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बदला कारोबार ने हिला दिया बाज़ारों को | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के वित्तीय मामलों पर निगरानी रखने वाली संस्था प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने सट्टेबाज़ी के आधार पर शेयर कारोबार करने पर रोक लगाने के लिए कुछ सख़्त नियमों की घोषणा की है. सट्टेबाज़ी किसी भी शेयर बाज़ार में धन लगाने का एक अहम तरीक़ा बन चुका है. जब भी आप शेयर ख़रीदते या बेचते हैं तो आप इस बिंदू को भी नज़र में रखते हैं कि भविष्य में उस शेयर के दाम ऊपर उठेंगे या नीचे गिरेंगे यानी कितना नफ़ा या नुक़सान होने की संभावना है. इस तरह, अगर आप शेयर ख़रीदते हैं तो यह उम्मीद ज़रूर करते हैं कि उस ख़ास शेयर के दाम बढ़ेंगे. लेकिन अगर आपको लगता है कि भविष्य में किसी ख़ास शेयर के दाम गिरने वाले हैं तो आप उस शेयर को बेचने लगते हैं. शेयरों के दामों में गिरावट की अटकलबाज़ी लगाना यानी Short Selling दरअसल सट्टेबाज़ी से कहीं ज़्यादा जोखिम का काम है. इसमें जानबूझकर शेयर बाज़ार में घबराहट की स्थिति पैदा कर दी जाती है और बाज़ार की नब्ज़ को तोड़ा-मरोड़ा जाता है. इसे यूँ भी समझा जा सकता है. आपको लगता है कि किसी शेयर के दाम गिरने वाले हैं तो आप आप किसी बैंक से शेयर उधार लेते हैं और बैंक को भुगतान करने के भावी वादे के साथ उन शेयरों को बाज़ार में बेच देते हैं. मान लीजिए आप एक शेयर 1000 रुपए के हिसाब से बेचते हैं. और जब शेयरों के दाम वाक़ई गिर जाते हैं तो आप उसी शेयर को 700 रुपए के हिसाब से ख़रीद लेते हैं. तो इस तरह आपने हर शेयर पर 300 रुपए का मुनाफ़ा कमा लिया और अगर इस तरह का कारोबार लाखों शेयरों का हो तो मुनाफ़े का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है. और फिर जिस बैंक से आपने शेयर उधार लिए थे, आप उसके शेयर लौटा देते हैं. इसमें ख़ास बात ये है कि बैंक से शेयर उधार लेने के लिए आप बहुत छोटा सा शुल्क देते हैं जबकि बाज़ार में सट्टेबाज़ी करके आप कई गुना मुनाफ़ा कमा लेते हैं. इस तरह आपकी पूंजी ना के बराबर लगती है लेकिन मुनाफ़ा ख़ासा बड़ा होता है. लेकिन इसमें जोखिम ये है कि अगर आपकी अटकलबाज़ी के अनुसार शेयरों के दाम गिरने के बजाय ऊपर चला जाते हैं तो आपको तो शेयर उस बैंक को लौटाने हैं जिससे उधार लिए थे इसलिए हो सकता है कि आपको बैंक को वो शेयर लौटाने के लिए उस क़ीमत से कहीं ज़्यादा पर ख़रीदने पड़ें जिस पर आपने उधार लिए थे. क़ाननी दायरा ये तो हुआ क़ानूनी तरीक़ा. लेकिन इस कारोबार में बड़े पैमाने पर ऐसा भी देखा गया है कि शेयर सिर्फ़ ज़ुबानी ख़रीदे और बेच दिए जाते हैं और उसी में अरबों-खरबों रुपए या डॉलर इधर-उधर हो जाते हैं. आपने सिर्फ़ वादा करके यह कारोबार कर लिया कि आप हमारे नाम से एक लाख शेयर बेच दीजिए और वो शेयर एक महीने बाद जमा कर दिए जाएंगे. लेकिन जब दाम वास्तव में गिर जाते हैं तो आप कम क़ीमत में शेयर ख़रीद लेते हैं और जल्दी भुगतान का वादा करके एक सप्ताह में हासिल कर लेते हैं.
इस तरह आपने जो शेयर बेचे थे उन्हें दलाल या ख़रीदार तक पहुँचाने के लिए आपके पास तीन सप्ताह का ज़्यादा समय बचा है. इस तरह आपके पास शेयर वास्तविक रूप से नहीं भी होने के बावजूद आप सिर्फ़ वादे के आधार पर इतना बड़ा कारोबार कर लेते हैं और विशाल मुनाफ़ा कमा लेते हैं यानी एक तरह का बदला कारोबार करते हैं. ये Naked Short Selling यानी दाम गिरने का सट्टा लगाकर कारोबार करने की आदत तब और ज़्यादा जोखिम भरी हो जाती है जब न तो शेयर किसी से उधार लिए गए हैं और न ही विक्रेता के पास ख़ुद के शेयर हैं. इसलिए अब अमरीका के प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने इसी तरह की सट्टे बाज़ी और बदला कारोबार पर रोक लगाने के लिए सख़्त नियम बनाए हैं. प्रतिभूति और विनिमय आयोग का ख़याल है कि कुछ शेयर दलालों और व्यापारियों के इसी तरह के कारोबार की वजह से लेहमन ब्रदर्स जैसे विशालकाय बैंक के शेयर औंधे मुँह लुड़के. नए सख़्त नियमों में विक्रेताओं को अपनी मंशा के बारे में छूठ बोलने या समय पर शेयर उपलब्ध कराने में नाकाम रहने को ग़ैरक़ानूनी क़रार दिया गया है. इसके अलावा जो कंपनियाँ जिन शेयरों की ख़रीद – फ़रोख़्त करती हैं अगर उन्हें माँग पर तत्काल उपलब्ध कराने में नाकाम होती हैं तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. |
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