने शेयरधारकों के बारे में या सरकार की ओर से सत्यम के लिए किसी वित्तीय पैकेज के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया और कहा कि इस बारे में फ़ैसला नया बोर्ड करेगी.

गुप्ता का कहना था कि चेयरमैन के बारे में भी बोर्ड की बैठक में तय किया जाएगा.

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार बोर्ड में और सदस्यों को शामिल किया जाएगा तो उनका कहना था, '' हम दस सदस्य नियुक्त कर सकते हैं लेकिन अभी फिलहाल तीन सदस्य नियुक्त किए गए हैं आगे ज़रुरत पड़ी तो कर सकते हैं.''

हफ्ते भर पहले सत्यम कंपनी में बड़ी धोखाधड़ी का पता चला था.

कंपनी के पूर्व चेयरमैन राजू ने कंपनी के खातों में हेराफेरी करने और अधिक फ़ायदा दिखाने की बात स्वीकार करते हुए न केवल पद छोड़ा बल्कि ये भी कहा कि वो किसी भी सज़ा के लिए तैयार हैं.

इसके बाद शेयरधारकों और कंपनी के कर्मचारियों में हताशा और निराशा का माहौल है.

कंपनी में नक़दी का संकट है और एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी में इस तरह की धोखाधड़ी उजागर होने का असर भारत के सूचना प्रौद्योगिकी जगत पर भी पड़ रहा है.

इन सभी के मद्देनज़र सरकार ने कंपनी के मामले पर पूरी नज़र रखी है और नए बोर्ड का गठन किया है ताकि इसे आगे चलाया जा सके.

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