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मंगलवार, 16 दिसंबर, 2008 को 03:49 GMT तक के समाचार
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धोखाधड़ी की चपेट में कई बड़े बैंक
बर्नार्ड मैडॉफ़ के न्यूयॉर्क कार्यालय में जमा हुए निवेशक
इस धोखाधड़ी को न पकड़ पाने के लिए अमरीका के वित्तीय नियामकों की निंदा भी हो रही है
अब पता चला है कि अमरीका में हुए 50 अरब डॉलर की धोखाधड़ी की चपेट में दुनिया के कई बड़े देश आए हैं.

जिन देशों पर इसका असर पड़ा है उनमें ब्रिटेन के एचएसबीसी और आरबीएस, स्पेन का सैनटैंडर और फ़्रांस का बीएनपी शामिल है.

इसके अलावा जो कंपनियाँ और संस्थाएँ इससे प्रभावित हुई हैं उसमें प्रख्यात फ़िल्म निर्माता स्टीवन स्पीलबर्ग की सामाजिक संस्था वंडरकिंडर फ़ाउंडेशन शामिल है.

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को अमरीकी अधिकारियों ने बर्नार्ड मैडॉफ़ को गिरफ़्तार किया था.

नैसडैक स्टॉक मार्केट के पूर्व प्रमुख बर्नार्ड ने इस धोखाधड़ी की योजना बनाई थी जिसे अपने क़िस्म की अब तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी बताया जा रहा है.

अमरीका के कई वित्तीय प्रबंधकों ने इस धोखाधड़ी को न पकड़ पाने के लिए अमरीकी नियामकों की निंदा की है.

बड़ा नुक़सान

दुनिया भर के बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने बर्नार्ड मैडॉफ़ के साथ निवेश किया था, लेकिन अभी उनमें से सभी ने बताया नहीं है कि उनको होने वाला नुक़सान कितना है.

जिनको बड़ा नुक़सान हुआ है उनमें स्पेन का बैंक सैनटैंडर है जिसके पास ब्रिटेन के बैंक एबे, एलायंस एंड लीस्टर और ब्रैडफ़र्ड एंड बिंगली का स्वामित्व भी है.

इस बैंक को 1.7 करोड़ यूरो यानी 2.3 करोड़ डॉलर का सीधा नुक़सान उठाना पड़ रहा है जबकि इन बैंकों को ग्राहकों ने बर्नार्ड मैडॉफ़ के साथ कोई 2.3 करोड़ यूरो का निवेश सीधे कर रखा है.

ब्रिटेन के बैंक एचएसबीसी का निवेश कुल एक अरब डॉलर का आँका जा रहा है जो इस धोखाधड़ी से प्रभावित हो सकता है.

वहीं रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड को 60.1 करोड़ डॉलर का नुक़सान होने का अनुमान है.

उधर फ़्रांसिसी बैंक नैटिक्सिस ने कहा है कि उसे 45 करोड़ यूरो का नुक़सान हो सकता है.

और ऐसा नहीं है कि इस धोखाधड़ी के शिकार सिर्फ़ बैंक हुए हैं. इससे पामबीच कंट्री क्लब के कई सदस्यों को बड़ा नुक़सान हुआ है क्योंकि उनमें बहुत से बर्नार्ड मैडॉफ़ के निवेशक थे.

हालांकि कुछ लोगों का तर्क है कि हालांकि धोखाधड़ी हुई है लेकिन इसमें निवेश करने वाले लोगों को बाक़ी जगहों की तुलना में ज़्यादा लाभ भी मिला है.

धोखाधड़ी

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि बर्नार्ड मैडॉफ़ ने एक बड़े धोखाधड़ी की योजना बनाई.

बर्नार्ड मैडॉफ़
बर्नार्ड मैडॉफ़ फ़िलहाल ज़मानत पर रिहा किए गए हैं

बर्नार्ड मैडॉफ़ नैसडैक स्टॉक मार्केट में एक 'हेज फंड' और निवेशकों के लिए सलाहकार कंपनी चलाते थे.

मैडोफ़ का घोटाला करने का तरीक़ा काफ़ी दिलचस्प बताया जा रहा है, वे निवेशकों को जल्दी ही भुगतान करना शुरू कर देते थे लेकिन यह भुगतान लाभ की रकम से नहीं, बल्कि दूसरे निवेशकों के पैसे से किया जाता था.

घाटा उठाने वाले निजी निवेशकों में न्यूजर्सी के एक सीनेटर, स्टीवन स्पीलबर्ग और नोबेल पुरस्कार विजेता लेखिका एली विसेल भी शामिल हैं.

इस मामले में फंड मैनेजरों की भी ख़ासी आलोचना हो रही है कि उन्होंने बिना पूरी पड़ताल किए निवेशकों का पैसा ग़लत कंपनी में लगा दिया.

फ़िलहाल 70 वर्षीय बैंकर बर्नार्ड मैडॉफ़ को एक करोड़ डॉलर की ज़मानत पर रिहा तो कर दिया गया है लेकिन उनकी कंपनी और फंड पर एक न्यायाधीश को प्रशासक के तौर पर नियुक्त कर दिया गया है.

अदालत में दर्ज़ शिकायत के अनुसार गत बुधवार को बर्नार्ड मैडॉफ़ ने अपने कम से कम तीन कर्मचारियों को बताया था कि 25 ग्राहकों और 17.1 अरब डॉलर के निवेश वाला उनका हेज फंड व्यवसाय दरअसल एक धोखाधड़ी है.

उनका कहना था कि यह कंपनी बहुत पहले दिवालिया हो चुकी है.

अमरीकी क़ानूनविदों का कहना है कि यदि बर्नार्ड मैडॉफ़ को दोषी पाया गया तो उन्हें बीस साल तक की सज़ा और 50 लाख डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है.

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