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'एक करोड़ नौकरियां कम हो जाएंगी' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के निर्यात संगठनों के महासंघ (एफआईईओ) के अनुसार इस वर्ष मार्च महीने तक निर्यात क्षेत्र में कम से कम एक करोड़ नौकरियां कम हो जाएंगी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय सामान के खरीदार कम हो गए हैं. एफआईईओ के अनुसार 1929 के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की हालत पहली बार इतनी ख़राब हुई है जहां भारतीय सामान को कोई पूछ भी नहीं रहा है. संवाद समिति प्रेट्र के अनुसार महासंघ के अध्यक्ष एक सक्तिवेल ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, '' मार्च महीने तक कम से कम एक करोड़ नौकरियां ख़त्म हो जाएंगी.'' उल्लेखनीय है कि निर्यात क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 20 प्रतिशत है लेकिन इसमें कई लोगों को रोज़गार मिलता है. पिछले साल के पहले छह महीनों में निर्यात में 30.9 प्रतिशत की ज़बर्दस्त वृद्धि दर दर्ज की गई ती लेकिन अक्तूबर के बाद यह मात्र 12 प्रतिशत रह गई. पिछले पांच वर्षों में पहली बार निर्यात दर में इतनी कमी देखी गई है.. इतना ही नहीं नवंबर के महीने में यह और कम हो गई. सक्तिवेल का कहना था, '' मैं कह सकता हूं कि दिसंबर में भी वृद्धि दर नकारात्मक रहेगी और अगले कुछ महीनों में भी सुधार नहीं होगा. '' उनका कहना था कि सरकार ने अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए पिछले हफ्ते जो क़दम उठाए हैं उसमें निर्यात क्षेत्र के लिए कोई क़दम नहीं है. पिछले साल निर्यात का लक्ष्य 200 अरब डॉलर का था जबकि अब उम्मीद है कि यह 180 अरब डॉलर तक ही हो सकेगा. दिसंबर के आकड़े अभी आने बाकी हैं. भारत की वस्तुओं का सबसे बड़ा बाज़ार यूरोप और उत्तरी अमरीका के देश हैं लेकिन दोनों ही इलाक़े मंदी की मार झेल रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें महँगाई रोकने के उपायों की घोषणा31 मार्च, 2008 | कारोबार चीन में अरबों डॉलर के पैकेज की घोषणा09 नवंबर, 2008 | कारोबार सेंसेक्स ने 10 हज़ार का स्तर पार किया10 नवंबर, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ार में ज़बर्दस्त गिरावट11 नवंबर, 2008 | कारोबार 'तीन महीनों के दौरान 65 हज़ार नौकरियाँ गईं'15 दिसंबर, 2008 | कारोबार टोयोटा को हो सकता है घाटा22 दिसंबर, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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