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महँगाई पर क़ाबू पाने की कोशिश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बढ़ती महँगाई को क़ाबू करने के लिए रिज़र्व बैंक ने एक बार फिर ब्याज़ दर बढ़ा दिए है. इससे आम लोगों के लिए कर्ज़ लेना अब और महँगा हो सकता है. भारतीय रिज़र्व बैंक ने मंगलवार देर शाम रेपो रेट और नकद आरक्षी अनुपात यानी सीआरआर में वृद्धि की घोषणा की. रेपो रेट और सीआरआर दोनों में आधा प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है. रेपो रेट वह दर है जिस पर रिज़र्व बैंक अन्य वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज़ देता है. वहीं सीआरआर वो राशि है जो वाणिज्यिक बैंकों को रिज़र्व बैंक के खजाने में रखनी पड़ती है. ताज़ा फ़ैसले के बाद रेपो रेट बढ़ कर 8.5 फ़ीसदी और सीआरआर बढ़ कर 8.75 फ़ीसदी हो गया है. सीआरआर दो चरणों में बढ़ेंगे. पाँच जुलाई से इसमें 0.25 फ़ीसदी की वृद्धि होगी और इतनी ही बढ़ोत्तरी 19 जुलाई से शुरु होने वाले पखवाड़े में लागू होगी. रेपो रेट बढ़ाए जाने से ख़ुदरा कारोबार करने वाले बैंकों पर भी ब्याज़ दर बढ़ाने का दबाव बनेगा. इससे होम लोन, निजी लोन और वाहन लोन और महँगे होने की आशंका है. रिज़र्व बैंक महँगाई को क़ाबू में लाने के लिए इस वित्त वर्ष के दौरान कई बार रेपो रेट बढ़ा चुका है. लेकिन इसके बावजूद सात जून को समाप्त हुए सप्ताह में महँगाई की दर बढ़ कर 11.05 फ़ीसदी हो चुकी है. |
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