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रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरें घटाईं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय रिज़र्व बैंक ने शनिवार को कम अवधि की ब्याज दर यानी रेपो रेट में एक प्रतिशत की कटौती की. इसके अलावा रिवर्स रेपो रेट भी एक फ़ीसदी घटा दिया है. रिज़र्व बैंक ने नकद आरक्षी अनुपात यानी सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया है और ये 5.5 प्रतिशत के स्तर पर है. साथ ही एसएलआर की दरें भी जस की तस 24 प्रतिशत के स्तर पर हैं. रिज़र्व बैंक की नई दरें आठ दिसंबर से लागू होंगी. क़दम मंदी से निपटने के प्रयासों के तहत रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट को 7.50 प्रतिशत से घटाकर 6.50 प्रतिशत कर दिया है. रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है. आम आदमी को सस्ता कर्ज़ मुहैया कराने के लिए रिज़र्व बैंक ने रिवर्स रेपो रेट भी 6 फ़ीसदी से घटाकर 5 फ़ीसदी कर दिया है. उल्लेखनीय है कि वाणिज्यिक बैंक अपना पैसा रिज़र्व बैंक के ख़जाने में जमा करते हैं और इस पर रिज़र्व बैंक जो ब्याज़ देता है उसे रिवर्स रेपो दर कहा जाता है. रिज़र्व बैंक के गवर्नर डॉ डी सुब्बाराव का कहना है कि सिस्टम में पर्याप्त नकदी के बावजूद कर्ज़ की मांग में कुछ कमी आई है. उन्होंने कहा कि मांग बनाए रखने के लिए बैंकों को ब्याज़ दरों में कटौती करनी होगी. सुब्बाराव ने कहा कि महंगाई दर में अभी और कमी आएगी. उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीज़ल की कीमतों में कटौती का असर महंगाई दर पर साफ़ दिखेगा और 2008 के आखिरी तक महंगाई दर 7 प्रतिशत के नीचे आने की संभावना है. | इससे जुड़ी ख़बरें आरबीआई ने ब्याज दर घटाई01 नवंबर, 2008 | कारोबार रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट कम किया20 अक्तूबर, 2008 | कारोबार ब्याज दरों में मामूली वृद्धि25 अक्तूबर, 2005 | कारोबार भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो दर बढ़ाई24 जनवरी, 2006 | कारोबार 'भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिम से अलग'22 जनवरी, 2008 | कारोबार रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति का इंतज़ार28 अप्रैल, 2008 | कारोबार महँगाई सात साल के रिकॉर्ड स्तर पर13 जून, 2008 | कारोबार महँगाई पर क़ाबू पाने की कोशिश24 जून, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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