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अख़बारों की आम राय - 'चुनावी बजट' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में राजधानी दिल्ली के अख़बारों के प्रथम पृष्ठ पर और कई समाचार पत्रों के तो अनेक पन्नों पर बजट 2007-08 से संबंधित ख़बरें छाई हुई हैं. दिल्ली के अधिकतर अख़बारों ने इसे लोकलुभावन, चुनावी बजट की संज्ञा दी है. नवभारत टाइम्स की बैनर हेडलाइन है - "बजट पर पंजे की छाप." अख़बार लिखता है - "वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आम बजट द्वारा सबसे पहला और मुखर संदेश यह दिया है कि आम चुनावों के लिए यूपीए सरकार ख़ुद को पूरी तरह तैयार कर चुकी है." अपने संपादकीय में नवभारत टाइम्स लिखता है - "...चिदंबरम एक बहुत बड़े चैलेंज के मुकाबिल थे.....फ़िलहाल इतना कहा जा सकता है उन्होंने ख़ूब तैयारी, जोश और अक्लमंदी के साथ यह इम्तहान दिया है, और अगर किसी अनहोनी ने अपना साया न डाला, तो वे भारत की नाव को सही सलामत आगे बढ़ाने में कामयाब होंगे.." दैनिक हिंदुस्तान की सुर्खी है - "लो आया बजट झकास..." और हिंदी के इकनॉमिक टाइम्स की बैनर हेडलाइन है - "चुनावी बजट ने बोए तकड़ी फ़सल के बीज." हिंदुस्तान के संपादकीय की टिप्पणी है - "लोकप्रिय बजट का अर्थशास्त्र - समृद्धि के वितरण की और बेहतर कोशिश होनी चाहिए." हिंदुस्तान अपने संपादकीय में लिखता है - "यह हर ख़ासो-आम को मालूम था कि वित्त मंत्री पी चिंदबरम का यह चुनावी बजट होगा."
हिंदुस्तान अपने संपादकीय में आगे लिखता है - " यह बजट उसी तरह का है और इसमें समाज के सभी वर्गों के लिए भरपूर रियायतें हैं - किसान, शहरी मध्यवर्ग, महिलाएँ, वरिष्ठ नागरिक." अंग्रेज़ी के अख़बार द स्टेट्समैन ने सुर्खी लगाई है - "बजटिंग फ़ॉर पोल" यानी चुनाव को नज़र में रखते हुए बनाया गया बजट. इस समाचार पत्र ने अपने संपादकीय में सरकार की विकास नीतियों को लेकर बजट की ख़ासी आलोचना की है और सुर्खी लगाई है - "एपीज़िंग सोनिया" यानी सोनिया को ख़ुश करना. अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने प्रथम पृष्ठ पर सुर्खी लगाई है - "ऑल लाइन्स नाओ ओपन फ़ॉर वोटिंग" यानी अब मतदान सामने नज़र आ रहा है. उधर इंडियन एक्सप्रेस की सुर्खी है - "इन द लास्ट लैप, द पोल वॉल्ट." हिंदी दैनिक बिज़नेस स्टैंडर्ड की सुर्खी है - "बहुत बेले पापड़...बजट की ख़ातिर." जनसत्ता की बैनर हेडलाइन है - "सबके लिए राहत का पिटारा खोला चिदंबरम ने." मुख्य पृष्ठ पर जागरण कहता है - "चुनावी दरियादिली, तोहफों से भरी झोली." अमर उजाला ने भी कई अन्य अख़बारों की तरह पूरे पहले पन्ने पर बजट संबंधी ख़बरों को ही प्रमुखता दी है और मुख्य हेडलाइन लगाई है - "वोटों के लिए लुटाए नोट." | इससे जुड़ी ख़बरें बजट- 2008-0928 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना बजट: आपके सवाल, डॉक्टर झुनझुनवाला के जवाब28 फ़रवरी, 2008 | आपकी राय क़र्ज़ माफ़ी का कितना मिलेगा लाभ!29 फ़रवरी, 2008 | कारोबार क्या सस्ते, क्या महँगे29 फ़रवरी, 2008 | कारोबार बजट की ख़ास बातें एक नज़र में 29 फ़रवरी, 2008 | कारोबार भाजपा, वाम ने की बजट की आलोचना29 फ़रवरी, 2008 | कारोबार रक्षा बजट एक लाख करोड़ के पार29 फ़रवरी, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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