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बोझ कम करने में जुटी राज्य सरकारें | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आम लोगों पर पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी का बोझ हल्का करते हुए चार राज्य सरकारों ने करों में कटौती की घोषणा की है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में भारी वृद्धि को देखते हुए केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने बुधवार को पेट्रोल के दाम पाँच रूपए प्रति लीटर और डीज़ल के दाम तीन रूपए प्रति लीटर बढ़ाने की घोषणा की थी. साथ ही रसोई गैस यानी एलपीजी के दाम प्रति सिलेंडर 50 रूपए बढ़ा दिए गए थे. इसके बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों को पार्टी आलाकमान ने पेट्रोल और डीज़ल पर बिक्री करों में कटौती के निर्देश दिए हैं. हालाँकि सबसे पहले पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों पर बिक्री कर में पाँच फ़ीसदी तक की कटौती की घोषणा की. इससे पेट्रोल लगभग दो रूपए और डीज़ल एक रूपया 38 पैसा प्रति लीटर सस्ता हो जाएगा. दिल्ली में राहत दिल्ली में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में एलपीजी सिलेंडर पर मूल्य संवर्धित कर यानी वैट हटाने और सब्सिडी देने का फ़ैसला किया गया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फ़ैसले से दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की क़ीमत सिर्फ़ दस रूपए बढ़ेगी. अभी दिल्ली में एक सिलेंडर 294 रूपए में मिलता है जिसके लिए अब 304 रूपए देने होंगे. बिहार सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाले बिक्री कर में ढाई प्रतिशत और डीज़ल के बिक्री कर में 1.64 प्रतिशत की कटौती की है. तमिलनाडु सरकार ने भी राज्य में डीज़ल पर बिक्री कर दो प्रतिशत कम करने की घोषणा की है. विरोध केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों और विपक्ष ने पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें बढ़ाने के फ़ैसले का कड़ा विरोध किया है. मूल्य वृद्धि के विरोध में गुरुवार को पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में बंद का आह्वान किया गया.
भाजपा ने इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन जारी रखने का फ़ैसला किया है. पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के देश के नाम संदेश पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है कि देश के इतिहास में पहली बार किसी प्रशासकीय निर्णय के बाद प्रधानमंत्री को 'रोते-बिलखते' हुए सफाई देनी पड़ी है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश को आर्थिक आपातकाल की तरफ़ ले जा रही है. भाजपा प्रवक्ता का कहना था, "राज्य स्तर पर इस तरह की कटौतियों से महंगाई काबू नहीं होगी. ऐसा केवल केंद्रीय स्तर पर किए जाने वाले उपायों से ही हो सकता है." दूसरी ओर योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने कहा है कि मूल्य वृद्धि को जनविरोधी कहना ग़लत है. उन्होंन कहा कि ऐसा नहीं करने से देश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता था. | इससे जुड़ी ख़बरें पेट्रोल पाँच, डीज़ल तीन रुपए महंगा04 जून, 2008 | कारोबार बंद से तीन राज्यों में जनजीवन अस्तव्यस्त05 जून, 2008 | भारत और पड़ोस तेल में उबाल से बेहाल दुनिया भर के नेता05 जून, 2008 | कारोबार 'क़ीमतों में बढ़ोत्तरी अलोकप्रिय पर ज़रूरी'04 जून, 2008 | कारोबार 'खाद्यान्न संकट के लिए और सहायता'04 जून, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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