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'भारत की परियोजनाओं में भ्रष्टाचार' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक का कहना है कि भारत में उनके समर्थन से चल रही पांच बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान उनमें ' बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार ' सामने आया है. करोड़ों डॉलरों की ये परियोजनाएं मलेरिया, एचआईवी/एड्स और टीबी से जुड़ी हुई हैं और कई परियोजनाएं 1997 से चल रही हैं. विश्व बैंक के प्रमुख रॉबर्ट ज़ोलिक का कहना था कि ' जांच में जो संकेत मिले हैं उससे व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी नज़र आती है जो स्वीकार्य योग्य नहीं है.' भारत सरकार का कहना है कि वो इस मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी. इस धोखाधड़ी के सबूत विश्व बैंक की हाल में रिलीज़ एक रिपोर्ट में दिए गए हैं. विश्व बैंक ने 2006 में विभिन्न देशों में उनके समर्थन से चल रही परियोजनाओं की समीक्षा रिपोर्ट निकालना शुरु किया था. इससे पहले 2005 में विश्व बैंक समर्थित एक कार्यक्रम में दो फार्मास्युटिकल कंपनियों को धोखाधड़ी का दोषी पाया गया था जिसके बाद बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं की समीक्षा का फ़ैसला किया गया था. जिन परियोजनाओं की विश्व बैंक ने समीक्षा की है उसमें एचआईवी एड्स से जुड़ी क़रीब 20 करोड़ डॉलर की योजना, क़रीब 12 करोड़ डॉलर की टीबी से जुड़ी योजना और तकरीबन 10 करोड़ डॉलर की मलेरिया परियोजना शामिल है. विश्व बैंक का कहना है कि अब वो भारत सरकार के साथ मिलकर आने वाले दिनों में अन्य परियोजनाओं में पारदर्शिता बरतने की पूरी कोशिश करेगी. विश्व बैंक के वर्तमान प्रमुख ज़ोलिक ने जुलाई महीने में संगठन के प्रमुख का पदभार संभाला था और कहा था कि परियोजनाओं में घपलेबाज़ी से निपटने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता का वो समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा ' इन समस्याओं को ठीक करना ही होगा. मैं इसके लिए प्रतिबद्ध हूं. मैंने भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम से भी बात की है और वो भी ऐसा ही सोचते हैं. ' उनका कहना था कि विश्व बैंक द्वारा की गई यह समीक्षा दिखाती है कि हमें अपनी परियोजनाओं से भ्रष्टाचार को हटाने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि इन परियोजनाओं में धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. उधर भारत के वित्त मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि इस मामले में संदिग्धों के ख़िलाफ़ क़ानून और नियमों के अनुसार जो कार्रवाई हो सकती है वो की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उन लोगों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें क्या है विश्व बैंक?20 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना उड़ीसा को विश्व बैंक की धमकी21 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना हर साल 10 खरब रुपए की रिश्वत!09 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना वुल्फोवित्ज़ की नियुक्ति पक्की31 मार्च, 2005 | पहला पन्ना क्या भारत कम भ्रष्ट है?28 अगस्त, 2002 | पहला पन्ना उच्च पदों पर भ्रष्टाचार23 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना भ्रष्टाचार पर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौता10 दिसंबर, 2003 | पहला पन्ना भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ समझौता होगा10 दिसंबर, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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