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सत्यम के ख़िलाफ़ कई मोर्चे खुले | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया की अग्रणी आउटसोर्सिंग कंपनी सत्यम की मुसीबतें बढ़ती जा रही है. अमरीका में उसके ख़िलाफ़ धोखाधड़ी के दो मुक़दमे दायर किए गए हैं. इस बीच दुनिया भर की नियामक संस्थाएँ सत्यम कंप्यूटर्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही हैं. न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी के शेयरों की ख़रीद फ़रोख़्त पर रोक लगा दी गई है. भारत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंच (बीएसई) के मुख्य सूचकांक सेंसेक्स की तीस कंपनियों से इसे बाहर कर दिया गया है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ़्टी से इसे पहले ही बाहर किया जा चुका है. भारतीय शेयर बाज़ारों की नियामक संस्था सेक्युरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेबी) ने कंपनी के ख़िलाफ़ जाँच शुरु कर दी है. इसके जाँचकर्ता कंपनी के हैदराबाद स्थित मुख्यालय में पहुँच गए हैं. इस बीच कंपनी की बैलेंस शीट में मुनाफ़े को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने और पाँच हज़ार करोड़ रूपए से अधिक के फ़र्ज़ीवाड़े को स्वीकार करते हुए चेयरमैन पद से इस्तीफ़ा देने वाले रामालिंगा राजू भूमिगत हो गए हैं. हालाँकि उनके वकील का कहना है कि वो हैदराबाद में ही हैं और मीडिया से बात नहीं करना चाहते. वकील के मुताबिक किसी भी क़ानूनी कार्रवाई के लिए वो अदालत के समक्ष आने को तैयार हैं. अमरीका में मुक़दमा न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज से सत्यम के शेयर ख़रीदने वाले दो शेयरधारकों ने कंपनी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया है.
दोनों ने अपनी याचिकाओं में कहा है कि कंपनी और इसके अधिकारियों ने ग़लत जानकारी देकर अमरीकी क़ानूनों का उल्लंघन किया है. सत्यम के शेयर न्यूयॉर्क शेयर बाज़ार में फ़र्ज़ीवाड़े की ख़बर के बाद 90 फ़ीसदी तक गिर चुके हैं. सेबी ने अपने बयान में कहा है कि वह सत्यम के शेयरों की बिक्री और पूरे शेयर कारोबार की जाँच कर रही है. भारत के कंपनी मामलो के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता का कहना है, "सत्यम में जो कुछ हुआ उससे हम चिंतित हैं. सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि इस तरह की घटना दोबारा ना हो." परिणाम अब ये डर सता रहा है कि इस घोटाले के असर से विदशी संस्थागत निवेशक भारत से बाहर का रुख़ कर सकते हैं.
यही नहीं सत्यम को अब अपने ग्राहकों से भी हाथ धोना पड़ सकता है. प्राइस वाटर हाउस कूपर्स और मारुति जैसी कंपनियाँ सत्यम के ग्राहक हैं. बीपीओ कंपनी फॉरेस्टर के भारत प्रमुख सुदीन आप्टे ने पुणे में कहा, "इसका असर भारतीय आउटसोर्सिंग उद्योग पर पड़ेगा. ग्राहक अब अपना काम भारत से कराने पर दोबारा सोच सकते हैं." मेरिल लिंच ने पहले ही कंपनी से अपने आपको अलग कर लिया है. उसे संभावित विलय प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए कहा गया था. कंपनी के 50 हज़ार से ज़्यादा कर्मचारियों का भविष्य भी ख़तरे में है क्योंकि फ़र्ज़ीवाड़ा सामने आने के बाद कंपनी के पास कर्मचारियों का वेतन जारी रखने लायक पैसे भी नहीं हैं. हालाँकि सत्यम ने कहा है कि दिसंबर माह की तनख़्वाह में कोई दिक्कत नहीं होगी. सत्यम की ख़स्ताहाली का असर वर्ष 2010 और 2014 में होने वाले फुटबॉल विश्व कप पर भी पड़ सकता है. फीफा ने सत्यम को दोनों विश्व कप के लिए अपना आईटी साझीदार बनाया था. |
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